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मानसून सत्र: फिर लटका तीन तलाक बिल, हंगामे के कारण राज्यसभा में नहीं हो सका पेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 10 Aug 2018 04:35 PM IST
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विवादों में घिरे मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को आज चर्चा के लिये राज्यसभा में नहीं रखा जायेगा। सभापति एम वेंकैया नायडू ने आज सदन में इसकी घोषणा की। उच्च सदन में आज शुक्रवार होने की वजह से भोजनावकाश के बाद गैर सरकारी कामकाज शुरू हुआ। सभापति नायडू ने सदन को सूचित किया कि उनके कक्ष में विभिन्न दलों के नेताओं की बैठक हुई थी जिसमें यह तय हुआ था कि आज सदन में भोजनावकाश के बाद गैर सरकारी कामकाज होगा। शाम पांच बजे के बाद सदन में दो सरकारी विधेयकों को चर्चा के वास्ते लिया जाएगा।
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बता दें कि फिलहाल राज्यसभा में बहस चल रही है जबकि लोकसभा अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई है।
हालांकि, हंगामे की बीच व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि सदन दो स्तंभों ... नियम एवं परंपरा पर टिका हुआ है। उन्होंने कहा कि सदन की परंपरा रही है कि शुक्रवार को भोजनावकाश के बाद केवल गैर सरकारी कामकाज होता है। ऐसे में दो विधेयकों को लिया जाना कहां तक उचित है।
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नायडू ने उनकी आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि उनके कक्ष में विभिन्न दलों के नेताओं के बीच जो सहमति बनी थी उसी के आधार पर उन्होंने दो सरकारी विधेयकों पर चर्चा कराए जाने की घोषणा की है। इस पर डेरेक अपने दल के अन्य सदस्यों के साथ सदन से बाहर चले गए।
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उच्च सदन में इसके बाद सपा के विशंभर प्रसाद निषाद के गैर सरकारी संकल्प पर चर्चा शुरू हुई। विशंभर ने अपने संकल्प को जब चर्चा के लिए पेश किया तब नायडू ने कहा कि वह एक बार फिर स्पष्टीकरण देना चाहते हैं।
नायडू ने कहा कि आज गैर सरकारी कामकाज के बाद सदन में दो विधेयकों पर चर्चा होगी। उन्होंने यह भी कहा कि तीन तलाक संबंधी विधेयक पर आज सदन में चर्चा नहीं होगी।
उल्लेखनीय है कि आज उच्च सदन की कार्यावलि में विचार एवं पारित किए जाने वाले सरकारी विधेयकों में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक भी सूचीबद्ध था।
इस विधेयक को लोकसभा की मंजूरी मिल गई है। किंतु हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस विधेयक में तीन संशोधन करने को मंजूरी दी है। यदि उच्च सदन में इस विधेयक को सरकार के इन तीन संशोधनों के साथ पारित किया जाता है तो उसे फिर से लोकसभा की मंजूरी दिलवाने की आवश्यकता पड़ेगी।
मानसून सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने राफेल विमान सौदे में कथित अनियमितता को लेकर केंद्र सरकार से जवाब देने की मांग करते हुए संसद के बाहर और भीतर जमकर हंगामा किया।
संसद परिसर में पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। एक ओर लोकसभा में जहां राफेल मुद्दा गरमाया रहा वहीं दूसरी तरफ राज्यसभा में भी राफेल और तीन तलाक पर हंगामा जारी रहा। जिसे देखते हुए राज्य सभा की कार्यवाही पहले ढाई बजे तक स्थगित कर दी गई। उसके बाद मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को आज चर्चा के लिये नहीं रखा गया।
राफेल डील पर दोनों सदनों में हंगामा, विपक्षी दलों के प्रदर्शन से हुई शुरुआत
इससे पहले संसद परिसर में विपक्षी दलों के सदस्यों ने इस मामले में संयुक्त संसदीय समिति के गठन की भी मांग की। कांग्रेस के सांसदों ने लोकसभा में इस विषय को उठाते हुए पीठासीन के आसन के समीप आकर नारेबाजी की । इस मुद्दे पर शून्यकाल के दौरान कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वाकआउट भी किया। इससे पहले आज सुबह संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व संप्रग प्रमुख सोनिया गांधी ने किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, अंबिका सोनी राज बब्बर एवं कई अन्य सांसदों के अलावा भाकपा के डी राजा, आम आदमी पार्टी के सुशील गुप्ता शामिल हुए।
कांग्रेस के कई सदस्यों ने अपने हाथों में तख्तियां ले रखीं थीं और इस मामले की जांच के लिए जेपीसी के गठन की मांग करते हुए नारे लगा रहे थे। पार्टी के सदस्यों ने राफेल मामले पर जेपीसी के गठन को लेकर लोकसभा में भी नारेबाजी की। कांग्रेस और राहुल गांधी पिछले कुछ समय से राफेल विमान सौदे को लेकर सरकार पर लगातार निशाना साधते रहे हैं। इस मामले में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे रखा है। उनका आरोप है कि मोदी और सीतारमण ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राफेल के मुद्दे पर सदन को गुमराह किया।
