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एलएसी पर पीछे हटी सेनाएं, चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहा है भारत
Thu, 09 Jul 2020 08:33 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Thu, 09 Jul 2020 08:33 AM IST
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बैली ब्रिज, गलवां घाटी (फाइल फोटो)
- फोटो : Exclusively Managed
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पिछले कई दिनों से भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। चीनी सेना पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में कुछ किलोमीटर पीछे हट गई है। इसी बीच भारत के रक्षा सुरक्षा प्रतिष्ठान के एक अधिकारी का कहना है कि भारत चीन पर कड़ी नजर रखेगा कि वह 30 जून को सैन्य कमांडरों के बीच हुई वार्ता के फैसले पर कायम रहता है या नहीं। वार्ता में दोनों सेनाओं के चरणबद्ध तरीके से पीछे हटने पर सहमति बनी थी।
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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री और स्टेट काउंसलर वांग यी के बीच पांच जुलाई को हुई चर्चा के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई। सरकार के उच्च सूत्रों ने कहा कि यदि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गलवां नदी के पास चीन ने जो कच्ची सड़क बनाई है वो बंद मिली या फिर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) सर्दियों के लिए आवास बनाती हुई नजर आई तो इसे माना जाएगा कि वह पीछे हटने की बजाय वहीं पर बने रहना चाहते हैं।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में दोनों सेना 30 जून को बनी सहमति पर अमल कर रहे हैं। बातचीत में शामिल सूत्रों के अनुसार चीन की सेना ने पीपी14, पीपी15 और पीपी17ए के क्षेत्रों से हटना शुरू कर दिया है। यहां से उसने अपनी पांच संरचनाओं को हटा दिया है। पैंगोंग त्सो के उत्तरी तट पर चीनी सेना फिंगर फोर पर तीन प्वाइंट से पीछे हट गई है।
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हालांकि डेसपांग क्षेत्र में भारतीय सेना पेट्रोलिंग नहीं कर पा रही है जहां कि वह पहले किया करती थी। पीएलए ने एलएसी तक एक सड़क का निर्माण किया है और वे अब भारतीय पैदल गश्त को यहां रोक रहे हैं। इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। पीएलए की गतिविधियों पर भारतीय पक्ष कड़ी नजर रख रहा है।
हाल ही में बने बफर जोन की निगरानी के अलावा, भारतीय सेना एलएसी के साथ चीनी संरचनाओं की भी कड़ी निगरानी कर रही है। वहीं अगले हफ्ते वर्किंग मेकैनिज्म ऑन कॉर्डिनेशन एंड कंसल्टेशन की अगले दौर की बैठक होने वाली है। जिसमें सेनाओं के पीछे हटने की पुष्टि की जाएगी।