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Hindi News ›   India News ›   Lok Sabha Chunav 2019: Vinod Khannas wife supports PM Modi despite ticket to sunny deol fm Gurdaspur

पंजाब के गुरदासपुर से टिकट नहीं मिलने के बावजूद विनोद खन्ना की पत्नी का पीएम मोदी को पूर्ण समर्थन

Sat, 27 Apr 2019 12:30 PM IST
Nilesh Kumar चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Sat, 27 Apr 2019 12:30 PM IST
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Lok Sabha Chunav 2019: Vinod Khannas wife supports PM Modi despite ticket to sunny deol fm Gurdaspur
Kavita Khanna with vinod khanna(File Photo)

पंजाब के गुरदासपुर से भाजपा के टिकट की उम्मीद कर रही दिवंगत नेता और अभिनेता विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना ने कहा कि यह उनका निर्णय है कि वह इसे व्यक्तिगत मुद्दा नहीं बनाने जा रहीं। उन्होंने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत त्याग है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनका पूर्ण समर्थन है। भाजपा ने यहां से मथुरा सांसद हेमा मलिनी के अभिनेता पुत्र सनी देओल को चुनावी मैदान में उतारा है। सनी हाल ही में पार्टी में शामिल हुए और उन्हें गुरदासपुर से टिकट दे दिया गया। 

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इस निर्णय से कविता आहत हुई थीं। उन्होंने शनिवार को यह भी कहा कि उन्हें दुख पहुंचा है। वह जानती हैं कि पार्टी के पास टिकट के निर्णय लेने का अधिकार है, लेकिन इसका एक तरीका होना चाहिए। पार्टी ने जिस तरीके से यह निर्णय लिया, वह खुद को तुच्छ और परित्यक्त(रिजेक्टेड) महसूस कर रही हैं। 
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इससे पहले शुक्रवार को कविता खन्ना ने संकेत दिया कि वह गुरदासपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकती हैं। उन्होंने कहा था कि भाजपा के दरकिनार किए जाने के बाद गुरदासपुर से ढेर सारे लोगों का उनपर दबाव है। कविता खन्ना का कहना था कि उन्होंने अपने पति के निधन से पहले और बाद में वर्षो तक उस क्षेत्र में काम किया है।  यह टिकट मेरे लिए कोई निजी मामला नहीं था। इससे बड़े मुद्दे हैं, यह क्षेत्र के विकास और वहां के लोगों की प्रगति का मामला था। 
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1998 से 2014 तक सांसद रहे थे विनोद खन्ना
दिवंगत भाजपा नेता विनोद खन्ना पिछले चार लोकसभा चुनावों से इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे थे। उन्होंने 1998, 1999, 2004 और 2014 में इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था। 2017 में उनका निधन होने के बाद उसी साल हुए उपचुनाव में भाजपा ने स्वर्ण सालारिया को उम्मीदवार बनाया था, जोकि कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने हार गए थे। कविता खन्ना को उस समय भी उम्मीद थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर दिया था। 

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