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एक्सक्लूसिव: 'मुझे भी फांसी दे दो'; कुलदीप सेंगर की बेटी की गुहार, कहा-हम भी चाहते हैं पीड़िता को सुरक्षा मिले
Tue, 30 Dec 2025 10:36 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Tue, 30 Dec 2025 10:36 PM IST
सार
Unnao Case: पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर से जुड़ा उन्नाव मामला सुर्खियों में बना हुआ है। मामला सुप्रीम कोर्ट में है। पीड़ित पक्ष और आरोपी पक्ष आमने-सामने हैं। इस मामले में कुलदीप की छोटी बेटी इशिता सेंगर के बाद अब बड़ी बेटी ऐश्वर्या सेंगर भी खुलकर सामने आई हैं। जानते हैं कि इस मामले पर उन्होंने किस तरह अपना पक्ष रखा है...
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ऐश्वर्या सेंगर, कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट का फैसला देशभर में सुर्खियों में आया था। इसी के बाद उन्नाव मामले की पीड़िता ने दिल्ली में प्रदर्शन किया। इसी बीच, 2017 के बाद पहली बार सेंगर का परिवार खुलकर सामने आया। पहले सेंगर की छोटी बेटी इशिता ने पिता के निर्दोष होने की बात कही। अब बड़ी बेटी ऐश्वर्या सेंगर ने भी पूरे मामले पर सवाल उठाए हैं। इसी मुद्दे पर अमर उजाला ने ऐश्वर्या से बात की।
इतने लंबे मुकदमे के बाद भी आप पिता को निर्दोष कैसे मानती हैं?
ऐश्वर्या सेंगर: हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। इससे पहले हमें कभी नहीं लगा कि मीडिया में बात रखने की जरूरत है, लेकिन हमें महसूस हुआ कि दूसरे पक्ष की बातों को देशभर में सच मान लिया गया है। तब हमें लगा कि हमें भी अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए। अगर एक भी सबूत है, तो बताइए। अगर मेरे पिता ने एक बार आंख उठाकर भी उनकी तरफ देखा हो, तो मेरे पिता सहित मुझे भी फांसी पर चढ़ा दीजिए।
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एक बार सबूत तो देखिए। मैंने भी वकालत की पढ़ाई की है। पॉक्सो में पीड़िता के बयान पर भी सजा का प्रावधान है, लेकिन ऐसा तब है, जब पीड़िता का बयान 'स्टर्लिंग क्वालिटी' (एक जैसा) का हो। इस मामले में बयान 'स्टर्लिंग क्वालिटी' से कोसों दूर है। पहले कहा गया कि घटना दोपहर दो बजे की है, लेकिन उस समय मेरे पिता मेरी मां के साथ गंगा दशहरा से जुड़े कार्यक्रम में थे। तब कहा गया कि घटना शाम छह बजे की है। फिर एफआईआर में कहा गया कि घटना रात आठ-साढ़े आठ बजे की है। सीबीआई ने मेरे पिता की लोकेशन कहीं और की बताई। सीबीआई की चार्जशीट से हमें यह बात पता चली। पीड़िता की उम्र 18 साल से ज्यादा थी। जो घटना का समय बताया गया, उस समय पीड़िता फोन पर बात कहीं बात कर रही थीं। अगर पिता को जमानत मिली थी, तो वकील की मदद से चुनौती दी जा सकती थी, लेकिन उन लोगों ने इंडिया गेट पर जाकर प्रदर्शन करने का रास्ता चुना।
पीड़िता के रिश्तेदारों की हादसों में मौत हुई। पीड़िता के पिता की भी मौत हुई। यह तो हकीकत है। इसे कैसे झुठलाएंगी?
