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Politics: चिदंबरम बोले- अंशकालिक सदस्यों की समिति को नहीं, विधि आयोग को सौंपे जाने चाहिए थे विधेयकों का मसौदे
Sun, 07 Jul 2024 07:51 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 07 Jul 2024 07:51 PM IST
सार
Politics: कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा, मेरा मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों को मसौदा विधि आयोग को सौंपा जाना चाहिए थआ, न कि एक समिति को, जिसके सदस्यों ने अंशकालिक के रूप में सेवा दी।
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पी. चिदंबरम
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
नए आपराधिक कानूनों पर अंशकालिक (पार्ट-टाइमर) वाली टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने रविवार को कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों का मसौदा विधि आयोग को सौंपा जाना चाहिए था, न कि उस समिति को जिसके सदस्यों ने अंशकालिक सेवा दी। चिदंबरम की ओर से यह प्रतिक्रिया तब आई है, जब एक दिन पहले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ उनके बयान के लिए उन पर निशाना साधा।
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चिदंबरम ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने आपराधिक कानूनों में सुधार के लिए मई 2020 में एक समिति का गठन किया था, जिसमें अध्यक्ष, संयोजक और सदस्य थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसका स्वरूप समय-समय पर बदला गया, लेकिन आखिर में समिति के एक संयोजक और पांच सदस्य थे। चिदंबरम ने कहा कि एक को छोड़कर सभी सदस्य विभिन्न विश्वविद्यालयों में सेवारत प्रोफेसर थे और समिति के अंशकालिक सदस्य थे। उन्होंने कहा कि इसी समिति ने तीन नए आपराधिक कानूनों के मसौदे सौंपे। आखिरकार, संसद ने इन कानूनों को पारित कर दिया।
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कांग्रेस नेता ने कहा, मेरा मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों को मसौदा विधि आयोग को सौंपा जाना चाहिए थआ, न कि एक समिति को, जिसके सदस्यों ने अंशकालिक के रूप में सेवा दी और जिनके पास अन्य जिम्मेदारियां थीं।
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उपराष्ट्रपति धनखड़ ने क्या कहा था
उपराष्ट्रपति ने उनकी टिप्पणी को अक्षम्य करार दिया था। उन्होंने कांग्रेस नेता से अपनी कथित 'अपमानजनक और आपत्तिजनक' टिप्पणी वापस लेने का आग्रह किया था। धनखड़ ने कहा था कि जब उन्होंने एक प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक में चिदंबरम का साक्षात्कार पढ़ा तो उन्हें हैरानी हुई, क्योंकि उसमें उन्होंने कहा था कि नए कानूनों का मसौदा अंशकालिक लोगों द्वारा तैयार किया गया था। तिरुवनंतपुरम में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने चिदंबरम की टिप्पणी का जिक्र करते हुए पूछा था, क्या हम संसद में अंशकालिक हैं? यह संसद की बुद्धिमत्ता का अक्षम्य अपमान है। मेरे पास इस कहानी (नैरेटिव) की निंदा करने के लिए शब्द नहीं हैं। एक सांसद को अंशकालिक के रूप में लेबल किया जा रहा है।
धनखड़ ने कहा था, मैं उनसे (चिदंबरम) इस मंच से अपील करता हूं कि कृपया सांसदों के बारे में अपमानजनक और बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी वापस लें। मुझे उम्मीद है कि वे ऐसा करेंगे।