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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, किसी फार्म में लिख देने से राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक नहीं हो गए
Thu, 09 May 2019 05:22 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Thu, 09 May 2019 05:22 PM IST
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राहुल गांधी (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है। याचिका में राहुल पर कार्रवाई करने की मांग की गई थी। साथ ही उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराए जाने का अनुरोध किया गया था। याचिका में कहा गया था कि उन्होंने स्वेच्छा से ब्रिटिश नागरिकता ली हुई है। याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, 'हम इस याचिका को खारिज करते हैं। इसमें हमें कोई योग्यता नहीं मिली है।'
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि एक फार्म में राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने का कथित रूप से उल्लेख है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि 2005-06 में ब्रिटेन की एक कंपनी के वार्षिक डाटा के साथ संलग्न फार्म में राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने का कथित रूप से उल्लेख है।
पीठ ने कहा, ‘‘यदि कोई कंपनी किसी फार्म में उनकी राष्ट्रीयता ब्रिटिश लिख दे तो इससे वह ब्रिटिश नागरिक नहीं बन जाते।’’
दो मई को राहुल गांधी की नागरिकता के बारे में फैसला होने तक उनके लोकसभा के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष जय भगवान गोयल और सी पी त्यागी की इस याचिका का उल्लेख किया गया। जिसपर पीठ ने कहा था, ‘हम इसे देखेंगे।’
गृह मंत्रालय ने हाल ही में राहुल गांधी को एक नोटिस देकर उनकी नागरिकता के बारे में शिकायत में उठाए गए सवाल पर एक पखवाड़े के भीतर ‘तथ्यात्मक स्थिति’ स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस संबंध में गृह मंत्रालय और निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य पेश किए गए हैं और ऐसी स्थिति में राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी। राहुल उत्तर प्रदेश के अमेठी और केरल के वायनाड संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।
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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि एक फार्म में राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने का कथित रूप से उल्लेख है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि 2005-06 में ब्रिटेन की एक कंपनी के वार्षिक डाटा के साथ संलग्न फार्म में राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने का कथित रूप से उल्लेख है।
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पीठ ने कहा, ‘‘यदि कोई कंपनी किसी फार्म में उनकी राष्ट्रीयता ब्रिटिश लिख दे तो इससे वह ब्रिटिश नागरिक नहीं बन जाते।’’
"We dismiss the petition. There is no merit in the petition," said CJI Ranjan Gogoi https://t.co/QWLM77oc5r
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) May 9, 2019
दो मई को राहुल गांधी की नागरिकता के बारे में फैसला होने तक उनके लोकसभा के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष जय भगवान गोयल और सी पी त्यागी की इस याचिका का उल्लेख किया गया। जिसपर पीठ ने कहा था, ‘हम इसे देखेंगे।’
गृह मंत्रालय ने हाल ही में राहुल गांधी को एक नोटिस देकर उनकी नागरिकता के बारे में शिकायत में उठाए गए सवाल पर एक पखवाड़े के भीतर ‘तथ्यात्मक स्थिति’ स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस संबंध में गृह मंत्रालय और निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य पेश किए गए हैं और ऐसी स्थिति में राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी। राहुल उत्तर प्रदेश के अमेठी और केरल के वायनाड संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।
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