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जानिए, गणतंत्र दिवस समारोह में राहुल गांधी को क्यों मिली चौथी पंक्ति में जगह
संजय मिश्र, नई दिल्ली
Updated Thu, 25 Jan 2018 11:03 PM IST
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राहुल गांधी
- फोटो : PTI
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गणतंत्र दिवस समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को चौथी पंक्ति में कुर्सी प्रदान किए जाने से उनके समर्थकों में सरकार के खिलाफ नाराजगी है। मगर राहुल ने गणतंत्र दिवस समारोह में बैठने की व्यवस्था को मुद्दा बनाने के बजाय समारोह में शामिल होने को महत्वपूर्ण माना है। राहुल के करीबियों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष के लिए बैठने का स्थान महत्वपूर्ण नहीं है। उनके लिए परेड में उपस्थिति महत्वपूर्ण है। दरअसल राजपथ पर आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में इस वर्ष कांग्रेस अध्यक्ष के बैठने की व्यवस्था चौथी पंक्ति में की गई है। जिसे लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में सरकार के खिलाफ नाराजगी नजर आ रही है। इस कदम को वे अपने नेता के अपमान से जोड़कर देख रहे हैं।
मगर इस दफे सरकार के सामने अपनी अलग मजबूरी है। हालांकि समारोह में राजनीतिक दलों के अध्यक्ष के बैठने की व्यवस्था को लेकर कोई संवैधानिक नियम नहीं है। मगर विपक्षी दल या बड़े दलों के प्रमुखों को पहली पंक्ति में कुर्सी प्रदान करने की लंबे समय से परंपरा रही है। जब कांग्रेस पार्टी की सरकारें केंद्र में रही हैं तो भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को पहली पंक्ति में स्थान प्रदान किया जाता था। गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन की व्यवस्था रक्षा मंत्रालय के हाथों में रहती है।
रक्षा मंत्रालय की भी है अपनी मजबूरी
गणतंत्र दिवस समारोह की व्यवस्था देख रहे रक्षा मंत्रालय की भी अपनी मजबूरी है। इस वर्ष मुख्य अतिथि के तौर पर 10 देशों के प्रमुख गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होंगे। अब इन 10 अतिथियों के साथ इनकी पत्नि के लिए भी व्यवस्था की गई है। जिसके वजह से पहली पंक्ति की कुर्सियों पर जगह नहीं बची है। जबकि अन्य वर्ष के अयोजनों में महज एक विदेशी नेता ही बतौर मुख्य अतिथि आयोजन में शामिल होता था। इसलिए अगली पंक्ति में सीटों की संख्या भरपूर रहती थी। जिसपर प्रमुख भारतीय नेताओं को जगह दी जाती थी। मगर इस दफे विदेशी मेहमानों की संख्या बढऩे से व्यवस्था में बदलाव मजबूरी बन गई है। यही वजह है कि व्यवस्थापकों को कांग्रेस अध्यक्ष को चौथी पंक्ति में स्थान आवंटित करना पड़ा है।
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कांग्रेस ने लगाया राजनीति का आरोप
कांग्रेसियों में नाराजगी की वजह राहुल गांधी को चौथी पंक्ति में स्थान दिए जाने के साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पहली पंक्ति में स्थान दिए जाने को लेकर भी है। उन्हें लगता है कि सीट आवंटन में बेशक विदेशी मेहमानों की बढ़ी संख्या की मजबूरी बताई जा रही है। मगर राहुल को सीधे चौथी पंक्ति में बैठने की व्यवस्था के बजाय दूसरी पंक्ति में स्थान देकर उनके सम्मान के साथ न्याय किया जा सकता था। एक तरफ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बैठने की व्यवस्था तमाम दिक्कतों के बाद पहली पंक्ति में की गई है। तो राहुल गांधी को सीधे चौथी पंक्ति में स्थान दिया गया है। यही वजह है कि कांग्रेस को इसमें सियासी चाल नजर आ रही है।
वर्ष 2015 में भी केंद्र की मोदी सरकार पर गणतंत्र दिवस समारोह के जरिए सियासत साधने का आरोप लग चुका है। तब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सरकार पर आमंत्रण नहीं देने का आरोप लगाया था। यही वजह है कि राहुल को चौथी पंक्ति में धकेले जाने के मामले में कांग्रेस को राजनीतिक साजिश नजर आ रही है। मगर राहुल ने समारोह में शामिल होने का निर्णय लिया है।
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मगर इस दफे सरकार के सामने अपनी अलग मजबूरी है। हालांकि समारोह में राजनीतिक दलों के अध्यक्ष के बैठने की व्यवस्था को लेकर कोई संवैधानिक नियम नहीं है। मगर विपक्षी दल या बड़े दलों के प्रमुखों को पहली पंक्ति में कुर्सी प्रदान करने की लंबे समय से परंपरा रही है। जब कांग्रेस पार्टी की सरकारें केंद्र में रही हैं तो भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को पहली पंक्ति में स्थान प्रदान किया जाता था। गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन की व्यवस्था रक्षा मंत्रालय के हाथों में रहती है।
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रक्षा मंत्रालय की भी है अपनी मजबूरी
गणतंत्र दिवस समारोह की व्यवस्था देख रहे रक्षा मंत्रालय की भी अपनी मजबूरी है। इस वर्ष मुख्य अतिथि के तौर पर 10 देशों के प्रमुख गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होंगे। अब इन 10 अतिथियों के साथ इनकी पत्नि के लिए भी व्यवस्था की गई है। जिसके वजह से पहली पंक्ति की कुर्सियों पर जगह नहीं बची है। जबकि अन्य वर्ष के अयोजनों में महज एक विदेशी नेता ही बतौर मुख्य अतिथि आयोजन में शामिल होता था। इसलिए अगली पंक्ति में सीटों की संख्या भरपूर रहती थी। जिसपर प्रमुख भारतीय नेताओं को जगह दी जाती थी। मगर इस दफे विदेशी मेहमानों की संख्या बढऩे से व्यवस्था में बदलाव मजबूरी बन गई है। यही वजह है कि व्यवस्थापकों को कांग्रेस अध्यक्ष को चौथी पंक्ति में स्थान आवंटित करना पड़ा है।
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कांग्रेस ने लगाया राजनीति का आरोप
कांग्रेसियों में नाराजगी की वजह राहुल गांधी को चौथी पंक्ति में स्थान दिए जाने के साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पहली पंक्ति में स्थान दिए जाने को लेकर भी है। उन्हें लगता है कि सीट आवंटन में बेशक विदेशी मेहमानों की बढ़ी संख्या की मजबूरी बताई जा रही है। मगर राहुल को सीधे चौथी पंक्ति में बैठने की व्यवस्था के बजाय दूसरी पंक्ति में स्थान देकर उनके सम्मान के साथ न्याय किया जा सकता था। एक तरफ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बैठने की व्यवस्था तमाम दिक्कतों के बाद पहली पंक्ति में की गई है। तो राहुल गांधी को सीधे चौथी पंक्ति में स्थान दिया गया है। यही वजह है कि कांग्रेस को इसमें सियासी चाल नजर आ रही है।
वर्ष 2015 में भी केंद्र की मोदी सरकार पर गणतंत्र दिवस समारोह के जरिए सियासत साधने का आरोप लग चुका है। तब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सरकार पर आमंत्रण नहीं देने का आरोप लगाया था। यही वजह है कि राहुल को चौथी पंक्ति में धकेले जाने के मामले में कांग्रेस को राजनीतिक साजिश नजर आ रही है। मगर राहुल ने समारोह में शामिल होने का निर्णय लिया है।