ऐश्वर्या सेंगर: यह कहा गया कि उनकी गाड़ी को 11 बार एक ट्रक ने टक्कर मारी। यह कैसे संभव है? सीबीआई की रिपोर्ट में कहा गया था कि वह महज एक हादसा था। मेरे पिता उस मामले में बरी हो चुके हैं। उस वक्त हमें परेशान किया गया, प्रताड़ित किया गया। हम चाहते हैं कि इन लोगों की सुरक्षा बढ़ाई जाए। पूरे परिवार को सुरक्षा मिले, लेकिन महज इल्जाम लगा-लगाकर उन्होंने एक इंसान की जिंदगी आठ साल से बर्बाद कर रखी है। हमारी गलती सिर्फ इतनी है कि हम तब मीडिया के सामने नहीं आए। हमें लगा था कि हमारे पास तथ्य मजबूत हैं।
तो क्या आपके परिवार को अदालतों पर भरोसा नहीं है?
ऐश्वर्या सेंगर: मीडिया ट्रायल के चलते हम केस हारे थे। आठ साल लंबी लड़ाई हमने लड़ी। इतने सबूत होने के बावजूद हम मामले में हार नहीं सकते। हम रहें, ना रहें, ये कागज हमेशा रहेंगे। आठ साल लंबा वक्त होता है। अगर 10 साल और लग जाते हैं और हम निर्दोष साबित होते हैं, तो कौन जवाब देगा?
मामला तो सीबीआई के पास भी गया था, फिर क्या हुआ?
ऐश्वर्या सेंगर: 8 अप्रैल 2018 को दूसरे पक्ष ने हंगामा किया। संस्थाओं पर दबाव बनाया गया। उसी आधार पर चार्जशीट दायर हुई। जांच के वक्त ही पाया गया था कि पीड़िता का उम्र संबंधी प्रमाण-पत्र फर्जी है। सीबीआई तो मानती थी कि कि वह फर्जी दस्तावेज था। फिर कुछ क्यों नहीं हुआ? तथ्य सभी के सामने हैं।
ये सारा मामला शुरू कहां से हुआ?
ऐश्वर्या सेंगर: इनके परिवार से दुश्मनी 2000 से शुरू हुई। प्रधानी के चुनाव (पंचायत चुनाव) के समय से रंजिश शुरू हुई थी। इनके चाचा यह चुनाव लड़ना चाहते थे। उनके चाचा ने मेरे चाचा पर हमला करवाया। उनके चाचा जेल में हैं। उन पर 17 मुकदमे हैं। 2000 में लड़की के चाचा ने मेरे चाचा पर गोली चलवाई। 2016 में वो लौटकर आते हैं, फिर चुनाव लड़ने की तैयारी करते हैं, लेकिन तब हमारे परिवार की सदस्य प्रधान बन जाती हैं। उनके मन में हमारे प्रति हमेशा नफरत की भावना रहीं।
एक साल बाद 2017 में पीड़िता ने मुकदमा दायर किया कि शशि सिंह और निधि सिंह ने नौकरी के बहाने बुलाया और तीन लड़कों ने गलत काम किया। उस केस में हमारा कहीं नाम नहीं था। गांव में एक पंचायत हुई। उसमें इनके चाचा ने प्रस्ताव रखा कि शुभम सिंह से लड़की शादी करा दी जाए। हालांकि, शुभम की मां ने मना कर दिया। उन्होंने शुभम सिंह के पूरे परिवार के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दायर करा दिया। मेरे पिता ने पंचायत में सिर्फ यह आग्रह किया कि लड़के की मां-बेटी का दोष नहीं है। उनका नाम दुष्कर्म के मामले में न लिखा जाए। चार्जशीट में मां-बेटी का नाम नहीं था। यहीं से उनमें बदले की भावना आई। इसके बाद उन्होंने बार-बार घटना का समय बदला। लड़की का परिवार राजनीतिक तौर पर सक्रिय है। कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया। उनकी मां ने प्रियंका गांधी के साथ घूम-घूमकर प्रचार किया।
अब आपका परिवार क्या चाहता है?
