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नोटबंदी पर मोदी सरकार को घेरने का किया था दावा, लेकिन नदारद रहे विपक्षी दलों के नेता

Tue, 26 Mar 2019 08:15 PM IST
अमित मंडल डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Tue, 26 Mar 2019 08:15 PM IST
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Lok Sabha Election 2019: Congress leaders dominate press meet on demonetisation
विपक्षी दल - फोटो : ANI

विपक्षी दलों ने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से नोटबंदी घोटाला-भाजपाई गड़बड़झाला मुहिम शुरू करने का एलान किया था। इसी मुद्दे पर मंगलवार को एक प्रेसवार्ता रखी गई थी। कहा यह गया था कि 15-17 विपक्षी दल कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंचेंगे। मंच पर दो पंक्तियों में करीब डेढ़ दर्जन कुर्सियां लगाई गईं। जब नेता मंच पर पहुंचे तो उनमें विपक्ष कम और कांग्रेस पार्टी ही ज्यादा नजर आई। 

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कांग्रेस को छोड़कर अन्य विपक्षी दलों की बात करें तो मुश्किल से चार-पांच नेता ही वहां पहुंचे। प्रेसवार्ता खत्म होते ही  खुसर-फुसर होने लगी कि ज़्यादातर विपक्षी नेता तो यहां नहीं आए। यह सवाल भी उठने लगा कि क्या विपक्षी एकता का मंच कमजोर पड़ता जा रहा है।
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खास बात है कि इस कार्यक्रम का निमंत्रण भी कांग्रेस नेताओं के द्वारा दिया गया था। यह कहा गया कि तमाम विपक्षी दल मिलकर नोटबंदी पर मोदी सरकार को घेरने के लिए कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में पहुंच रहे हैं। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने प्रेसवार्ता की शुरुआत की। इसके बाद कपिल सिब्बल ने वीडियो टेप दिखाया। मंच पर पहली लाइन में ही कांग्रेस नेता अहमद पटेल और मल्लिकार्जुन खड़गे भी बैठे थे। दूसरी लाइन में अधिकांश कुर्सियां खाली पड़ी थीं। 
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लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा और झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन पहली पंक्ति में ही बैठे थे। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला भी प्रेसवार्ता में मौजूद थे, लेकिन वे मंच पर नहीं आए। समाजवादी पार्टी, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, टीडीपी, सीपीआई और सीपीआई (एम) जैसी पार्टियों के नेता भी प्रेसवार्ता से नदारद रहे। इस बाबत मनोज झा का कहना था कि ऐसी कोई बात नहीं है। विपक्ष एकजुट है। हो सकता है कि विपक्ष के दूसरे साथी चुनाव के चलते दिल्ली से बाहर हों।

खास बात है कि कांग्रेस जब कभी इस तरह से विपक्षी नेताओं को बुलाती है तो वहां कम ही नेता पहुंचते हैं। किसी दूसरे विपक्षी दल ने जब कभी कोई आह्वान या रैली की है तो वहां कांग्रेस पार्टी के नेता अवश्य पहुंचते हैं। कोलकाता में ममता बनर्जी की रैली में करीब 21 विपक्षी दलों ने शिरकत की थी। इसके अलावा विपक्ष का जंतर मंतर पर धरना हो या अन्य कोई कार्यक्रम, कांग्रेस पार्टी के एक-दो नेता नजर आ जाते हैं।


चुनावी नतीजों के बाद हम सब एक होंगे: कांग्रेस 

खासतौर पर यूपी में सपा-बसपा या पश्चिम बंगाल में टीएमसी के साथ गठबंधन न होने का सवाल जब पूछा जाता है तो कांग्रेस का जवाब होता है कि चुनाव के बाद सब एक दिखाई देंगे। रणदीप सुरजेवाला कहते हैं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि गठबंधन हुआ है या नहीं, विपक्षी दलों में से कौन साथ आ रहा है और कौन नहीं। जब लोकसभा चुनाव के परिणाम आएंगे तो पूरा विपक्ष एकजुट हो जाएगा। सपा-बसपा हों या दूसरे दल, वे सब कांग्रेस पार्टी के साथ हैं।
 

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