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केवाईसी के लिए चेहरा पहचानने वाली तकनीक की अनुमति चाहता है पेमेंट उद्योग
Thu, 28 Feb 2019 01:33 AM IST
Avdhesh Kumar
एजेंसी, मुंबई
एजेंसी, मुंबई
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Thu, 28 Feb 2019 01:33 AM IST
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आधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिक्कतों का सामना कर रह पेमेंट सेवा उद्योग ने रिजर्व बैंक (आरबीआई) से केवाईसी (ग्राहक को जानो) नियम का अनुपालन के लिए चेहरे की पहचान आधारित साफ्टवेयर के इस्तेमाल देने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में वित्तीय या बैंकिंग लेनदेने में आधार की अनिवार्यता खत्म कर दी थी। पिछले साल कोर्ट के फैसले ने इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट कंपनियों को केवाईसी के लिए आधार का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी थी।
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के चेयरमैन नवीन सूर्या ने बुधवार को कहा कि हमने एक मॉडल का प्रस्ताव दिया है। इसमें ग्राहक अपने दस्तावेज की तस्वीर अपलोड कर सकता है और उसके बाद खुद कैमरे के सामने बैठना होगा। एल्गोरिथम (सॉफ्टवेयर) अपलोड किए गए दस्तावेज की प्रमाणिकता जांचेगा और फिर दस्तावेज में लगी फोटो से कैमरे के सामने बैठे व्यक्ति के चेहरे का मिलान करेगा। यह केवाईसी की जरूरत को पूरा करेगा।
सूर्या ने दावा किया कि एल्गोरिथम इस काम को बखूबी अंजाम दे सकता है। लेकिन आरबीआई इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि आधार पर आए फैसले के बाद कुछ विकल्पों को तलाशना जरूरी है। उन्होंने केवाईसी नियमों का पालन करने के लिए प्रीपेड भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए समयसीमा को छह माह बढ़ाने के कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि पुराने नियमों को जोखिम आधारित प्रणाली में बदलने की जरूरत है।
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पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के चेयरमैन नवीन सूर्या ने बुधवार को कहा कि हमने एक मॉडल का प्रस्ताव दिया है। इसमें ग्राहक अपने दस्तावेज की तस्वीर अपलोड कर सकता है और उसके बाद खुद कैमरे के सामने बैठना होगा। एल्गोरिथम (सॉफ्टवेयर) अपलोड किए गए दस्तावेज की प्रमाणिकता जांचेगा और फिर दस्तावेज में लगी फोटो से कैमरे के सामने बैठे व्यक्ति के चेहरे का मिलान करेगा। यह केवाईसी की जरूरत को पूरा करेगा।
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सूर्या ने दावा किया कि एल्गोरिथम इस काम को बखूबी अंजाम दे सकता है। लेकिन आरबीआई इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि आधार पर आए फैसले के बाद कुछ विकल्पों को तलाशना जरूरी है। उन्होंने केवाईसी नियमों का पालन करने के लिए प्रीपेड भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए समयसीमा को छह माह बढ़ाने के कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि पुराने नियमों को जोखिम आधारित प्रणाली में बदलने की जरूरत है।
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