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कुरुक्षेत्रः राहुल गांधी का रास्ता साफ करने के लिए बढ़ी कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव की समय सीमा

Vinod Agnihotri विनोद अग्निहोत्री
Updated Fri, 22 Jan 2021 07:32 PM IST

सार

राहुल अगर किसी गैर गांधी को अध्यक्ष बनाने की बात पर अड़े रहे, तो फिर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उसी तरह चुनाव होगा जैसा कि नरसिंह राव के बाद सीताराम केसरी, शरद पवार और राजेश पायलट के बीच और सोनिया गांधी और जितेंद्र प्रसाद के बीच हुआ था
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cwc - फोटो : रवि बत्रा
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विस्तार

कांग्रेस में अध्यक्ष के चुनाव की समय सीमा एक बार फिर बढ़ा दी गई। अब जून 2021 तक पार्टी अध्यक्ष का चुनाव कर लेने का फैसला संगठन की सर्वोच्च निर्णायक संस्था कांग्रेस कार्यसमिति ने लिया है। लेकिन इस फैसले से यह संकेत भी मिलता है कि अध्यक्ष को लेकर पार्टी के शीर्ष स्तर पर अभी कोई आम सहमति नहीं बन पाई है और इसीलिए विधानसभा चुनावों की आड़ लेकर यह फैसला जून तक आगे सरका दिया गया है।
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बैठक में जिस तरह कार्यसमिति चुनावों के मुद्दों पर वरिष्ठ नेताओं के बीच नोंकझोंक हुई और खुद राहुल गांधी के बीच-बचाव के बाद मामला शांत हुआ उससे भी बड़े नेताओं में गहराते मतभेदों की झलक तो मिलती है, लेकिन साफ संकेत यह भी है कि जून तक समयसीमा राहुल गांधी को अध्यक्ष बनने के लिए राजी करने और पार्टी में शीर्षस्तर पर उनके अनुकूल माहौल बनाने के लिए बढ़ाई गई है।


अगर फिर भी राहुल राजी नहीं हुए और किसी गैर-गांधी को अध्यक्ष बनाने की अपनी बात पर अड़े रहे, तो फिर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उसी तरह चुनाव होगा जैसा कि नरसिंह राव के बाद सीताराम केसरी, शरद पवार और राजेश पायलट के बीच और सोनिया गांधी और जितेंद्र प्रसाद के बीच हुआ था। क्योंकि दिग्वजिय सिंह समेत कुछ छत्रप गांधी परिवार के किसी सदस्य के मैदान में न होने पर चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।

2019 के लोकसभा चुनावों के बाद अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद से ही पार्टी अपने नए अध्यक्ष की तलाश में है। राहुल गांधी के बार-बार मना करने के बाद सोनिया गांधी को कुछ वक्त के लिए अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन अगर जब जून में चुनाव होंगे तो सोनिया का अंतरिम अध्यक्ष पद का कार्यकाल भी दो साल का हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक कार्यसमिति की बैठक में किसान आंदोलन और राष्ट्रीय सुरक्षा की संवेदनशील जानकारी एक टीवी चैनल के संपादक को कथित रूप से लीक होने के मुद्दों पर पारित प्रस्तावों पर शीर्ष नेताओं में आम सहमति रही।

लेकिन जब अध्यक्ष पद के चुनाव का मामला उठा तो वरिष्ठ सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने यह कहा कि अध्यक्ष के चुनाव कार्यक्रम के साथ ही कार्यसमिति के चुनाव की भी सहमति हो जानी चाहिए। तब उनकी काट करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जो नेता खुद कभी कार्यसमिति में चुन कर नहीं आए, वो चुनाव पर जोर दे रहे हैं।

इस पर आनंद शर्मा भड़क गए। उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति का नहीं संगठन का मसला है। इस पर वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी ने कहा कि पहले अध्यक्ष का चुनाव होता है उसके बाद कार्यसमिति का गठन किया जाता है। बात बढ़ती देख राहुल गांधी ने उन्हें शांत करते हुए कहा कि संगठन चुनावों का पूरा कार्यक्रम तय करके इस मसले का हल कर दिया जाना चाहिए।

बताया जाता है कि गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा के नेतृत्व वाले शीर्ष नेता चाहते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव अब ज्यादा लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए और कार्यसमिति का गठन नए अध्यक्ष की इच्छा पर नहीं, बल्कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधियों द्वारा मतदान से होना चाहिए। जबकि आमतौर पर कार्यसमिति का गठन अध्यक्ष के निर्वाचन के बाद मनोनयन द्वारा होता है। 1991 में राजीव गांधी के निधन के बाद नरसिंह राव जब अध्यक्ष चुने गए थे, तब कार्यसमिति के सदस्यों का भी चुनाव हुआ था जिसमें अर्जुन सिंह सबसे ज्यादा मतों से जीते थे।

