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Advani: BJP के दोनों संस्थापकों को सर्वोच्च सम्मान, वाजपेयी के नौ साल बाद मोदी सरकार में आडवाणी को भारत रत्न

Sat, 03 Feb 2024 02:23 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 03 Feb 2024 02:23 PM IST
सार

भाजपा संस्थापकों में शामिल लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न देने का एलान किया गया है। भाजपा के दोनों दिग्गज नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी को भी भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने का फैसला किया गया।  

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lk advani name announce for bharat ratna award bjp founder after atal bihari vajpayee in modi government
अटल बिहारी वाजपेयी के साथ लालकृष्ण आडवाणी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न देने का एलान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। गौरतलब है कि मोदी सरकार के ही कार्यकाल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को साल 2015 में भारत रत्न से नवाजा गया था। अब उसके करीब नौ साल बाद भाजपा संस्थापकों में शामिल लालकृष्ण आडवाणी को भी भारत रत्न देने का एलान किया गया है। भाजपा के दोनों दिग्गज नेताओं को भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने का फैसला किया गया।  
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सात दशकों तक भाजपा की राजनीति की धुरी रहे दोनों नेता
भाजपा आज देश की राजनीति के शिखर पर है और उसे यहां तक पहुंचाने में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की अहम भूमिका है। दोनों नेता करीब सात दशकों तक भाजपा की राजनीति की धुरी रहे और भाजपा के गठन से लेकर भाजपा को बड़ी राजनीतिक ताकत बनाने में इन दोनों नेताओं की केंद्रीय भूमिका है। लालकृष्ण आडवाणी ने भाजपा को संगठन के स्तर पर मजबूत बनाने और पार्टी से विभिन्न नेताओं को जोड़ने का काम किया। साथ ही उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के जरिए भाजपा को एक राजनीतिक ताकत के रूप में घर-घर में पहचान दिलायी। वहीं राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा की स्वीकार्यता को बढ़ाने में अटल बिहारी वाजपेयी के करिश्माई व्यक्तित्व की अहम भूमिका रही।   
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भाजपा के उभार में वाजपेयी-आडवाणी की जोड़ी का कमाल
लालकृष्ण आडवाणी जहां भाजपा  की हिंदुत्ववादी राजनीति का चेहरा रहे, वहीं अटल बिहारी वाजपेयी की पहचान पार्टी के उदार चेहरे के रूप में बनी। इन दोनों नेताओं की जोड़ी के दम पर ही भाजपा जहां विभिन्न पार्टियों के साथ गठबंधन कर देश को पहली गैर कांग्रेसी स्थायी सरकार देने में सफल रही, साथ ही अपने हिंदूवादी एजेंडे पर भी टिकी रही। यही वजह रही कि साल 1984 में जहां भाजपा के दो सांसद थे तो साल 1999 में पार्टी ने 182 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी।
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विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आया था आडवाणी का परिवार
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म पाकिस्तान के कराची में 8 नवंबर 1927 को एक हिंदू सिंधी परिवार में हुआ था। आडवाणी की शुरुआती शिक्षा कराची के सेंट पैट्रिक हाई स्कूल से हुई। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद आडवाणी का परिवार पाकिस्तान छोड़कर भारत के मुंबई में आकर बस गया। आडवाणी विभाजन से पहले से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे और भारत आने के बाद वे आरएसएस के प्रचारक बन गए। आरएसएस के साथ उन्होंने राजस्थान में काम किया। साल 1957 में आडवाणी जनसंघ के लिए काम करने के लिए दिल्ली आ गए। दिल्ली में आडवाणी अटल बिहारी वाजपेयी के घर में ही रहे थे। लालकृष्ण आडवाणी सबसे लंबे समय तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर रहे और करीब तीन दशकों तक बतौर सांसद उन्होंने काम किया। साल 1999-2004 की अटल सरकार में वह उप-प्रधानमंत्री भी रहे।
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