ऐश्वर्या सेंगर: हम यही चाहते हैं किसी के दबाव में कोई जांच न हो और किसी के दबाव में कोई फैसला न सुनाया जाए। हम दोबारा सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे। हम दलीलें रखेंगे। हमारे तथ्य मजबूत हैं। पिता एक दिन बाहर आएंगे। आठ साल लंबा समय होता है। जो अपराध उन्होंने किया नहीं, उसके लिए वे जेल में हैं। नियमित जमानत पर हमारी तरफ से जिरह अब जाकर पूरी हुई है। मैंने जो भी बातें यहां कहीं हैं, वह ऑन रिकॉर्ड हैं। यही वजह है कि सजा निलंबित हुई। अगर हाईकोर्ट के फैसले से पीड़िता असंतुष्ट थीं, तो वो सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के बजाय इंडिया गेट क्यों गईं? धरना देकर दबाव बनाना कहां तक सही है? उन्नाव के लोग मेरे परिवार जैसे हैं। वे मुझे बेटी मानते हैं। उनका आशीर्वाद हमारे साथ है। कम से कम हमारी बात सुनिए, हमारे तथ्य देखिए। अगर आपको सही न लगे, तो बेशक आप दूसरे पक्ष का साथ दीजिए।
सवाल: क्या आपने गृह मंत्री से मिलने का समय मांगा है?
ऐश्वर्या सेंगर: हमने कोई समय नहीं मांगा। हम इनके जैसे बड़े लोग नहीं हैं कि एक फोन घुमाएं और राहुल गांधी हमसे मिल लें, लेकिन हमने गृह मंत्री से आग्रह किया है कि हम थक गए हैं। हम यह भी चाहते हैं कि पीड़ित परिवार को पूरी सुरक्षा मिले, अन्यथा कुछ ऐसा न हो कि बाद में हमारा नाम जोड़ दिया जाए। हम बिना किसी दबाव के हमारे मामले की सुनवाई चाहते हैं।
मामला क्या है?
एक नाबालिग ने 2017 में तत्कालीन विधायक कुलदीप सेंगर के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत की थी। अप्रैल 2018 को केंद्र ने सीबीआई जांच की मंजूरी दी। सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज कर 13 अप्रैल 2018 को सेंगर को लखनऊ स्थित आवास से गिरफ्तार किया। लंबी जांच और दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के बाद 16 दिसंबर 2019 को कुलदीप को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी पाया गया। 20 दिसंबर 2019 को कुलदीप को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके बाद विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई। बाद में कुलदीप व छोटे भाई अतुल को पीड़िता के पिता की हत्या के मुकदमे में तीन मार्च 2020 को 10 साल की सजा हुई। कुलदीप सेंगर छह साल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
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इतने लंबे मुकदमे के बाद भी आप पिता को निर्दोष कैसे मानती हैं?
ऐश्वर्या सेंगर: हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। इससे पहले हमें कभी नहीं लगा कि मीडिया में बात रखने की जरूरत है, लेकिन हमें महसूस हुआ कि दूसरे पक्ष की बातों को देशभर में सच मान लिया गया है। तब हमें लगा कि हमें भी अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए। अगर एक भी सबूत है, तो बताइए। अगर मेरे पिता ने एक बार आंख उठाकर भी उनकी तरफ देखा हो, तो मेरे पिता सहित मुझे भी फांसी पर चढ़ा दीजिए।
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एक बार सबूत तो देखिए। मैंने भी वकालत की पढ़ाई की है। पॉक्सो में पीड़िता के बयान पर भी सजा का प्रावधान है, लेकिन ऐसा तब है, जब पीड़िता का बयान 'स्टर्लिंग क्वालिटी' (एक जैसा) का हो। इस मामले में बयान 'स्टर्लिंग क्वालिटी' से कोसों दूर है। पहले कहा गया कि घटना दोपहर दो बजे की है, लेकिन उस समय मेरे पिता मेरी मां के साथ गंगा दशहरा से जुड़े कार्यक्रम में थे। तब कहा गया कि घटना शाम छह बजे की है। फिर एफआईआर में कहा गया कि घटना रात आठ-साढ़े आठ बजे की है। सीबीआई ने मेरे पिता की लोकेशन कहीं और की बताई। सीबीआई की चार्जशीट से हमें यह बात पता चली। पीड़िता की उम्र 18 साल से ज्यादा थी। जो घटना का समय बताया गया, उस समय पीड़िता फोन पर बात कहीं बात कर रही थीं। अगर पिता को जमानत मिली थी, तो वकील की मदद से चुनौती दी जा सकती थी, लेकिन उन लोगों ने इंडिया गेट पर जाकर प्रदर्शन करने का रास्ता चुना।
पीड़िता के रिश्तेदारों की हादसों में मौत हुई। पीड़िता के पिता की भी मौत हुई। यह तो हकीकत है। इसे कैसे झुठलाएंगी?
