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नफरत फैलाने वाले बयान पर दंडात्मक कानून चाहता है विधि आयोग

Fri, 24 Mar 2017 09:01 PM IST
amarujala.com, Presented By- मुकेश झा
amarujala.com, Presented By- मुकेश झा Updated Fri, 24 Mar 2017 09:01 PM IST
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Law Commission wants penal law on hate speech
डेमो पिक

हिंसा के लिए उकसाना ही घृणा फैलाने वाले बयान को तय करने का एक मात्र मापदंड नहीं हो सकता। यह बात विधि आयोग ने कही है और अनुशंसा की है कि भय और घृणा उत्पन्न करने के प्रयास को भी इसके दायरे में लाया जाना चाहिए। विधि आयोग ने कहा कि अगर किसी बयान से हिंसा नहीं भड़कती है, लेकिन इसमें समाज के एक तबके को हाशिए पर भेजने की संभावना रहती है तो उसे नफरत फैलाने वाला माना जाना चाहिए। इसके साथ ही आयोग ने घृणास्पद बयान रोकने के लिए कानूनी प्रावधान में विस्तार करने की मांग की।

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कानून मंत्रालय को सौंपे गए ‘नफरत फैलाने वाले बयान’ रिपोर्ट में विधि आयोग ने कहा कि भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों में संशोधन करने की जरूरत है ताकि ‘नफरत फैलाने पर रोक’ और ‘कुछ मामलों में भय, बेचैनी या हिंसा के लिए उकसाने’ के प्रावधानों को जोड़ा जा सके। 

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उकसाना ही एकमात्र मापदंड नहीं

Law Commission wants penal law on hate speech

रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंसा के लिए उकसाने को ही नफरत फैलाने वाले बयान के लिए एकमात्र मापदंड नहीं माना जा सकता। ऐसे बयान जो हिंसा नहीं फैलाते हैं उनमें भी समाज के एक हिस्से या किसी व्यक्ति को हाशिए पर धकेलने की संभावना होती है।

इसमें कहा गया है, ‘इन बयानों से कई बार हिंसा नहीं भड़कती बल्कि उनसे समाज में मौजूदा भेदभावकारी रुख को बढ़ावा मिल सकता है। इस प्रकार भेदभाव के लिए उकसाना भी एक महत्वपूर्ण कारक है जो घृणा फैलाने वाले बयान की पहचान में योगदान करता है।’

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