उस गुरदासपुर सीट के बारे में हर जानकारी जहां से अक्षय कुमार के चुनाव लड़ने की उड़ी अफवाह
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पंजाब के गुरदासपुर सीट से चुनाव लड़ने की अटकलों को लेकर सोमवार को बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार करीब तीन घंटे तक मीडिया सुर्खियों में रहे। 51 साल के अक्षय कुमार ऊर्फ राजीव हरि ओम भाटिया ने जब तक ट्वीट कर इन अफवाहों पर विराम नहीं लगाया तब तक चर्चाएं जोरों पर रही। इसके बाद अक्षय कुमार को सफाई देनी पड़ी- 'मैं चुनाव लड़ने नहीं जा रहा।' इससे पहले तक उनके भाजपा की तरफ से गुरदासपुर सीट से चुनाव लड़ने की सारी संभावनाओं को मीडिया ने टटोल लिया था। यहां तक कहा जाने लगा था कि अपनी राष्ट्रवादी छवि की वजह से अक्षय कुमार इस सीट के लिए भाजपा की तरफ से सबसे योग्य उम्मीदवार हैं।
दरअसल, ये सारी अटकलें अक्षय कुमार के एक ट्वीट से लगी और उनके एक ट्वीट से ही खत्म भी हुईं। अक्षय ने सुबह 9:45 बजे ट्वीट किया- 'मैं एक ऐसे क्षेत्र में कदम रखने जा रहा हूं जो इससे पहले कभी नहीं किया। उत्साहित भी हूं और थोड़ा नर्वस भी। आपको अपडेट देता रहूंगा।' बस फिर क्या था- अक्षय कुमार के चुनाव लड़ने की सुर्खियां चरम पर पहुंच गईं। बाद में करीब दो बजे उनका एक ट्वीट और आया जिसमें कहा गया- 'आपने मेरे पहले के ट्वीट में जो रुचि दिखाई उसके लिए मैं आपका आभारी हूं लेकिन स्पष्ट कर दूं कि मैं चुनाव लड़ने नहीं जा रहा हूं।' ऐसे में आइए एक नजर उस गुरदासपुर सीट पर डालते हैं जो अक्षय कुमार की वजह से एक बार फिर चर्चाओं में सबसे शीर्ष पर पहुंची।
गुरदासपुर सीट क्यों है खास?
गुरदासपुर सीट को लेकर इससे पहले एक और अफवाह उड़ी थी। अभिनेता सनी देओल के भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात के बाद कयास लगाए गए थे कि पार्टी इस सीट से उन्हें चुनाव मैदान में उतार सकती है। पंजाब में भारतीय जनता पार्टी अकाली दल के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। यहां की 13 लोकसभा सीटों में से भाजपा को गुरदासपुर, अमृतसर और होशियारपुर से उम्मीदवार खड़े करने हैं। बाकी की सीटों पर अकाली दल अपने प्रत्याशी उतारेगा। ऐसे में यहां की इन तीन सीटों पर सबकी नजर लगी हुई थी। भाजपा ने रविवार को अमृसर से हरदीप पुरी के नाम की घोषणा तो की लेकिन होशियारपुर और गुरदासपुर सीट से किसी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की गई। सोमवार को जब अक्षय कुमार का ट्वीट आया तो उनके इस सीट से लड़ने को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। इस सीट पर इससे पहले भी भाजपा की तरफ से अभिनेता विनोद खन्ना जीते थे।
2014 में गुरदासपुर सीट से जीते थे विनोद खन्ना
ये सीट विनोद खन्ना के निधन के बाद खाली हुई है। पिछले साल 27 अप्रैल को विनोद खन्ना का निधन हो गया था। उनकी पत्नी कविता का नाम भी इस सीट से चर्चा में है। विनोद खन्ना 1997 में भाजपा में शामिल हुए। 1998 में गुरदासपुर से पहली बार चुनाव लड़ा और जीते भी। 1999 और 2004 के चुनावों में बी विनोद खन्ना को जीत हासिल हुई। 2009 में भले उन्हें ये सीट गंवानी पड़ी हो लेकिन 2014 की मोदी लहर में एक बार फिर विनोद खन्ना गुरदासपुर से सांसद बने।
2011 की जनगणना के मुताबिक, गुरदासपुर जिला पंजाब के सभी जिलों में तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला जिला है। यहां की 31 फीसदी आबादी शहरी इलाके में बसती है। यहां की जनसंख्या 22 लाख से ज्यादा है और साक्षरता दर 79 फीसदी से ज्यादा है। इस जिले की स्थापना 17वीं शताब्दी में गुरिया जी ने की थी तभी इसका नाम गुरदासपुर पड़ा।
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