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पुलिस कैंटीन से एक हजार आयातित सामान हटाने वाले आदेश को गृह मंत्रालय ने लिया वापस
Tue, 02 Jun 2020 11:00 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 02 Jun 2020 11:00 AM IST
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अर्धसैनिक बल के जवान (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
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केंद्रीय पुलिस कल्याण भंडार (केपीकेबी) ने शुक्रवार को केंद्रीय पुलिस बलों की कैंटीनों में एक हजार से अधिक उत्पादों को शुद्ध रूप से आयातित के रूप में वर्गीकृत करने के बाद डिलिस्ट कर दिया था, अब इस आदेश को वापस ले लिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पाया की इसमें शामिल कई वस्तुएं भारत में निर्मित थी।
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29 मई को जारी आदेश में केपीकेबी ने जिन उत्पादों को डिलिस्ट किया था उसमें डाबर इंडिया का रीयल फ्रूट जूस, सैमसंग, एलजी और फिलिप्स द्वारा निर्मित इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स जिसकी भारत में सेवाएं हैं और घरेलू कंपनियां जैसे हेवेल्स, बजाज, विप्रो और गोदरेज, लगेज उत्पाद बनाने वाली कंपनियां जैसे वीआईपी और सफारी, ऊषा इंटरनेशनल द्वारा बनाई जाने वाली सिलाई मशीन, नीलकमल फर्नीचर और घरेलू कंपनी स्लीपवेल ब्लैंकेट्स शामिल थे। स्लीपवेल पूर्व भाजपा सांसद शीला गौतम की कंपनी है।
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सीआरपीएफ के डीजीपी एपी महेश्वरी ने सोमवार को कहा कि केपीकेबी के मुखिया द्वारा गृह मंत्रालय के फैसले के सम्मान में जारी आदेश, पुलिस/ अर्धसैनिक कैंटीन के माध्यम से केवल स्वदेशी सामान बेचना गलत था। उन्होंने कहा कि केपीकेबी के सीईओ ने वरिष्ठ अधिकारियों से परामर्श नहीं किया और यह कार्रवाई चूक की वजह से हुई।
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आदेश पर केपीकेबी के सीईओ आरएम मीणा ने हस्ताक्षर किए थे जिसमें उत्पादों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था। 1. विशुद्ध रूप से भारत में निर्मित उत्पाद, 2. कच्चा माल आयातित लेकिन उत्पाद भारत में निर्मित/ भारत में असेंबल्ड और 3. विशुद्ध रूप से आयातित उत्पाद।
इसमें कहा गया था कि पहली दो श्रेणियों के सामान को कैंटीन में बेचा जाएगा जबकि तीसरी श्रेणी जिसमें 1,026 उत्पाद हैं, उन्हें एक जून से बिक्री की अनुमति नहीं होगी।
कुछ अन्य उत्पादों की आपूर्ति जिनकी जानकारी आपूर्तिकर्ता/ निर्माता द्वारा नहीं दी गई थी उन्हें भी तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया था। लगभग 10 लाख अर्धसैनिक/ पुलिस कर्मियों के लगभग 50 लाख परिवार के सदस्यों को उत्पाद बेचकर सीएपीएफ कैंटीन कई हजारों करोड़ का कारोबार करती है।
29 मई के आदेश में सभी उत्पादों को आयात करने वाली फर्मों की सूची में रेड बुल इंडिया, फेरेरो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड जो कि नुटेला और किंडर जॉय बनाती है, स्केचर्स (खेल के जूते) और विक्टोरिनॉक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड आदि शामिल हैं जिनके उत्पादों को जानकारी न देने की वजह से रोक दिया गया था। इसमें महाराजा व्हाइटलाइन इलेक्ट्रॉनिक्स, एलन कूपर परिधान और रेड टेप के जूते भी शामिल हैं।