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क्वाड लॉन्चर ने ब्रह्मोस मिसाइल को बनाया और घातक

Sun, 06 May 2018 10:25 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 06 May 2018 10:25 AM IST
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Larsen and Toubro make Quad Launcher of Defence more dangerous than before
ब्रह्मोस मिसाइल

ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल की घातकता और बढ़ने वाली है। इस मिसाइल प्रणाली को आने वाले समय में नौसेना के युद्धपोतों पर क्वाड लॉन्चर (क्वाड्रपल कैनिस्टराइज्ड इनक्लाइंड लॉन्चर) पर तैनात किया जा सकेगा। क्वाड लॉन्चर को लार्सन एंड टुब्रो ने विकसित किया है और परीक्षण में खरा उतरने के बाद अब जरूरत के हिसाब से तैयार किए जाने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। ब्रह्मोस एरोस्पेस के प्रबंध निदेशक और महानिदेशक डीआरडीओ (ब्रह्मोस) डॉ. सुधीर मिश्रा ने क्वाड लॉन्चर को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के लिए काफी अहम बताया है।

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डॉ. सुधीर मिश्रा देश के उन्नत रक्षा वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। उन्होंने लार्सन एंड टुब्रो द्वारा विकसित क्वाड लॉन्चर को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के पड़ाव में एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया है। दरअसल यह मिसाइल लॉन्चर प्रणाली एक साथ चार ब्रह्मोस मिसाइल को इच्छानुसार झुकाव के साथ प्रक्षेपित कर सकता है। इसके जरिए चारों मिसाइल एक ही दिशा में या अलग-अलग दिशाओं में लांच करके दुश्मन के ठिकाने को तबाह किया जा सकता है। अभी तक ब्रह्मोस मिसाइल को भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर ट्विन कैनिस्टराइज्ड इंक्लाइंड लॉन्चर के जरिए लांच किए जाने पर निर्भर थी।
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लार्सन एंड टुब्रो डिफेंस के जयंत पाटिल का कहना है कि परीक्षणों में खरा उतरने के बाद इस लॉन्चर को अगले 18 महीने के भीतर नौसेना को दिया जा सकेगा।  इस तरह से जहां ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली को लांच करके दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता बढ़ी है, वहीं अब एक साथ चार ब्रह्मोस को एक साथ  एक से अधिक दिशा में दागा जा सकता है। डा. सुधीर मिश्रा इसे देश के मेक इंडिया कार्यक्रम के तहत मील का पत्थर मानते हैं। ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल प्रणाली भारत और रूस के सहयोग से विकसित हुई है, लेकिन ब्रह्मोस प्रणाली को तैयार करने में देश के रक्षा उद्योग से जुड़ी 200 से अधिक कंपनियां शामिल हैं। लार्सन एंड टुब्रो भी सन् 2000 में ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम परियोजना की शुरुआत से ही इसमें शामिल रहा है।
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सामरिक मिसाइल

ध्वनि से भी तेज गति से मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल देश की महत्वपूर्ण सामरिक अग्नेया है। ब्रह्मोस नौसेना और भारतीय सेना में शामिल हो चुकी है। इस मिसाइल को सुखोई-30 एमके प्रणाली से लांच किए जाने वाला संस्करण भी विकसित किया जा चुका है। इसके परीक्षण का दौर चल रहा है। इस मिलाइल प्रणाली से पलक झपकते ही 300 किमी दूर तक के दुश्मन के ठिकाने को ध्वस्त किया जा सकता है। यह मिसाइल प्रणाली परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम है और भारत, चीन जैसे देश के सामरिक संतुलन को बिगाड़ने की क्षमता रखती है।

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