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दावा: वकील प्रशांत भूषण का आरोप, जजों को ब्लैकमेल करने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है सरकार

Wed, 21 Dec 2022 08:58 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद Published by: गुलाम अहमद Updated Wed, 21 Dec 2022 08:58 AM IST
सार

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि जब सरकार को लगता है कि कोई न्यायाधीश उसके हिसाब से काम नहीं करेगा, तो वह ऐसे न्यायाधीश को शीर्ष स्थान पर नियुक्त करने की अनुमति नहीं देती है। 

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Lawyer Prashant Bhushan Says Govt employing probe agencies to blackmail judiciary
Prashant Bhushan - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने मंगलवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार न्यायाधीशों की कमजोरियों का पता लगाने और उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में समाजवादी नेता बापूसाहेब कालदाते की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देश में संविधान के तहत स्वायत्तता प्राप्त संस्थानों पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।

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प्रशांत भूषण ने कहा कि जब सरकार को लगता है कि कोई न्यायाधीश उसके हिसाब से काम नहीं करेगा, तो वह ऐसे न्यायाधीश को शीर्ष स्थान पर नियुक्त करने की अनुमति नहीं देती है। उन्होंने कहा कि इससे पहले न्यायाधीशों को, आयोगों या अन्य निकायों में सेवानिवृत्ति के बाद नियुक्ति का लालच देकर उनके फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी। लेकिन मौजूदा सरकार ने नया तरीका अपनाया है।
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उन्होंने कहा कि अब सभी न्यायाधीशों की फाइल तैयार की जाती है। आईबी, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय जैसी जांच एजेंसियों से न्यायाधीशों या उनके रिश्तेदारों की कमजोरियों का पता लगाने के लिए कहा जाता है। उन्होंने दावा किया कि अगर ऐसी कोई कमजोरी सामने आती है तो उसका इस्तेमाल उस जज को ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता है।
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संस्थानों पर कब्जे की कोशिश का विरोध करने का आह्वान
उन्होंने कहा कि देश में संस्थानों पर कब्जा करने की कोशिश का विरोध करने के लिए लोगों को एक साथ आना चाहिए। भूषण ने दावा किया कि जब हमने अपने संविधान को अपनाया, तो कई संस्थान बनाए गए और उन्हें स्वायत्त दर्जा प्राप्त है। लेकिन अब उन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।


अब चुनावों की तारीखें तय कर रही सरकार
उन्होंने कहा कि पहले जब विधेयकों का मसौदा तैयार किया जाता था तो उन्हें संसदीय समितियों के पास भेजा जाता था और उन पर चर्चा की जाती थी, लेकिन अब उन्हें बिना चर्चा के पारित कर दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पहले काफी स्वायत्त था, लेकिन अब सरकार चुनावों की तारीखें तय कर रही है।

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