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लोको पायलटों का प्रदर्शन: आयकर सीमा में छूट, बेहतर भत्ते, पर्याप्त आराम की मांग; रिक्तियों का मुद्दा भी उठाया

Sat, 28 Mar 2026 10:52 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Sat, 28 Mar 2026 10:52 PM IST
सार

यूनियन ने कहा कि हर साल लगभग 550 से 600 लोको पायलट/सहायक लोको पायलट चिकित्सा कारणों से अयोग्य घोषित हो जाते हैं, जो वर्तमान काम करने की परिस्थितियों के कारण व्यावसायिक तनाव के उच्च स्तर को दर्शाता है।

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Loco pilots union protest Demand income tax exemption better allowances adequate rest also raise vacancy issue
लोको पायलटों का प्रदर्शन - फोटो : ANI

विस्तार

ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (एआईएलआरएसए) ने शनिवार को नई दिल्ली में एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन और अधिकार घोषणा सम्मेलन का आयोजन किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों की विभिन्न मांगों को सरकार के सामने रखना था। इनमें मुख्य रूप से रनिंग भत्ते पर आयकर छूट की सीमा बढ़ाना, आउटस्टेशन ड्यूटी की सीमा तय करना और पर्याप्त आराम सुनिश्चित करना शामिल है।
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आयकर छूट की सीमा पर असंतोष
एसोसिएशन के सदस्यों ने शुक्रवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान बताया कि उनके रनिंग भत्ते का 70% हिस्सा आयकर छूट के दायरे में आता है, लेकिन इसकी मासिक सीमा 2010 से ₹10,000 पर स्थिर है। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक है, क्योंकि 2012 से 2024 के बीच रनिंग भत्ते की दरों में कई बार संशोधन हुआ है, जिससे यह लगभग तीन गुना बढ़ गया है, फिर भी छूट की सीमा ₹10,000 ही बनी हुई है। 
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एआईएलआरएसए के महासचिव के. सी. जेम्स के अनुसार इस स्थिति के कारण रनिंग स्टाफ को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की कि इस छूट की सीमा को बढ़ाकर ₹30,000 प्रति माह किया जाए, ठीक उसी तरह जैसे कार्यालय कर्मचारियों के लिए यात्रा भत्ते (TA) की छूट सीमा को समय-समय पर संशोधित किया गया है।

रनिंग भत्ता दरों में विसंगतियां
एसोसिएशन ने रेलवे मंत्रालय के हालिया फैसले का स्वागत किया है, जिसने ढाई साल बाद रनिंग भत्ता दरों को संशोधित किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय ने पूरी तरह से न्याय नहीं किया है, क्योंकि किलोमीटर अलाउंस दरों में विसंगतियां बनी हुई हैं। इसके अलावा, एसोसिएशन ने रनिंग रूम सुविधाओं, शंटिंग ड्यूटी और ट्रिप के लिए भत्ते जैसे अन्य लाभों के संशोधन की भी मांग की है।

दैनिक कार्य घंटों और साप्ताहिक आराम की मांग
दिन भर चले सम्मेलन में राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिट्टस और मानवाधिकार वकील कॉलिन गोंजाल्विस जैसे गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए। एसोसिएशन ने दैनिक कार्य घंटों और पर्याप्त साप्ताहिक आराम के मुद्दों को उठाया। के.सी. जेम्स ने कहा कि रेलवे मंत्रालय को 16 घंटे का मुख्यालय आराम, 30 घंटे का सामयिक आराम सुनिश्चित करना चाहिए। निरंतर रात की ड्यूटी को दो तक सीमित करना चाहिए, अधिकतम ड्यूटी घंटों को 8 घंटे प्रति दिन तक प्रतिबंधित करना चाहिए और आउटस्टेशन ड्यूटी को 36 घंटे तक सीमित करना चाहिए।


यूनियन बोली- स्वास्थ्य पर पड़ रहा प्रभाव
यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि रनिंग स्टाफ के कर्तव्यों की कठोर प्रकृति को 1947 की राजाध्यक्ष समिति और 2012 की उच्च शक्ति समिति द्वारा मान्यता दी गई थी। इसके बावजूद, लोको पायलटों को दैनिक 16 घंटे के आराम और साप्ताहिक आराम से वंचित रखा जा रहा है। 

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यूनियन ने कहा क वैधानिक अधिकारियों (श्रम आयुक्त) और माननीय उच्च न्यायालयों के निर्देशों के बावजूद ऐसा हो रहा है। लोको पायलटों को अक्सर 12 घंटे या उससे अधिक समय तक ड्यूटी पर रहना पड़ता है। उन्हें लगातार चार रात की ड्यूटी करने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि सुरक्षा सिफारिशें इसे दो तक सीमित करती हैं, और अन्य कर्मचारियों के विपरीत उन्हें तीन दिनों से अधिक समय तक आउटस्टेशनों पर रोका जाता है।

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