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देश को फिलहाल समान नागरिक संहिता की जरूरत नहीं: विधि आयोग

Sat, 01 Sep 2018 04:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Sat, 01 Sep 2018 04:47 AM IST
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Law commission says country does not need the uniform civil code for right now

विधि आयोग का कहना है कि फिलहाल भारत में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की जरूरत नहीं है। आयोग ने इसके बजाय हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और पारसी पर्सनल लॉ में संशोधन कर लैंगिक असमानता खत्म करने की सिफारिश की है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव, 2014 के दौरान अपने घोषणापत्र में यूसीसी लाने का वादा किया था। जुलाई, 2016 में कानून मंत्रालय ने विधि आयोग को यूसीसी की व्यावहारिकता और गुंजाइश पर अध्ययन करने को कहा था।

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न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता वाले विधि आयोग की ओर से कानून मंत्रालय को दिए परामर्श पत्र में कहा गया है कि यूसीसी की अभी जरूरत नहीं है। संविधान सभा में हुई बहस से पता चला कि यूसीसी को लेकर सभा में भी सर्वसम्मति नहीं थी। कई का मानना था कि यूसीसी और पर्सनल लॉ सिस्टम साथ-साथ रहना चाहिए, जबकि कुछ का मानना था कि यूसीसी को पर्सनल लॉ की जगह लाया जाना चाहिए। कुछ का यह भी मानना था कि यूसीसी का मतलब धर्म की आजादी को खत्म करना है। 
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने यह कहते हुए यूसीसी पर बहस से ही इनकार कर दिया था कि यह उनके पर्सनल लॉ पर प्रहार है। सुप्रीम कोर्ट में मामले लंबित होने का हवाला देते हुए विधि आयोग ने बहु-विवाह, निकाह-हलाल जैसे मामलों पर भी विचार करने से इनकार कर दिया था। 
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शादी के बाद खरीदी संपत्ति में तलाक के बाद महिला का मिले बराबर का हक

विधि आयोग ने कहा है कि शादी के बाद खरीदी गई संपत्ति में तलाक के बाद महिलाओं को भी बराबर का अधिकार मिलना चाहिए। इसी के आधार पर सभी पर्सनल और सेकुलर लॉ में संशोधन किया जाना चाहिए। आयोग के मुताबिक, इस सिद्धांत का यह मतलब नहीं है कि पति की संपत्ति में हर चीज का आधा-आधा हिस्सा किया जाए। शादी के बाद दोनों में किसी के द्वारा खरीदी गई संपत्ति को दोनों के बीच एक इकाई के तौर पर माना जाएगा। आयोग ने कहा कि कई बार कामकाजी महिलाएं परिवार की देखभाल के लिए नौकरी छोड़ देती हैं। लिहाजा, यह नहीं देखा जाएगा कि पत्नी काम करती है या नहीं। 

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