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कुलभूषण मामले में सामने आई पाकिस्तान की एक और करतूत

amarujala.com, Presented By- अभिषेक मिश्रा Updated Thu, 18 May 2017 03:36 PM IST
kulbhushan case, pakistan has been exposed again
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कुलभूषण जाधव मामले में भारत और पाकिस्तान समेत दुनिया के कई दूसरे देशों के दिग्गज कानूनविद और वरिष्ठ पत्रकार अपनी राय दे चुके हैं, लेकिन इसके वास्तविक पहलुओं पर अंतरराष्ट्रीय अदालत को ही विचार करना होगा। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि पाकिस्तान ने इस मसले को राजनैतिक-सैन्य एजेंडा बनाकर पेश किया है। 

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जानकारों के मुताबिक, दुनिया के किसी भी लोकतंत्र में अभी तक यह नहीं देखा गया कि इस प्रकार के मामलों में सैन्य अदालत का गठन किया गया हो। 1953 में अमेरिका ने अपने दो नागरिकों जूलियस और ईथल रॉसेनबर्ग को सोवियत रूस के लिए जासूसी करने के आरोप में मुकदमा चलाया था, लेकिन मामला सैन्य अदालत नहीं पहुंचा था। ठीक इसी तरह भारत में 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले के मुख्य आरोपी याकूब मेमन के बचाव के लिए अभियुक्त रखने की पूरी स्वतंत्रता थी। 


21 जुलाई 2015 तक फांसी दिए जाने तक मेमन के लिए कोर्ट के दरवाजे खुले रहे थे। पाकिस्तान की सैन्य अदालत इस वर्ष अप्रैल तक 24 लोगों को सजा सुना चुकी है। जबकि पिछले साल 87 लोगों को सजा दी गई थी। इन मामलों में भी किसी को अपना बचाव पक्ष रखने की छूट नहीं दी गई थी।

यह फैसला पूर्ण रूप से सैन्य अदालत की निरंकुशता पर आधारित बताया जाता है। गौरतलब है कि पेशावर हमले के बाद पाकिस्तान ने अपने संविधान में 21वां संशोधन कर पाकिस्तान आर्मी एक्ट में बदलाव किए थे। जिसमें सैन्य अदालत को कई छूट दी गई थी। इस संशोधन के खिलाफ पाकिस्तान का बार एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था।

आग में घी डालने वाले काम न करे पाक : जर्मन राजदूत

पाकिस्तान में जर्मनी के पूर्व राजदूत गुंटर मुलैक ने कुलभूषण मामले पर पाकिस्तान की आलोचना की है। उन्होंने पाकिस्तान को कहा कि वो जाधव को राजनयिक मदद मुहैया कराए। मुलैक ने पाक को चेतावनी भरे स्वर में यह भी कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले से पूर्व पाकिस्तान जाधव को फांसी देता है, तो यह आग में घी डालने वाला साबित होगा।

मुलैक ने पाक को सलाह दी कि फैसले से पूर्व वो इस तरह का कोई भी कदम नहीं उठाए। उन्होंने कहा कि एक सेमिनार के दौरान मैंने सुना था कि जाधव को तालिबान ने ईरान से अगवा किया और पाक को सौंप दिया था। बता दें कि जिस वक्त कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी हुई थी, उस दौरान मुलक पाकिस्तान में जर्मन राजदूत थे।
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