उत्तर-पूर्व के सातों राज्यों में अलग-थलग हुई कांग्रेस, कभी बोलती थी तूती
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पू्र्वोत्तर के सात में से छह राज्यों में कांग्रेस की तूती बोलती थी, लेकिन इस लोकसभा चुनाव में पार्टी अलग-थलग पड़ती नजर आ रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 25 में से आठ सीटें जीती थीं। अब उसके सामने उन्हें बचाने की चुनौती है। वर्ष 2014 में पूर्वोत्तर के बदले माहौल में भाजपा का कब्जा लगातार बढ़ता रहा है। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने पहले असम गंवाया, फिर मणिपुर। यह सिलसिला अरूणाचल, मेघालय और मिजोरम तक जारी रहा।
त्रिपुरा में कभी मुख्य विपक्षी रही कांग्रेस बीते विधानसभा में खाता भी नहीं खोल पाई। नागालेंड में भी यही हुआ। अब छटपटा रही कांग्रेस भाजपा को निशाना बना रही है। उसकी दलील है कि लोग एनडीए सरकार से आजिज आ चुके हैं। पूर्वोत्तर कांग्रेस समन्वय समिति के अध्यक्ष और मेघालय के पूर्व सीएम मुकुल संगमा आरोप लगाते हैं कि भाजपा पूर्वोत्तर को भी जम्मू-कश्मीर बनाना चाहती है।
नागरिकता (संशोधन) विधेक पारित होने की स्थिति मे इलाके की परिस्थिति के बारे मे कल्पना करना भी मुश्किल था। इस विधेयक और एनआरसी को मुद्दा बनाकर कांग्रेस आगे बढ़ रही है, लेकिन अब उसके पास सहयोगी कहां बचे हैं? चुनाव के बाद कई सहयोगी बनाए जा सकते हैं।
25 लोकसभा में 8 खास सीटें
मेघालय की तूरा
गुवाहाटी
असम की सिलचर
डिब्रूगढ़
धुबड़ी
कालियाबोर सीट
अरूणाचल पश्चिम
नगांव