ऐश्वर्या सेंगर: यह कहा गया कि उनकी गाड़ी को 11 बार एक ट्रक ने टक्कर मारी। यह कैसे संभव है? सीबीआई की रिपोर्ट में कहा गया था कि वह महज एक हादसा था। मेरे पिता उस मामले में बरी हो चुके हैं। उस वक्त हमें परेशान किया गया, प्रताड़ित किया गया। हम चाहते हैं कि इन लोगों की सुरक्षा बढ़ाई जाए। पूरे परिवार को सुरक्षा मिले, लेकिन महज इल्जाम लगा-लगाकर उन्होंने एक इंसान की जिंदगी आठ साल से बर्बाद कर रखी है। हमारी गलती सिर्फ इतनी है कि हम तब मीडिया के सामने नहीं आए। हमें लगा था कि हमारे पास तथ्य मजबूत हैं।
तो क्या आपके परिवार को अदालतों पर भरोसा नहीं है?
ऐश्वर्या सेंगर: मीडिया ट्रायल के चलते हम केस हारे थे। आठ साल लंबी लड़ाई हमने लड़ी। इतने सबूत होने के बावजूद हम मामले में हार नहीं सकते। हम रहें, ना रहें, ये कागज हमेशा रहेंगे। आठ साल लंबा वक्त होता है। अगर 10 साल और लग जाते हैं और हम निर्दोष साबित होते हैं, तो कौन जवाब देगा?
मामला तो सीबीआई के पास भी गया था, फिर क्या हुआ?
ऐश्वर्या सेंगर: 8 अप्रैल 2018 को दूसरे पक्ष ने हंगामा किया। संस्थाओं पर दबाव बनाया गया। उसी आधार पर चार्जशीट दायर हुई। जांच के वक्त ही पाया गया था कि पीड़िता का उम्र संबंधी प्रमाण-पत्र फर्जी है। सीबीआई तो मानती थी कि कि वह फर्जी दस्तावेज था। फिर कुछ क्यों नहीं हुआ? तथ्य सभी के सामने हैं।
ये सारा मामला शुरू कहां से हुआ?
