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कोलकाता: नोटबंदी से चाय बागान मजदूरों में भुखमरी की नौबत

Mon, 14 Nov 2016 02:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो/ कोलकाता Updated Mon, 14 Nov 2016 02:26 AM IST
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Kolkata: currency ban led to starvation for the tea plantation workers
नोटबंदी के केंद्र सरकार के फैसले की वजह से पश्चिम बंगाल और असम के चाय बागानों में काम करने वाले नौ लाख से ज्यादा मजदूरों के फाकाकशी की नौबत आ गई है। इन बागानों में मजदूरों को हर शुक्रवार या शनिवार को साप्ताहिक आधार पर मजदूरी का भुगतान किया जाता है, लेकिन हजार और पांच सौ के नोटों पर पाबंदी लगने और सौ रुपये के नोटों की किल्लत के चलते उन्हें बीते सप्ताह की मजदूरी नहीं मिली है। उनमें से कुछ के पास पांच सौ का एकाध नोट है भी तो वह रद्दी कागज बन गया है। 
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पश्चिम बंगाल के अलावा पड़ोसी राज्य असम के दूरदराज के इलाकों में स्थित चाय बागानों में अब तक नए नोट पहुंचे ही नहीं हैं। ऐसे में बागान प्रबंधन भी करे तो क्या करे। वहां पर्याप्त नोट पहुंचने में कम से कम एक सप्ताह लग सकता है। बैंकों ने इस मामले में हाथ खड़े कर दिए हैं।
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पश्चिम बंगाल के जूट मिलों में भी यही स्थिति है। यहां चाय बागान व जूट मिल मालिकों ने भारतीय रिजर्व बैंक से रुपये की निकासी की सीलिंग में ढील देने की अपील की है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। ऐसे में चाय बागानों के मजदूर भुखमरी के कगार पर खड़े हैं। असम में भी बागान मालिकों ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की अपील की है।
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पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र और डुआर्स इलाके में स्थित 283 चाय बागानों में साढ़े तीन लाख मजदूर काम करते हैं। दार्जिलिंग टी एसोसिएशन के प्रमुख सलाहकार संदीप मुखर्जी कहते हैं कि इस मुद्दे पर सरकार को पत्र भेजा गया है। मजदूरी का भुगतान नहीं होने की वजह से मजदूरों के बगावत के अंदेशे को ध्यान में रखते हुए पुलिस को सूचित कर दिया गया है। साथ ही ट्रेड यूनियनों से भी इस मामले में सहयोग की अपील की गई है।


राज्य के जूट उद्योग में काम करने वाले ढाई लाख मजदूरों  को हर पखवाड़े नकद भुगतान मिलता है। महीने की सात से 10 तारीख के बीच पहली मजदूरी का भुगतान होता है। हुगली जिले के एक जूट मिल मालिक बताते हैं कि पाबंदी के बाद शायद ही किसी मजदूरी को मजदूरी मिली हो। इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्र व रिजर्व बैंक को पत्र लिख कर तुरंत सहायता मांगी है। 
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