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RG Kar Case: दरिंदगी की जगह और मोबाइल टावर लोकेशन ने सजा तक पहुंचाया, 10 साल की कैद से लेकर फांसी तक संभव

Sun, 19 Jan 2025 07:15 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 19 Jan 2025 07:15 AM IST
सार

160 से अधिक पेज के फैसले में न्यायाधीश ने कहा कि मैंने अपराध की जगह और आरोपी के मोबाइल टावर लोकेशन पर विचार किया। मैंने पुलिस और अस्पताल अधिकारियों की कुछ गतिविधियों की आलोचना की है जो साक्ष्य में सामने आई हैं। 

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Kolkata RG Kar case accused Sanjay Roy convicted by Sealdah court
आरजी कर मामला - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

 आरजी कर अस्पताल की प्रशिक्षु डॉक्टर से दरिंदगी मामले में एकमात्र आरोपी संजय रॉय को दोषी करार देते हुए सियालदह कोर्ट के जज अनिर्वाण दास ने कहा कि दोषी ने 9 अगस्त 2024 को सुबह करीब 4 बजे अस्पताल के सेमिनार रूम में सो रही पीजी प्रशिक्षु पर हमला किया। संजय ने डॉक्टर से दुष्कर्म किया और उसके बाद उसका गला घोंटकर हत्या कर दी।

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जज ने फैसला खुली अदालत में सुनाया लेकिन सुनवाई बंद कमरे में हुई थी। 160 से अधिक पेज के फैसले में न्यायाधीश ने कहा कि मैंने अपराध की जगह और आरोपी के मोबाइल टावर लोकेशन पर विचार किया। मैंने पुलिस और अस्पताल अधिकारियों की कुछ गतिविधियों की आलोचना की है जो साक्ष्य में सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता-पीड़िता के पिता के उठाए गए कुछ सवालों के जवाब फैसले में दिए गए हैं।
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10 साल की कैद से लेकर सजा-ए-मौत तक संभव
न्यायाधीश दास ने कहा कि बीएनएस की धारा 64 (दुष्कर्म) के तहत कम से कम 10 साल की सजा हो सकती है और यह आजीवन कारावास तक हो सकती है। धारा 66 (पीड़ित की मृत्यु या उसे लगातार निष्क्रिम अवस्था में पहुंचाने के लिए सजा) में कम से कम 20 साल की सजा का प्रावधान है, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। इसका अर्थ है आरोपी के शेष जीवन के लिए कारावास या मृत्युदंड भी का प्रावधान है।
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संदीप घोष की गतिविधियों ने भ्रम पैदा किया
न्यायाधीश ने कहा कि विभागाध्यक्ष, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं उप प्राचार्य (एमएसवीपी) तथा आरजी कर मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य संदीप घोष की कुछ गतिविधियों से मेरे मन में कुछ भ्रम पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि इन्हें फैसले में स्पष्ट किया गया है। घोष पर मामले में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया गया था और उन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। साथ ही स्थानीय ताला पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया था। हालांकि वह जमानत पर बाहर हैं। उन पर प्रशिक्षु डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले में एफआईआर दर्ज करने में कथित देरी का आरोप था। घोष दुष्कर्म-हत्या मामले में जमानत मिलने के बावजूद जेल में बंद हैं। घोष आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं के एक अन्य मामले में न्यायिक रिमांड पर हैं।

कई अहम बिंदुओं पर किया गया विचार
न्यायाधीश ने कहा कि मैंने कई बिंदुओं पर विचार किया। इसमें पीड़िता की प्रोफाइल, उसकी ड्यूटी के घंटे और 8-9 अगस्त 2024 के बीच उसे आखिरी बार कब और कहां जीवित देखा गया था। मैं इस बात पर भी विचार किया कि पीड़िता कब और कहां मृत पाई गई और किसने सबसे पहले पाया कि उसकी मृत्यु हो गई है, मृत्यु का कारण और समय। कोर्ट ने यह भी देखा कि क्या उसके साथ यौन उत्पीड़न का कोई सबूत है, क्या हमलावर एक व्यक्ति था या व्यक्तियों का समूह था और किसने पीड़िता पर क्रूर कृत्य किया था।


दोषी बोला-मैं नहीं, आईपीएस अफसर शामिल
कोलकाता। आरजी कर मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षु डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या मामले में संजय रॉय ने कोर्ट में कहा कि मैं गरीब हूं, इसलिए फंसाया गया है। मैंने कुछ नहीं किया, जिन लोगों ने किया उन्हें छोड़ दिया गया है। इसमें एक आईपीएस अधिकारी भी शामिल है। राय ने यह भी कहा कि वह हमेशा रुद्राक्ष की माला पहनता है और यदि उसने ऐसा किया होता तो यह माला टूट जाती।

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