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इंजीनियरिंग में बढ़ रही बेरोजगारी, अब छात्र साइंस में ग्रेजुएशन कर पढ़ा रहे स्कूलों में

Tue, 20 Mar 2018 12:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 20 Mar 2018 12:08 PM IST
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less jobs in engineering, students start teaching in schools after completing graduation in science

इंजीनियरिंग में बढ़ती बेरोजगारी के चलते अब छात्र साइंस में ग्रेजुएशन कर स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इंजीनियरिंग अब अपनी चमक खोती जा रही है। लेकिन साइंस कोर्स देश में दूसरे सबसे पॉपुलर अंडर ग्रेजुएट कोर्स के रूप में फिर से उभरा है। जबकि आर्टस पहले की तरह ही पीछे है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में 97.3 लाख छात्रों ने बीए में दाखिला लिया, जबकि बीएससी में दाखिला लेने वालों की संख्या 47.3 लाख और इंजीनियरिंग में दाखिला लेने वालों की संख्या 41.6 लाख थी।

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थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलोजी के डॉयरेक्टर प्रकाश गोपालन का कहना है कि बीएससी कोर्स के साथ ही कंप्यूटर, फार्मा और इलैक्ट्रोनिक्स जैसी शाखाओं में बढ़ती विविधता से अब साइंस ही एक अकेला विकल्प नहीं रह गया है। इंजीनियरिंग डिग्री की मूल्यता भी तभी रहती है जब वह किसी प्रतिष्ठित संस्थान से प्राप्त की जाए। गोपालन ने आगे कहा कि उन्होंने देखा है कि इंजीनियर भी उसी नौकरी के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे होते हैं जिसके लिए बीए और बीकॉम वाले छात्र करते हैं।     
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गोपालन का कहना है कि प्रोग्राम भी उसी तरह से बंद हो रहे हैं जिस तरह से कालेज। इन्हें देखें तो इनसे इंजीनियरिंग एजुकेशन परिदृश्य का पता चलता है। पिछले कुछ समय से छात्रों की पसंद में भी नाटकीय रूप से बदलाव आया है। अभी से करीब पांच साल पहले साइंस दूसरे स्थान पर था जबकि आर्टस पहले और कॉमर्स तीसरे स्थान पर। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के 2013 के आंकड़ों के अनुसार बीए कोर्स में 75.1 लाख छात्र, कॉमर्स में 28.9 लाख छात्र, बीटेक में 17.9 लाख, बीई में 16.4 लाख और बीएससी में 25.4 लाख छात्रों ने दाखिला लिया था।
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इसके बाद अचानक से कॉमर्स ने अपनी चमक खो दी और तीसरे नंबर पर आ गया। साल 2014-15 में इंजीनियरिंग दूसरा सबसे लोकप्रिय कोर्स था जिसका कारण आईटी सेक्टर की लगातार बड़े पैमाने पर भर्तियां करना रहा। इंजीनियरिंग की लोकप्रियता और उद्भव को देखते हुए पता चलता है कि यह स्ट्रीम आने वाले समय में एक व्यापक कोर्स बनेगा। बिल्कुल वैसे ही जैसे बीए, बीकॉम और बीएससी हैं। उन्होंने आगे कहा कि एक विशेषज्ञ के तौर पर वह कह सकते हैं कि जो लोग आगे चलकर किसी प्रकार का बिजनेस या एमबीए करना चाहते हैं, उन्होंने भी इंजीनियरिंग के लिए एंट्रेंस एग्जाम देना शुरू कर दिया है। 

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