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नारदा स्टिंग मामला: टीएमसी के चारों नेता रहेंगे हाउस अरेस्ट, कोलकाता हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
Fri, 21 May 2021 01:57 PM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: Tanuja Yadav
Updated Fri, 21 May 2021 01:57 PM IST
सार
नारदा स्टिंग ऑपरेशन में कोलकाता हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि तृणमूल कांग्रेस के चारो नेता हाउस अरेस्ट रहेंगे।
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तृणमूल कांग्रेस के चारों नेताओं को हाउस अरेस्ट का आदेश
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नारदा स्टिंग मामले में तृणमूल कांग्रेस को राहत मिलती नहीं दिखाई दे रही है। कोलकाता हाईकोर्ट ने अपने फैसले में तृणमूल कांग्रेस के चारों नेताओं को हाउस अरेस्ट रहने का आदेश दिया है। यह फैसला कोलकाता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की पीठ ने सुनाया है।
हालांकि हाईकोर्ट की यह बेंच फैसला सुनाने को लेकर बंटी हुई दिखाई दी। अरिजीत बनर्जी टीएमसी नेता सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा, फिरहाद हकीम और पार्टी के पूर्व नेता शोभन चटर्जी का जमानत देने के लिए सहमत थे। लेकिन कार्यवाहक मुख्या न्यायाधीश राजेश बिंदल इसके खिलाफ थे।
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इसलिए इस मामले में अब बड़ी पीठ सुनवाई करेगी। तब तक के लिए टीएमसी के नेताओं को नजरबंद रहने का आदेश दिया गया है। हालांकि इस दौरान वो कार्यालय से संबंधित काम कर सकते हैं। इससे पहले कोलकाता हाईकोर्ट ने सोमवार रात को जमानत पर रोक लगा दी थी।
बता दें कि चारों नेताओं को सीबीआई ने नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में गिरफ्तार किया था और उनके खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किए थे। खंडपीठ ने बुधवार को सुनवाई को एक दिन के लिए टाल दिया था।
क्या है नारदा घोटाला?
साल 2016 में बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले नारदा स्टिंग टेप सार्वजनिक किए गए थे। ऐसा दावा किया गया था कि ये टेप साल 2014 में रिकॉर्ड किए गए थे। इसमें टीएमसी के मंत्री, सांसद और विधायक की तरह दिखने वाले वयक्तियों को कथित रूप से एक काल्पनिक कंपनी के प्रतिनिधियों से कैश लेते दिखाया गया था। यह स्टिंग ऑपरेशन नारदा न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल ने किया था। साल 2017 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन टेप की जांच का आदेश सीबीआई को दिया था।
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हालांकि हाईकोर्ट की यह बेंच फैसला सुनाने को लेकर बंटी हुई दिखाई दी। अरिजीत बनर्जी टीएमसी नेता सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा, फिरहाद हकीम और पार्टी के पूर्व नेता शोभन चटर्जी का जमानत देने के लिए सहमत थे। लेकिन कार्यवाहक मुख्या न्यायाधीश राजेश बिंदल इसके खिलाफ थे।
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West Bengal: ACJ Division bench orders that house arrest will continue till the larger bench is formed in Narada case. All four leaders are permitted to perform official work and meet officials virtually.
— ANI (@ANI) May 21, 2021
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इसलिए इस मामले में अब बड़ी पीठ सुनवाई करेगी। तब तक के लिए टीएमसी के नेताओं को नजरबंद रहने का आदेश दिया गया है। हालांकि इस दौरान वो कार्यालय से संबंधित काम कर सकते हैं। इससे पहले कोलकाता हाईकोर्ट ने सोमवार रात को जमानत पर रोक लगा दी थी।
बता दें कि चारों नेताओं को सीबीआई ने नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में गिरफ्तार किया था और उनके खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किए थे। खंडपीठ ने बुधवार को सुनवाई को एक दिन के लिए टाल दिया था।
क्या है नारदा घोटाला?
साल 2016 में बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले नारदा स्टिंग टेप सार्वजनिक किए गए थे। ऐसा दावा किया गया था कि ये टेप साल 2014 में रिकॉर्ड किए गए थे। इसमें टीएमसी के मंत्री, सांसद और विधायक की तरह दिखने वाले वयक्तियों को कथित रूप से एक काल्पनिक कंपनी के प्रतिनिधियों से कैश लेते दिखाया गया था। यह स्टिंग ऑपरेशन नारदा न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल ने किया था। साल 2017 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन टेप की जांच का आदेश सीबीआई को दिया था।