पश्चिम बंगाल: तीन सीटों पर तीन राजनीतिक दलों की साख दांव पर
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पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान के दौरान तीन सीटों पर दिलचस्प मुकाबले के आसार हैं। इन तीन सीटों पर तीनों राजनीतिक दलों- तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और माकपा की साख दांव पर हैं। इन तीनों को पिछली बार एक-एक सीटें मिली थीं। जलपाईगुड़ी को छोड़ भी दें तो रायगंज में माकपा उम्मीदवार और निवर्तमान सांसद मोहम्मद सलीम को अबकी बार कड़ी चुनौती से जूझना पर रहा है। उधर, दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की सीट पर भी अबकी गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के दो गुटों में बंट जाने की वजह से भाजपा के लिए यह सीट बचाना आसान नहीं है।
जलपाईगुड़ी संसदीय सीट चाय बागान बहुल रही है। वर्ष 1980 से 2009 तक यह सीट माकपा का गढ़ थी। लेकिन वर्ष 2014 में तृणमूल कांग्रेस के विजय चंद्र बर्मन ने माकपा उम्मीदवार महेंद्र कुमार राय को लगभग 70 हजार वोटों के अंतर से पराजित कर यह सीट जीती। उस समय 2.21 लाख वोटों के साथ भाजपा उम्मीदवार सत्यलाल सरकार यहां तीसरे नंबर पर रहे थे। अबकी तृणमूल कांग्रेस ने तो यहां विजय चंद्र बर्मन को ही मैदान में उतारा है जबकि माकपा और भाजपा ने अपने उम्मीदवार बदलते हुए यहां क्रमश: भागीरथ राय और जयंत राय को टिकट दिया है।
दार्जीलिंग संसदीय सीट पर वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों के मुकाबले अबकी समीकरण बदल गए हैं। जिस गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के एक इशारे पर इलाके में किसी भी उम्मीदवार की किस्मत तय होती थी, वह अब खुद ही दो गुटों में बंटा हुआ है। मोर्चा का विमल गुरुंग वाला गुट भाजपा के साथ है तो विनय तामंग वाला गुट ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ। गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) ने भी भाजपा को ही समर्थन देने का एलान किया है।
पिछली बार सलीम को 29 फीसदी वोट मिले थे और उनकी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार दीपा दासमुंशी को 28.5 फीसदी। तब यहां भाजपा व तृणमूल कांग्रेस को क्रमश: 18.32 और 17.39 फीसदी वोट मिले थे। तृणणूल कांग्रेस ने इस बार यहां अपने विधायक और स्थानीय नगरपालिका अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल को मैदान में उतारा है जबकि भाजपा ने अपने प्रदेश महासचिव देवश्री चौधरी को।
भाजपा उम्मीदवार एस.एस.आहलुवालिया पिछली बार इस सीट से जीत कर केंद्र में मंत्री बने थे। लेकिन वर्ष 2017 में पर्वतीय इलाके में अलग राज्य की मांग में महीनों लंबी हिंसा और आगजनी के दौरान उनके इलाके से गायब रहने की वजह से आम लोगों में भारी नाराजगी थी। इसी वजह से उनका पत्ता साफ करते हुए भाजपा ने मोर्चा के विमल गुरुंग गुट और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के समर्थन से एक कारोबारी राजू सिंह बिष्ट को इस सीट पर अपना उम्मीदवार बनाया है।
विनय तामंग की अगुवाई वाले मोर्चा गुट ने तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार अमर सिंह राई का समर्थन करने का एलान किया है। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता शंकर मालाकार मैदान में हैं तो माकपा ने अपने पूर्व राज्यसभा सांसद सुमन पाठक को अपना उम्मीदवार बनाया है।
उत्तर दिनाजपुर जिला मुख्यालय रायगंज की संसदीय सीट पर पिछली बार माकपा उम्मीदवार मोहम्मद सलीम जीते थे। लेकिन अभकी उनकी राह भी आसान नहीं है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में वे महज 1634 वोटों के अंतर से जीते थे। इस बार भी इस सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी की पत्नी दीपा दासमुंशी कांग्रेस उम्मीदवार हैं। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने भी यहां पूरी ताकत झोंक दी है।
यह संसदीय सीट लंबे अरसे तक कांग्रेस का गढ़ रही है। पहले यहां वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रियरंजन दासमुंशी जीतते रहे हैं और उसके बाद उनकी पत्नी दीपा दासमुंशी यहां चुनाव जीत चुकी हैं। लेकिन वर्ष 2014 के चुनावों में भाजपा के मजबूती से लड़ने की वजह से कांग्रेस के समीकरण गड़बड़ गए। भाजपा के कांग्रेस वोट बैंक में गहरी सेंध लगाने की वजह से माकपा के मोहम्मद सलीम कम वोटों के अंतर से ही सही, यहां जीत गए थे।
पिछली बार सलीम को 29 फीसदी वोट मिले थे और उनकी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार दीपा दासमुंशी को 28.5 फीसदी। तब यहां भाजपा व तृणमूल कांग्रेस को क्रमश: 18.32 और 17.39 फीसदी वोट मिले थे। तृणणूल कांग्रेस ने इस बार यहां अपने विधायक और स्थानीय नगरपालिका अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल को मैदान में उतारा है जबकि भाजपा ने अपने प्रदेश महासचिव देवश्री चौधरी को।