ऐश्वर्या सेंगर: इनके परिवार से दुश्मनी 2000 से शुरू हुई। प्रधानी के चुनाव (पंचायत चुनाव) के समय से रंजिश शुरू हुई थी। इनके चाचा यह चुनाव लड़ना चाहते थे। उनके चाचा ने मेरे चाचा पर हमला करवाया। उनके चाचा जेल में हैं। उन पर 17 मुकदमे हैं। 2000 में लड़की के चाचा ने मेरे चाचा पर गोली चलवाई। 2016 में वो लौटकर आते हैं, फिर चुनाव लड़ने की तैयारी करते हैं, लेकिन तब हमारे परिवार की सदस्य प्रधान बन जाती हैं। उनके मन में हमारे प्रति हमेशा नफरत की भावना रहीं।
एक साल बाद 2017 में पीड़िता ने मुकदमा दायर किया कि शशि सिंह और निधि सिंह ने नौकरी के बहाने बुलाया और तीन लड़कों ने गलत काम किया। उस केस में हमारा कहीं नाम नहीं था। गांव में एक पंचायत हुई। उसमें इनके चाचा ने प्रस्ताव रखा कि शुभम सिंह से लड़की शादी करा दी जाए। हालांकि, शुभम की मां ने मना कर दिया। उन्होंने शुभम सिंह के पूरे परिवार के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दायर करा दिया। मेरे पिता ने पंचायत में सिर्फ यह आग्रह किया कि लड़के की मां-बेटी का दोष नहीं है। उनका नाम दुष्कर्म के मामले में न लिखा जाए। चार्जशीट में मां-बेटी का नाम नहीं था। यहीं से उनमें बदले की भावना आई। इसके बाद उन्होंने बार-बार घटना का समय बदला। लड़की का परिवार राजनीतिक तौर पर सक्रिय है। कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया। उनकी मां ने प्रियंका गांधी के साथ घूम-घूमकर प्रचार किया।
अब आपका परिवार क्या चाहता है?
ऐश्वर्या सेंगर: हम यही चाहते हैं किसी के दबाव में कोई जांच न हो और किसी के दबाव में कोई फैसला न सुनाया जाए। हम दोबारा सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे। हम दलीलें रखेंगे। हमारे तथ्य मजबूत हैं। पिता एक दिन बाहर आएंगे। आठ साल लंबा समय होता है। जो अपराध उन्होंने किया नहीं, उसके लिए वे जेल में हैं। नियमित जमानत पर हमारी तरफ से जिरह अब जाकर पूरी हुई है। मैंने जो भी बातें यहां कहीं हैं, वह ऑन रिकॉर्ड हैं। यही वजह है कि सजा निलंबित हुई। अगर हाईकोर्ट के फैसले से पीड़िता असंतुष्ट थीं, तो वो सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के बजाय इंडिया गेट क्यों गईं? धरना देकर दबाव बनाना कहां तक सही है? उन्नाव के लोग मेरे परिवार जैसे हैं। वे मुझे बेटी मानते हैं। उनका आशीर्वाद हमारे साथ है। कम से कम हमारी बात सुनिए, हमारे तथ्य देखिए। अगर आपको सही न लगे, तो बेशक आप दूसरे पक्ष का साथ दीजिए।
सवाल: क्या आपने गृह मंत्री से मिलने का समय मांगा है?
ऐश्वर्या सेंगर: हमने कोई समय नहीं मांगा। हम इनके जैसे बड़े लोग नहीं हैं कि एक फोन घुमाएं और राहुल गांधी हमसे मिल लें, लेकिन हमने गृह मंत्री से आग्रह किया है कि हम थक गए हैं। हम यह भी चाहते हैं कि पीड़ित परिवार को पूरी सुरक्षा मिले, अन्यथा कुछ ऐसा न हो कि बाद में हमारा नाम जोड़ दिया जाए। हम बिना किसी दबाव के हमारे मामले की सुनवाई चाहते हैं।
मामला क्या है?
एक नाबालिग ने 2017 में तत्कालीन विधायक कुलदीप सेंगर के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत की थी। अप्रैल 2018 को केंद्र ने सीबीआई जांच की मंजूरी दी। सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज कर 13 अप्रैल 2018 को सेंगर को लखनऊ स्थित आवास से गिरफ्तार किया। लंबी जांच और दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के बाद 16 दिसंबर 2019 को कुलदीप को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी पाया गया। 20 दिसंबर 2019 को कुलदीप को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके बाद विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई। बाद में कुलदीप व छोटे भाई अतुल को पीड़िता के पिता की हत्या के मुकदमे में तीन मार्च 2020 को 10 साल की सजा हुई। कुलदीप सेंगर छह साल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।