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गांधीनगर रैली में बोले उद्धव, अमित भाई भाजपा-शिवसेना का दिल मिला, पीछे से वार संस्कार में नहीं

Sat, 30 Mar 2019 01:38 PM IST
रचना शर्मा चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रचना शर्मा Updated Sat, 30 Mar 2019 01:38 PM IST
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Lok Sabha Election 2019: Uddhav Thackeray talks of Shiv Sena-BJP bonohomie in Amit Shah rally
अमित शाह और उद्धव ठाकरे - फोटो : PTI
गुजरात के गांधीनगर में नामांकन से पहले अमित शाह ने रैली और रोड शो किया। यूं तो रैली में राजनाथ सिंह से लेकर राम विलास पासवान तक कई नेता रहे लेकिन शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने छोटे से एक भाषण में बीते कुछ सालों की तल्खी को धोने की कोशिश की। 
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रैली में उद्धव ने कहा, "कुछ लोगों को मेरे यहां पहुंचने से आनंद हुआ पर कुछ को पेट मे दर्द हो रहा होगा। कुछ लोग खुशी मना रहे थे कि एक विचारधारा वाले दल लड़ झगड़ रहे थे।। हममें मनमुटाव जरुर था पर जब अमितभाई मेरे घर आये और बात हुई तो यह सब खत्म हो गया। शिवसेना और भाजपा की विचारधारा एक है जो हिंदुत्व है। मेरे पिताजी कहते थे कि हिंदुत्व हमारी सांस है। यह रुक जाये तो कैसे चल सकते हैं।"
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शिवसेना प्रमुख ने आगे जोड़ा,

विपक्ष के गठबंधन में दिल मिले या न मिले वे हाथ मिला रहे हैं पर भाजपा-शिवसेना का दिल मिल गया है। हमने यही सोचा कि पिछले पांच साल में जो हुआ हो गया पर उससे पिछले 25 से 30 साल में क्या हो रहा था। अकाली दल को छोड़ कर अन्य सभी दल भाजपा और शिवसेना को अछूत मानते थे। पता नहीं कैसे 25 साल गुजर गए। हमारा सपना सच्चाई बना। दिल्ली के तख्त पर भगवा लहरा गया। हमारा नेता एक है। विपक्ष को पूछना चाहता हूं कि आपका नेता कौन है। हमें भी सत्ता चाहिए पर हम कुर्सी के लिए पागल नहीं हो गये हैं। यहां जैसे भीड़ मोदी-मोदी जी के नारे लगा रही है वैसे विपक्ष से बोलो कि एक नेता का नारा लगाये। उनमें न कोई  सोच एक जैसी है और न एकता। हर नेता सोचता है कि वही प्रधानमंत्री बने। जब  पहले ही ऐसी टांग खचाई होगी तो वे आगे कैसे बढ़ सकते हैं। अमित भाई मै आया हूं मेरे पिता जी ने सिखाया है कि  जिसकी भी मदद करो दिल खोल कर करो। पीछे से वार के हमारे संस्कार नहीं है। "   


2014 में केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के ठीक बाद ही दोनों के रिश्ते बिगड़ने लगे थे। पहले केंद्र में हिस्सेदारी को लेकर और फिर राज्य के स्तर पर। शिवसेना, महाराष्ट्र के भीतर सत्ता में बेहतर भागीदारी चाहती थी, मुख्यमंत्री की कुर्सी चाहती थी। लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो तल्खी और बढ़ गई। बीते साल एक वक्त ऐसा भी आया, जब शिव सेना ने एलानिया तौर पर कह दिया कि 2019 के चुनाव में वो अकेले उतरने वाली है। लेकिन जब 2019 आ ही गया और भाजपा की तरफ से रिश्ते सुधारने की कोशिश हुई तो पुराना मैल काफी हद तक धुल गया। अमित शाह ने उद्धव से, मातोश्री जाकर मुलाकात की, गुलदस्ते भेंट करने की तस्वीरें मीडिया में आईं और साथ आए गठबंधन के बयान। 

महाराष्ट्र में अब दोनों पार्टियां मिल कर लड़ रही हैं। महाराष्ट्र की कुल 48 सीटों में से 25 सीटों पर भाजपा तो 23 पर शिव सेना लड़ेगी।

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