अब उड़ान के दौरान भी कर सकेंगे फोन पर बात, तीन कंपनियों को मिला लाइसेंस
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हवाई जहाज में उड़ते वक्त मोबाइल पर इंटरनेट का प्रयोग और बातें करना इसी माह संभव होगा। दूरसंचार विभाग ने इन फ्लाइट कनेक्टिविटी देने के लिए 3 कंपनियों को लाइसेंस जारी कर दिया है। अब इन कंपनियों को घरेलू विमान कंपनियों के साथ करार करके सेवाओं की शुरुआत करनी है, जिसे इस माह अंजाम दिया जा सकता है। दूरसंचार विभाग ने ह्यूजस कम्यूनिकेशन, टाटा टेलीनेट और बीएसएनएल को इन फ्लाइट कनेक्टेविटी में सेवाएं मुहैया कराने के लिए लाइसेंस दिया है। यह लाइसेंस दस साल के लिए इन कंपनियों को मुहैया कराया गया है जो अब विमान कंपनियों के साथ करार करके आगे कदम बढ़ाएंगे।
कपंनियों को अंतरिक्ष विभाग से भी करार करना होगा। दोनों ही करार के बाद सेवाओं की शुरुआत यह कंपनियां कर सकेंगी। मौजूदा समय स्पाइसजेट, इंडिगो ने यात्रा के दौरान डेटा और कॉल की सेवाएं मुहैया कराने में रुचि दिखाई है। इनके एयरक्राफ्ट में इन फ्लाइट कनेक्टिविटी सेवाएं मुहैया कराने की पूरी व्यवस्था और क्षमता है। आने वाले दिनों में ग्राहकों को टिकट के साथ कनेक्टिविटी का पैकेज मिलेगा या यात्रा के दौरान भी वह सेवाएं ले सकेंगे। शुरुआत में 500 से 700 रुपये का यह पैकेज होगा जो 2 घंटे तक चलेगा।
दूरसंचार विभाग द्वारा हवाई यात्रा में यह सेवाएं देने से जुड़े दिशा-निर्देशों को हाल ही में कानून मंत्रालय ने मंजूरी दी थी। विभाग के मुताबिक स्पाइसजेट ने इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी सेवा देने की तैयारी कर ली है। स्पाइसजेट के 737 मैक्स विमान में यात्रा करने वालों को यह सेवाएं जल्द मिलेंगी। जबकि एयर इंडिया समेत अन्य विमानन कंपनियां भी यह सेवा देने के लिए हवाई जहाज में ढांचागत व्यवस्थाएं कर रहे हैं। विभाग का कहना है कि एयरलाइंस कंपनियों को आय का नया जरिया मिलेगा।
जेट ब्लू, कतर एयरबेस, टर्की एयरलाइंस हवा में इंटरनेट की सुविधा देते हैं। इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी सेवा की शुरुआत में ग्राहक सिर्फ इंटरनेट सर्फिंग कर सकेंगे। बातचीत की सेवाएं मुहैया कराने में अभी कुछ वक्त लगेगा। दूरसंचार आयोग ने भी देश की व्यवस्था का उपयोग सुरक्षा के मद्देनजर करने को कहा था। साथ ही समुद्र और जमीन से निर्धारित ऊंचाई 3000 मीटर से ऊपर विमान पहुंचने पर ही यह सेवा मिलेगी।
करीब 30 विदेशी विमानन कंपनियां भारतीय हवाई सीमा से इतर कई देशों में इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी मुहैया कराती हैं। इनमें एयर एशिया, एयर फ्रांस, ब्रिटिश एयरवेज समेत अन्य विमानन कंपनियां हैं। मौजूदा समय भारतीय हवाई क्षेत्र के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश और क्रियान्वयन नियम नहीं होने की वजह से यह सेवाएं बंद हो जाती हैं। गौरतलब है कि दूरसंचार नियामक द्वारा सिफारिश किए जाने के बाद सरकार यह सेवाएं ग्राहकों को देने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की ओर बढ़ी। इससे पहले दूरसंचार आयोग द्वारा ट्राई की सिफारिशों को मंजूरी प्रदान की गई थी।