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SC की चुनाव आयोग को फटकार- दोषियों के चुनाव लड़ने के विरोध में हो या नहीं?
amarujala.com-presented by: मोहित
Updated Wed, 12 Jul 2017 02:42 PM IST
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- फोटो : Election Commission
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चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह आपराधिक मामलों में दोषी नेताओं के चुनाव लड़ने पर आजीवन पाबंदी के पक्ष में नहीं है। इसके साथ ही आयोग ने कहा कि वह राजनेताओं के अापराधिक मामलों पर लगाम लगाने के लिए अन्य विक्लपों पर भी विचार कर रहा है।
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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए कहा कि आप इस मामले में साफ-साफ अपना पक्ष क्यों नहीं रखते। कोर्ट ने पूछा की आप दोषियों के चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं या विरोध में? जिसके जवाब में आयोग ने कहा कि वह दोषियो के आजीवन पाबंदी के पक्ष में नहीं है। मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत दोषियों पर लगाम लगाई जा जा रही है।Lifetime ban on convicted and chargesheeted MPs and MLAs case: EC tells SC it did not want a permanent ban on convicted MPs and MLAs
— ANI (@ANI_news) July 12, 2017विज्ञापन
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मौजूदा प्रावधान के मुताबिक, अगर नेता को दोषी ठहराया जाता है और उसे दो या उससे अधिक वर्ष की सजा होती है तो उस पर सजा पूरी करने के छह वर्ष बाद तक चुनाव लडऩे पर पाबंदी है।
इससे पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि वह निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग ने कहा था कि वह इसका समर्थन करती है कि आपराधिक मामलों में दो या उससे अधिक वर्ष की सजा पाने वालों पर चुनाव लड़ने की आजीवन पाबंदी होनी चाहिए। उनका कहना था कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए इस तरह की पाबंदी होनी चाहिए। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना यह पक्ष रखा था।
विधि आयोग और जस्टिस वेंकटचलैया आयोग के सुझावों को तत्काल लागू किया जाए
मालूम हो कि अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में गुहार लगाई है कि आपराधिक मामलों में दो वर्ष या इससे अधिक की सजा पाने वालों पर आजीवन चुनाव लड़ने की पाबंदी लगा दी जानी चाहिए। साथ ही राजनेताओं के मामले का ट्रायल एक वर्ष के भीतर पूरा हो जाना चाहिए। साथ ही याचिका में यह भी गुहार की गई है कि चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम उम्र निर्धारित हो और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय हो।
चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम उम्र और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय करने के मसले पर आज आयोग ने कहा कि विधि आयोग और जस्टिस वेंकटचलैया आयोग के सुझावों को तत्काल लागू किया जाए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका में ऐसी व्यवस्था है कि अगर कोई व्यक्ति आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाता है तो वह नौकरी से बर्खास्त हो जाता है वहीं विधायिका पर यह मापदंड लागू नहीं होता। याचिका में विधायिका में भी यही मापदंड तय करने की गुहार की गई है।
याचिका में कहा गया कि मौजूदा स्थिति है कि दोषी ठहराए जाने और सजा काटने के दौरान भी दोषी राजनीतिक दल बना सकता है और वह दल का पदाधिकारी बन सकता है। इतना ही सजा काटने के छह वर्ष बाद भी दोषी फिर से चुनाव लड़ सकता है।
चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम उम्र और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय करने के मसले पर आज आयोग ने कहा कि विधि आयोग और जस्टिस वेंकटचलैया आयोग के सुझावों को तत्काल लागू किया जाए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका में ऐसी व्यवस्था है कि अगर कोई व्यक्ति आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाता है तो वह नौकरी से बर्खास्त हो जाता है वहीं विधायिका पर यह मापदंड लागू नहीं होता। याचिका में विधायिका में भी यही मापदंड तय करने की गुहार की गई है।
याचिका में कहा गया कि मौजूदा स्थिति है कि दोषी ठहराए जाने और सजा काटने के दौरान भी दोषी राजनीतिक दल बना सकता है और वह दल का पदाधिकारी बन सकता है। इतना ही सजा काटने के छह वर्ष बाद भी दोषी फिर से चुनाव लड़ सकता है।