फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Lok Sabha Election 2019: MNS support gave Congress and NCP new enthusiasm

मनसे के समर्थन ने कांग्रेस एनसीपी में फूंकी नई जान, विरोधियों का पसीना छुड़ा रहे हैं राज ठाकरे

Sun, 28 Apr 2019 03:33 AM IST
गौरव द्विवेदी विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, मुंबई
विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, मुंबई Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sun, 28 Apr 2019 03:33 AM IST
विज्ञापन
Lok Sabha Election 2019: MNS support gave Congress and NCP new enthusiasm
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के बीच मुकाबले में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे भी एक जबर्दस्त धुरी बन गए हैं। बिना चुनाव मैदान में उतरे ही राज ठाकरे ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। भाजपा- शिवसेना गठजोड़ के खिलाफ व कांग्रेस एनसीपी गठबंधन के पक्ष में राज खुलकर मोर्चा संभाल रहे हैं। वे न सिर्फ मुंबई बल्कि राज्य में अन्य स्थानों पर भी जन सभाएं कर रहे हैं। राज की सभाओं में उमड़ रही भीड़ ने भाजपा के साथ साथ उद्धव की भी नींद उड़ा दी है। राज के निशाने पर अगर पीएम मोदी हैं, तो इरादा उद्धव से शिवसेना और बाला साहेब की विरासत छीनने और खोई जमीन वापस पाने का है। 

विज्ञापन


हर जगह राज ठाकरे की इस नई भूमिका की चर्चा है। जिन मुद्दों पर विपक्ष के दिग्गज भी बगलें झांकते हैं, उन्हें राज जोरदार तरीके से उठा रहे हैं। पुलवामा को लेकर सीधे प्रधानमंत्री के  अफसरों को निशाने पर लेना हो या नोटबंदी पर कपिल सिब्बल द्वारा किए गए खुलासे का मामला हो या बालाकोट हवाई हमले को लेकर विपक्ष के सवाल हों या जीएसटी को लेकर कारोबारियों की तबाही की शिकायत, राज ठाकरे सीधे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सवालों के घेरे में खड़ा करते हैं। 
विज्ञापन


ठेठ मराठी अंदाज से लोगों को याद आ रहे बाल ठाकरे 

अपने ठेठ मराठी अंदाज में राज इन मुद्दों को जिस तरह उठाते हैं तो लोगों को बाल ठाकरे की याद ताजा हो जाती है। उन्होंने जिस तरह हमला बोलना शुरू किया है, उससे शिवसेना के जनाधार में उनका आकर्षण बढ़ने लगा है। राज कह रहे हैं कि मोदी ने पांच साल मांगे थे। अब राहुल गांधी को मौका क्यों नहीं मिलना चाहिए। राज ने मुस्लिम विरोधी और उत्तर भारतीय विरोधी तेवरों को भी नरम किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मोदी के खिलाफ जो मुद्दे उद्धव उठाते थे, वही राज के हथियार

जिन मुद्दों को राज उठा रहे, ये वही मुद्दे हैं जिन्हें भाजपा से चुनावी समझौते से पहले उद्धव ठाकरे अपने मुखपत्र सामना में संपादकीय के जरिए उठाते थे या फिर सभाओं में बोलते थे। तब शिवसेना के जो कार्यकर्ता जोश से भर उठते थे। अब उद्धव के तेवर नरम पड़ जाने की वजह से वे राज से जुड़ रहे हैं। रराज भी उसे बखूबी समझ रहे हैं और वह चुन चुन कर उन इलाकों में जा रहे हैं जहां भाजपा से ज्यादा शिवसेना का जनाधार है।   


नये प्रयोग से आंबेडकर-ओवैसी गठजोड़ भी पड़ा कमजोर

वरिष्ठ पत्रकार अनुराग चतुर्वेदी के मुताबिक राज जिस तरह बिना प्रत्याशी उतारे प्रासंगिक हो गए हैं, वह नया प्रयोग है। इसने प्रकाश अंाबेडकर और असद्दुदीन ओवैसी के दलित मुस्लिम गठजोड़ की चुनौती को भी कमजोर किया है। पत्रकार अभिलाष अवस्थी कहते हैं कि शिवसेना की राजनीति मुंबई में गुजराती और दक्षिण भारतीयों के खिलाफ शुरू हुई थी। राज, मोदी व शाह पर निशाना साध कर वह शिवसेना के जनाधार की भावना उभारने की कोशिश कर रहे हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed