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leopards: नौ साल में 81 फीसदी बढ़ी तेंदुओं की संख्या, एक सींग वाले गैंडें हुए तीन हजार
Fri, 23 Jun 2023 05:25 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Fri, 23 Jun 2023 05:25 AM IST
सार
एक सींग वाले गैंडों की संख्या भी 2,600 से बढ़कर 3,000 हो गई है। बाघों की संख्या में 40% का इजाफा हुआ है। इनकी आबादी 2,226 से 3,167 हो गई है। गुजरात के गिर में संरक्षित बब्बर शेर की आबादी 523 से बढ़कर 674 हो गई।
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तेंदुओं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश में पिछले नौ साल में तेंदुओं की संख्या में 81 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया, इनकी संख्या 7,090 से बढ़कर 12,852 हो गई। इसके अलावा, एक सींग वाले गैंडों की संख्या भी 2,600 से बढ़कर 3,000 हो गई है। बाघों की संख्या में 40% का इजाफा हुआ है। इनकी आबादी 2,226 से 3,167 हो गई है। गुजरात के गिर में संरक्षित बब्बर शेर की आबादी 523 से बढ़कर 674 हो गई।
चीतों को कूनो से बाहर स्थानांतरित करने की कोई योजना नहीं
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने बृहस्पतिवार को कहा कि मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के रहने के लिए पर्याप्त जगह है। उन्हें कहीं और स्थानांतरित करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। हालांकि, भविष्य में कोई समस्या होने पर उन्हें मध्य प्रदेश में गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में भेजा जा सकता है। वे मीडिया को सरकार के नौ सालों में अपने मंत्रालय की उपलब्धियां गिना रहे थे।
उन्होंने कहा, चीते मौसम और आवास के अनुरूप ढल रहे हैं। हमें उन्हें ऐसा करने के लिए समय देना चाहिए। पिछले तीन महीनों में कूनो में तीन वयस्क चीतों और तीन शावकों की मौत हो चुकी है। इसके बाद कुनो में आवास, शिकार की लिए स्थान और वन्यजीव प्रबंधन की क्षमता पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि कूनो में चीतों के फलने-फूलने के लिए अभयारण्यों में स्थानांतरित करने के सुझाव दिए गए थे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 17 सितंबर को नामीबिया से आए आठ चीतों के पहले जत्थे को कुनो में छोड़ा था। इसके बाद 18 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 और चीतों को कूनो में छोड़ा गया था।
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चीतों को कूनो से बाहर स्थानांतरित करने की कोई योजना नहीं
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने बृहस्पतिवार को कहा कि मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के रहने के लिए पर्याप्त जगह है। उन्हें कहीं और स्थानांतरित करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। हालांकि, भविष्य में कोई समस्या होने पर उन्हें मध्य प्रदेश में गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में भेजा जा सकता है। वे मीडिया को सरकार के नौ सालों में अपने मंत्रालय की उपलब्धियां गिना रहे थे।
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उन्होंने कहा, चीते मौसम और आवास के अनुरूप ढल रहे हैं। हमें उन्हें ऐसा करने के लिए समय देना चाहिए। पिछले तीन महीनों में कूनो में तीन वयस्क चीतों और तीन शावकों की मौत हो चुकी है। इसके बाद कुनो में आवास, शिकार की लिए स्थान और वन्यजीव प्रबंधन की क्षमता पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि कूनो में चीतों के फलने-फूलने के लिए अभयारण्यों में स्थानांतरित करने के सुझाव दिए गए थे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 17 सितंबर को नामीबिया से आए आठ चीतों के पहले जत्थे को कुनो में छोड़ा था। इसके बाद 18 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 और चीतों को कूनो में छोड़ा गया था।