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Umling La: उमलिंग-ला तक सड़क बनने से लद्दाखी हैं बेहद खुश, चुमार सेक्टर के कई इलाकों तक पहुंच हुई आसान

Tue, 12 Jul 2022 04:35 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 12 Jul 2022 04:35 PM IST
सार

लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल से जुड़े अधिकारी सोनम नोरबू कहते हैं कि सीमा सड़क संगठन ने पूर्वी लद्दाख के उमलिंग-ला पर 19,300 फीट से अधिक ऊंचाई पर वाहनों के लिए चलने लायक सड़क को तैयार किया है। यह सड़क हमारे देश को दुश्मन देशों से तो सुरक्षित करती ही है, साथ ही लद्दाख के लोगों के बेहतर जीवन यापन के लिए भी यह सड़क एक वरदान साबित हो रही है...

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ladakh: Umling La beats the khardung-la, now become the highest motorable road in world
uming-la - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पूरी दुनिया में सबसे ऊंची मोटरेबल रोड का दर्जा लद्दाख के खारदुंग-ला पर बनी सड़क से छिन गया गया है। खारदुंग-ला पर बनी दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल रोड 18,380 फीट पर तैयार की गई थी। लेकिन अब पूरी दुनिया में इससे भी ऊंचे 19,300 फीट के उमलिंग-ला पर सीमा सड़क संगठन ने मोटरेबल रोड को बनाकर शुरू कर दिया है। हालांकि यह सड़क पिछले साल अगस्त में शुरू की गई थी, लेकिन कोविड प्रतिबंधों और फिर ज्यादा बर्फबारी के चलते पर्यटकों का आना नहीं हो पा रहा था। लेकिन इस साल उमलिंग-ला पर बनाई गई सड़क पर पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। तिब्बती भाषा में 'ला' को माउंटेन पास या दर्रा कहते हैं।

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पूरी दुनिया में अभी तक 18,380 फीट वाले खारदुंग-ला पर बनाई गई सड़क को सबसे ऊंची मोटरेबल रोड के तौर पर माना जाता था। न सिर्फ अपने देश बल्कि दुनिया के ज्यादातर एडवेंचर पसंद करने वाले लोग खारदुंग-ला की सड़क पर दोपहिया और चार पहिया वाहनों से पहुंच कर खुशकिस्मत महसूस सफर करते थे। खारदुंग-ला पर बनाई गई सड़क चीन के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। क्योंकि सीमा सड़क संगठन ने इस सड़क के निर्माण के साथ भारत की चीन और पाकिस्तान से लगती हुई सीमाओं को सुरक्षा प्रदान की है। इस दृष्टिकोण से चीन की सीमा से लगते हुए उमलिंग-ला पर भी दुनिया की सबसे ऊंची सड़क बनाकर तैयार कर दी गई है।

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सीमा सड़क संगठन ने बनाई सड़क

यह सड़क आधिकारिक तौर पर पिछले साल अगस्त में शुरू की गई थी, लेकिन पर्यटकों का खारदुंग-ला या चांग-ला जैसे दर्रों पर बनाई गई मोटरेबल सड़क की तरह आना-जाना नहीं हो सका था। लद्दाख की दुर्गम पहाड़ियों पर होने वाले डेवलपमेंट की देखरेख और लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाली लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल से जुड़े अधिकारी सोनम नोरबू कहते हैं कि सीमा सड़क संगठन ने पूर्वी लद्दाख के उमलिंग-ला पर 19,300 फीट से अधिक ऊंचाई पर वाहनों के लिए चलने लायक सड़क को तैयार किया है। वह कहते हैं कि यह सड़क हमारे देश को दुश्मन देशों से तो सुरक्षित करती ही है, साथ ही लद्दाख के लोगों के बेहतर जीवन यापन के लिए भी यह सड़क एक वरदान साबित हो रही है।

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हिमालय की लद्दाख रेंज में अभी भी बहुत से ऐसे इलाके हैं, जो सड़कों से लेह और अन्य शहरों से पूरी तरीके से कटे हुए हैं। इसकी मुख्य वजह भौगोलिक परिस्थितियां ही हैं। दरअसल ऊंचे दर्रों वाले पूरे लद्दाख में आबादी तो छिटकी हुई बसी है। लेकिन उस आबादी को सड़क मार्ग से लद्दाख की हिमालयन श्रृंखलाओं में बसे कस्बों से जोड़ना बड़ी चुनौती माना जाता रहा है। सीमा सड़क संगठन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक इसी चुनौती को पूरा करना ही उनके संगठन का मुख्य उद्देश्य है। यही वजह है कि पूरी दुनिया में सबसे ऊंची सड़क उमलिंग-ला पर बनाकर न सिर्फ लद्दाख के पूर्वी इलाके के कस्बों को जोड़ा गया है, बल्कि सैन्य दृष्टिकोण से बनाए गए दुनिया के सबसे ऊंचे सड़क मार्ग से देश की सीमा की सुरक्षा और मजबूत हुई है। उमलिंग-ला पर बनाई गई 52 किलोमीटर लंबी सड़क से पूर्वी लद्दाख के चुमार सेक्टर स्थित कई कस्बे आपस में जुड़ गए हैं। साल के ज्यादातर महीनों में उमलिंग-ला बर्फ से ढका रहता है। बावजूद इसके बनाई गई इस सड़क से चिसुमले और डेमचोक जैसे आबादी वाले इलाके सीधे जुड़ गए हैं।

ऑक्सीजन का स्तर 50 फीसदी से भी कम

लद्दाख के पूर्वी इलाके में स्थित हानले गांव से लगभग 35 किलोमीटर की चढ़ाई के बाद दुनिया के सबसे ऊंचे उमलिंग-ला पर बनी 52 किलोमीटर से ज्यादा लंबाई वाली सड़क पर पहुंच सकते हैं। हैनल गांव से फोटु-ला होते हुए उमलिंग-ला तक के बेहद मुश्किलों भरे इस सफर में ऑक्सीजन का स्तर 50 फीसदी से भी कम रहा। जबकि जुलाई महीने के बावजूद भी इस पूरे दर्रे पर तापमान तीन डिग्री के करीब था। 19,300 फीट की ऊंचाई पर बनाए गए दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल रोड पर तापमान सर्दियों में अपने निम्न स्तर पर पहुंचकर माइनस 40 डिग्री तक हो जाता है। सीमा सड़क संगठन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक उमलिंग-ला पर सड़क के बनने से उनकी सीमाएं तो सुरक्षित ही हुई हैं, बल्कि लद्दाख के बहुत से कस्बे और गांव इस सड़क के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति और पूरे लेह-लद्दाख क्षेत्र से जुड़ गए हैं।



लद्दाख पर्यटन विभाग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक लेह से तकरीबन ढाई सौ किलोमीटर दूर बसे हानले गांव तक अब पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ गई है। उनका कहना है कि बीते कुछ सालों की तुलना में 2022 में पर्यटक बहुत ज्यादा पहुंचे हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सीमा सड़क संगठन द्वारा बनाई गई सड़कों का निर्माण सैन्य दृष्टिकोण से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसलिए बॉर्डर पर बनाई गई इस सड़क का महत्त्व भी उसी लिहाज से सबसे ज्यादा है।

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