उधर, राज्यसभा में तीन तलाक विरोधी विधेयक पेश होने के बारे में पूछे जाने पर सोनिया गांधी ने संसद भवन परिसर में कहा, 'इस मुद्दे पर हमारी पार्टी की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है। इस पर मैं आगे कुछ नहीं कहूंगी।'
राज्यसभा की कार्यवाही राफेल हंगामे की भेंट चढ़ी
सुबह, सदन की बैठक शुरू होते ही कांग्रेस सदस्यों ने राफेल मुद्दे पर हंगामा शुरू कर दिया। उपसभापति हरिवंश ने आज सुबह के सत्र का संचालन किया और उनके आसन में बैठने पर सदस्यों ने उनका स्वागत किया। उपसभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपील की कि वे सदन में शून्यकाल चलने दें।
विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने आरोप लगाया कि राफेल सौदा एक बड़ा घोटाला है और उन्होंने इसकी जेपीसी से जांच कराने की मांग की। जबकि कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि कहा कि उन्होंने नियम 267 के तहत एक नोटिस दिया है। इस पर उपसभापति ने कहा कि सभापति ने उनके नोटिस को स्वीकार नहीं किया है।
शून्यकाल में ही तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि शुक्रवार को भोजनावकाश के बाद गैर सरकारी कामकाज होता है और उस अवधि में विधायी कार्य नहीं हो सकते।
इस पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में यह सहमति बनी थी कि शुक्रवार को विधायी कार्य किए जाएंगे क्योंकि द्रमुक नेता करूणानिधि के सम्मान में सदन की बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी थी। हालांकि डेरेक और आनंद शर्मा ने कहा कि बीएसी में ऐसी कोई सहमति नहीं बनी थी।
गोयल ने आरोप लगाया कि विपक्ष नहीं चाहता कि तीन तलाक विधेयक को पारित किया जाए। बाद में सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि बीएसी बैठक में सुझाव दिया गया था कि शुक्रवार को विधेयकों पर चर्चा की जाएगी।
सदन में हंगामे के बीच ही शून्यकाल चला। एक बार सपा के दो सदस्य आसन के समक्ष भी आ गए। सदस्यों ने शोरगुल के बीच ही लोक महत्व के विषय के तहत अपने अपने मुद्दे उठाए। हंगामे को देखते हुए उपसभापति ने 11 बजकर करीब 55 मिनट पर बैठक दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
एक बार के स्थगन के बाद 12 बजे बैठक फिर शुरू होने पर भी सदन में वही नजारा दिखा और सभापति नायडू ने बैठक दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
संशोधित तीन तलाक बिल की ये हैं 4 खास बात
नए बिल में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामले को गैर जमानती अपराध तो माना गया है लेकिन संशोधन के हिसाब से अब मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार भी दिया गया है।
साथ ही विधेयक में एक और संशोधन किया गया है जिसमें पीड़ित के रिश्तेदार जिससे उसका खून का रिश्ता हो भी शिकायत दर्ज कर सकता है। तीन तलाक मामले पर पिछले सत्र में राज्यसभा में इस विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोक-झोंक देखने को मिली थी। जब विपक्ष की तरफ से विधेयक को त्रुटिपूर्ण बताते हुए प्रवर समिति में भेजने की मांग की गई थी।
संशोधित तीन तलाक बिल की ये हैं 4 खास बात
- पीड़िता, परिजन और खून के रिश्तेदार ही एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।
- एक बार में तीन तलाक बिल की पीड़ित महिला मुआवजे की अधिकार
- ट्रायल से पहले पीड़िता का पक्ष सुनकर मजिस्ट्रेट दे सकता है आरोपी को जमानत।
- मजिस्ट्रेट को पति-पत्नी के बीच समझौता कराकर शादी बरकरार रखने का अधिकार होगा।
संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हुआ था, इसी सत्र में भाजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया और अविश्वास प्रस्ताव के अलावा यह सत्र पूरी तरह से हंगामें की भेंट चढ़ चुका है।
साथ ही विधेयक में एक और संशोधन किया गया है जिसमें पीड़ित के रिश्तेदार जिससे उसका खून का रिश्ता हो भी शिकायत दर्ज कर सकता है। तीन तलाक मामले पर पिछले सत्र में राज्यसभा में इस विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोक-झोंक देखने को मिली थी। जब विपक्ष की तरफ से विधेयक को त्रुटिपूर्ण बताते हुए प्रवर समिति में भेजने की मांग की गई थी।
संशोधित तीन तलाक बिल की ये हैं 4 खास बात
- पीड़िता, परिजन और खून के रिश्तेदार ही एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।
- एक बार में तीन तलाक बिल की पीड़ित महिला मुआवजे की अधिकार
- ट्रायल से पहले पीड़िता का पक्ष सुनकर मजिस्ट्रेट दे सकता है आरोपी को जमानत।
- मजिस्ट्रेट को पति-पत्नी के बीच समझौता कराकर शादी बरकरार रखने का अधिकार होगा।
संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हुआ था, इसी सत्र में भाजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया और अविश्वास प्रस्ताव के अलावा यह सत्र पूरी तरह से हंगामें की भेंट चढ़ चुका है।