लेकिन उसके बाद नरसिंह राव ने यह कहते हुए कि इस कार्यसमिति में एक भी महिला सदस्य नहीं है अपनी नाखुशी जाहिर की थी। इससे जबरदस्त विवाद हुआ। उसके बाद प्रधानमंत्री निवास तत्कालीन सात रेसकोर्स रोड में नव निर्वाचित कार्यसमिति की लंबी बैठक रात आठ बजे से लेकर तड़के साढ़े तीन बजे तक हुई।

उस मैराथन बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव पारित हुआ कि यह कार्यसमिति एकमत से कांग्रेस अध्यक्ष को कार्यसमिति को पुनर्गठित करने के लिए अधिकृत करती है। इसके बाद नरसिंह राव ने उस कार्यसमिति में महज एक बदलाव किया कि सबसे ज्यादा मतों से जीतने वाले अर्जुन सिंह और शरद पवार को निर्वाचित से मनोनीत श्रेणी में कर दिया।

सोनिया गांधी को पत्र लिखकर नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाने वाले नेताओं की कोशिश है कि जल्दी से जल्दी पार्टी को नया और सक्रिय अध्यक्ष मिलना चाहिए। इस गुट के कई नेता चाहते हैं कि अगर राहुल गांधी को अभी भी अध्यक्ष बनने में हिचक है और वह किसी गैर गांधी को अध्यक्ष बनाने की अपनी बात पर अड़े हैं, तो किसी वरिष्ठ नेता के नाम पर सहमति बनाई जाए।

लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सोनिया और राहुल के बाद अगर किसी पर सहमति बन सकती है तो वह प्रियंका गांधी पर ही बन सकती है। लेकिन अगर परिवार किसी गैर गांधी को आगे लाता है तो फिर चुनाव की भी नौबत आ सकती है।

बताया जाता है कि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत में दिग्विजय सिंह यह कह चुके हैं कि वह पूरी तरह चाहते हैं कि राहुल गांधी फिर से पार्टी अध्यक्ष बनें। लेकिन अगर गांधी परिवार के अलावा कोई अध्यक्ष बनाने की बात आती है तो वह चुनाव लड़ सकते हैं। इसके अलावा आनंद शर्मा का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में है।

जबकि गैर गांधी नामों में सबसे ज्यादा स्वीकृत नाम पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का है, जिन्हें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का पूर्ण विश्वास प्राप्त है। इसी विश्वास की वजह से शिंदे को गृह मंत्री, राज्यपाल और उप राष्ट्रपति का उम्मीदवार भी बनाया जा चुका है।

2014 के लोकसभा चुनावों के कुछ महीनों पहले एक फार्मूला आया था कि शिंदे को प्रधानमंत्री बनाकर पूरे देश के दलितों को कांग्रेस के पक्ष में लाने की कोशिश की जाए। लेकिन यह बात आगे बढ़ नहीं सकी थी। शिंदे के अलावा मल्लिकार्जुन खड़गे, मुकुल वासनिक और मीरा कुमार कांग्रेस का बड़ा चेहरा हैं।

लेकिन इनमें किसी के नाम पर सहमति बनेगी यह मुश्किल है। राहुल गांधी के बेहद भरोसेमंद और मौजूदा संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल का नाम भी राहुल के सिपहसालारों की तरफ से चलाया जा रहा है, लेकिन वेणुगोपाल को लेकर वरिष्ठ नेताओं की रजामंदी नहीं बन रही है।

इनके अलावा अन्य वरिष्ठ नेताओं में अशोक गहलोत, कैप्टन अमरिदंर सिंह मुख्यमंत्री हैं और वह राज्य की सत्ता छोड़ने के अनिच्छुक हैं। इनके अलावा कमलनाथ, अंबिका सोनी, गुलाम नबी आजाद एके एंटनी और जनार्दन द्विवेदी, पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल भी वरिष्ठ नेता हैं। इनमें एंटनी और आजाद अल्पसंख्यक समुदाय के हैं और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस इन्हें अध्यक्ष बनाने का जोखिम नहीं ले सकती है जबकि चिदंबरम की समस्या हिंदी न बोल पाने की है।

द्विवेदी महासचिव पद से खुद इस्तीफा देकर फिलहाल सक्रिय भूमिका से अलग हैं। अंबिका और कमनलाथ दोनों के रिश्ते सोनिया गांधी परिवार से बेहद करीबी हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस में नए अध्यक्ष का मसला अभी भी उलझा है और कोई भी तस्वीर अब जून तक ही साफ हो सकेगी।
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