सरकारी नौकरी छोड़कर संघ के प्रचारक बन गए थे के. राजशेखरन, केरल में मजबूत की थी 'आरएसएस' की जड़ें
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के. राजशेखरन कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर के खिलाफ केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। राजशेखरन ने नौ महीने के कार्यकाल के बाद मिजोरम के राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उनका इस्तीफा स्वीकार कर चुके हैं। के. राजशेखरन को मई 2018 में मिजोरम का राज्यपाल बनाया गया था। असम के राज्यपाल जगदीश मुखी राजशेखरन की जगह मिजोरम के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। आइए जानते हैं कौन हैं के. राजशेखरन
संघ विचारधारा से आते हैं राजशेखरन, रहे हैं प्रचारक
- के. राजशेखरन संघ विचारधारा से आते हैं।
- वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रहे हैं।
- 2015 में उन्हें केरल का भाजपा अध्यक्ष बनाया गया था।
- वह तीन सालों तक केरल के भाजपा अध्यक्ष के पद पर रहे।
1970 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े थे राजशेखरन
के. राजशेखरन 1970 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े और केरल में संघ को मजबूत किया। 1987 में के. राजशेखरन ने सरकारी नौकरी छोड़ी और संघ में पूर्णकालिक प्रचारक हो गए। वे पत्रकार भी रह चुके हैं। 1974 में उन्होंने सब-एडिटर के तौर पर अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद पत्रकारिता छोड़कर वह सरकारी नौकरी में चले गए और फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में तैनात हो गए। 1979 में के. राजशेखरन को केरल के कोट्टायम जिले से विश्व हिंदू परिषद का जिला सेक्रेटरी बनाया गया। 2009 में के. राजशेखरन को सबरीमाला अयप्पा सेवा समाजम के महासचिव के तौर पर चुना गया था।
क्यों हैं के. राजशेखरन चर्चा में?
के. राजशेखरन मिजोरम के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने और कांग्रेसी नेता शशि थरूर के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना को लेकर चर्चा में हैं।राजशेखरन ने अपने इस्तीफे के बाद कहा- 'मुझे केरल में होना चाहिए। मैंने केरल में ही रहने की इच्छा की है, तभी इस्तीफा दिया है।'