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लोकसभा चुनाव 2019 तय करेगा प्रियंका गांधी का राजनीतिक भविष्य

Sat, 18 May 2019 10:06 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, वाराणसी
शशिधर पाठक, वाराणसी Published by: शशिधर पाठक Updated Sat, 18 May 2019 10:06 PM IST
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Lok Sabha Election 2019 will decide political future of Priyanka Gandhi
प्रियंका गांधी वाड्रा (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव मतदान का आखिरी चरण पूरा हुआ और शाम को चाय-पान की दुकान पर चर्चा जारी है। राम सुभग पांडे ने प्रियंका गांधी वाड्रा की चर्चा छेड़ दी और भोजूबीर तिराहे के पास संजय सिंह के विश्लेषण से लोग सहमत नजर आए। पान लगा रहे दीपक की मुस्कराहट में राजनीति उनकी दिलचस्पी बयां कर रही थी। 

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एक मत यही था कि जिस तरह से प्रियंका गांधी ने धुआंधार उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार किया है, यदि कांग्रेस पार्टी आधा दर्जन सीटें न जीत सकी तो कांग्रेस महासचिव घास ही छीलेंगी। यानी राजनीति में यूपी में उनकी (प्रियंका) की दाल गलने वाली नहीं है।
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जनार्दन यादव का तर्क है कि कोई कुछ भी कहे, लेकिन प्रियंका के मैदान में आने से भाजपा नेताओं के माथे पर पसीना आ गया। यहां तक कि एक बार मायावती भी घबड़ा गई। हालांकि सभी का मानना है कि प्रियंका गांधी को अभी राजनीति में कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। क्योंकि कांग्रेस के पास न तो अब नेता बचे हैं और न ही कार्यकर्ता। 
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अच्छी बात यह है कि प्रियंका के हर कार्यक्रम में राज्य के हर कोने में जनता खुद चलकर आ रही है। राम सुभग का कहना है कि प्रियंका के हर कार्यक्रम में राहुल गांधी की तुलना में काफी अधिक भीड़ एकट्ठा हो रही है। शिवपूजन सिंह का दावा सबसे अलग है। शिवपूजन का कहना है कि प्रियंका गांधी लोकसभा चुनाव 2019 में केवल टेस्ट करने के लिए उतरी हैं। 

उन्होंने राहुल गांधी से दो गुनी रैली और कार्यक्रम किया है। शिवपूजन का कहना है कि प्रियंका के निशाने पर 2019 नहीं बल्कि 2022 है। वह 2022 में उ.प्र. में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगाएंगी।

नहीं जीती कांग्रेस तो प्रियंका फेल?

देखिए, बात साफ है... अगर कांग्रेस आधा दर्जन सीट गई तो कांग्रेस और प्रियंका गांधी की इज्जत बच जाएगी। कदाचित केवल अमेठी, रायबरेली ही हिस्से में आई तो प्रियंका भी फेल। लाल चंदन, गले में भगवा गमछा और यह राय थी अनिरुद्ध तिवारी की। अनिरुद्ध तिवारी ने एक तर्क और दिया। 

उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी ने कुछ किया हो या न किया हो, घर में दुबक कर बैठे कांग्रेसियों को तो सड़क पर उतार ही दिया। तिवारी के इस मत से लगभग सबने सहमति जताई।  पूरी चर्चा का सार यह रहा है कि छह सीट पाने पर प्रियंका गांधी और कांग्रेस सफल, आठ सीट आने पर अच्छे नंबर से पास और कदाचित दस या इससे अधिक सीट आई(असंभव है) तो प्रियंका गांधी ने टॉप कर दिया। 

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