{"_id":"5726c6174f1c1bfa525cd67a","slug":"liquor-ban-and-lottery-become-big-issue-of-election-in-kerala","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनाव के नशे में डूबे केरल पर छाया शराबबंदी और लॉटरी का नशा","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
चुनाव के नशे में डूबे केरल पर छाया शराबबंदी और लॉटरी का नशा
सुदीप ठाकुर/अमर उजाला, एर्णाकुलम-कोच्चि
Updated Mon, 02 May 2016 09:17 AM IST
विज्ञापन
जारी है लॉटरी का खेल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ओमान चांडी की अगुआई वाली केरल सरकार होटलों के बार लाइसेंस रद्द करने के कारण विवादों में घिर गई थी, वही शराबबंदी का मुद्दा यहां कांग्रेस के लिए बड़ा सहारा बन गया है। केरल के प्रभावशाली सायरो मलाबार कैथोलिक चर्च ने पूर्णशराबबंदी का समर्थन किया है और उसी पार्टी को वोट देने की अपील की है, जो शराबबंदी का समर्थन करे। कांग्रेस इसे अपने पक्ष में देख रही है।
विज्ञापन
यह खूबसूरत तटीय जिला वैसे भी कांग्रेस के प्रभाव वाला रहा है और पिछले विधानसभा चुनाव में यहां यूडीएफ को 14 में से 11 सीटें मिली थीं। लेकिन चांडी सरकार की नई शराब नीति के बाद सामने आए बार लाइसेंस घोटाले के बाद प्रदेश के जिन दो प्रभावशाली मंत्रियों आबकारी मंत्री के बाबू और वित्त मंत्री के एम मणि को इस्तीफा देना पड़ा था, उनमें से एक बाबू एर्णाकुलम जिले से ही हैं।
विज्ञापन
यह अलग बात है की अदालती लड़ाई के चलते बाबू की दोबारा आबकारी मंत्री के रूप में वापसी भी हो गई। 1991 से कोच्चि के थिरप्पुनीथुरा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं और छठी बार मैदान में है। 1991 में बाबू के हाथ यह सीट गंवा चुका एलडीएफ बार लाइसेंस घोटाले को बड़ा मुद्दा बना रहा है। एर्णाकुलम निवासी माकपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य पी राजीव याद दिलाते हैं कि बाबू पर एक शीर्ष होटल व्यवसायी ने 10 करोड़ रुपये रिश्वत में देने का दावा किया था, उसी के बाद उन्हें मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि यूडीएफ सरकार ने अपनी नई शराब नीति में सिर्फ पांच सितारा होटलों और सरकारी दुकानों पर ही शराब बेचने की छूट दी थी, हालांकि इससे ताड़ी को अलग रखा गया था। दरअसल केरल में शराब एक बड़ा मुद्दा बन गया है। श्री कोचिन गुजराती महाजन समिति के सचिव चेतन भाई शाह अमर उजाला से बात करते हुए चुटकी लेते हैं कि केरल में पंजाब से भी अधिक शराब की खपत है!
केरल का यह खूबसूरत तटीय जिला देश में सर्वाधिक ईसाई आबादी के लिए भी जाना जाता है। एर्णाकुलम से कोच्चि तक फैले इस जिले में सैकड़ों चर्च नजर आते हैं और स्वाभाविक रूप से उनका राजनीतिक प्रभाव भी। पिछली जनगणना के मुताबिक इस जिले में तकरीबन 46 फीसदी हिंदू, 40 फीसदी ईसाई और 15 फीसदी मुस्लिम थे। इसके अलावा गुजराती-मारवाड़ी समाज का भी थोड़ा हिस्सा है, जोकि सिर्फ सामाजिक-व्यापारिक गतिविधियों तक ही सीमित है, और राजनीति में उसकी कोई सीधी दिलचस्पी नहीं है।
मगर लाटरी जारी है
केरल की यूडीएफ सरकार शराबनीति के जरिये शराबबंदी की बात भले कर रही हो, लेकिन दूसरी ओर उसे लाटरियां बेचने से गुरेज नहीं। कोचिन हवाई अड्डे से एर्णाकुलम के रास्ते में पड़ने वाले चौराहों पर आपको खुदरा लाटरियां बेचते बुजुर्ग तक दिख जाएंगे। हैरानी की बात यह है कि लेफ्ट फ्रंट के नेता तक लाटरियों के खिलाफ कुछ नहीं बोलते। एक नेता का तर्क था, इससे रिटायर्ड लोगों को भी काम मिल गया है जिससे वे थोड़ा बहुत कमा लेते हैं। कभी मध्य प्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में हजारों घरों को बर्बाद करने वाली लाटरी केरल में उसी ढर्रे पर चलती दिख रही है। दस रुपये से लेकर सौ रुपये तक की इन लाटरियों में आखिरी अंक पर सौ रुपये से लेकर चार करोड़ रुपये तक के इनाम हैं!
और अखबार भी बंद
लंबे समय से हर पांच वर्ष की अवधि में यूडीएफ और एलडीएफ का शासन रहने की वजह से यहां ट्रेड यूनियनों का अच्छा खासा असर है। रविवार को मई दिवस यानी लेबर डे को यहां ऐसा लगा मानो पूरा शहर ही बंद है। असल में रविवार और उसी दिन लेबर डे होने की वजह से यहां सड़कों में सन्नाटे जैसी स्थिति थी। यहां तक कि कुछ छोटे अखबारों को छोड़ दिया जाए तो मातृभूमि, मलयाली मनोरमा और टाइम्स इंडिया जैसे अखबारों तक में छुटिटयां थीं। यानी सोमवार को इनके अंक नहीं आएंगे।