एक्सक्लूसिव: क्या है डिजिटल सुरक्षा और क्यों है यह इतनी जरूरी
- डिजिटल सुरक्षा और डिजिटल स्वच्छता क्या है
- कैसे रख सकते हैं आप अपने ऑनलाइन खातों को सुरक्षित
- एक अच्छा पासवर्ड बनाने के तरीके
- वाईफाई नेटवर्क का प्रयोग करते समय सतर्क रहें और इन बातों का ख्याल रखें
- स्कैम और फिशिंग साइट से कैसे बचें
- फर्जी समाचारों की साइट्स को जांचने का तरीका
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विस्तार
साइबर सुरक्षा का मतलब सूचना-तकनीक से जुड़े पूरे प्रणाली-तंत्र की सुरक्षा है। यह तकनीकों, प्रक्रियाओं और प्रणालियों की एक ऐसी व्यवस्था है, जिसका मकसद कम्प्यूटर नेटवर्क, तकनीकी उपकरणों, प्रोग्राम और डाटा को हमले, क्षति और अनधिकृत पहुंच से बचाना है। साइबर सुरक्षा सरकारी, सैन्य, कॉरपोरेट, वित्तीय और चिकित्सकीय जानकारियों की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।
इन संस्थानों की व्यवस्था लाखों-करोड़ों डाटा पर आधारित होती है। इसीलिए इन डाटा की सुरक्षा उनके लिए बेहद अहम हो जाती है। अन्यथा करोड़ों-अरबों के नुकसान के साथ ही उनकी बेहद गोपनीय जानकारियां भी सार्वजनिक हो सकती हैं। यह जानकारियां गलत हाथों में जाने से देश की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। डिजिटल मीडिया के दौर में डिजिटल सुरक्षा जरूरत भी है और इसके प्रति जागरूक होना समय की मांग भी है। आज ऑनलाइन बैंकिंग हो या फिर रोजमर्रा का काम, सब मोबाइल फोन से संचालित हो रहे हैं। ऐसे में बहुत सतर्क और सजग रहने की आवश्यकता है।
मगर सवाल उठता है कि हम कैसे डिजिटली सुरक्षित रह सकते हैं?
आइए हम आपको बताते हैं कुछ उपाय और तकनीक जिससे आप स्वयं ही जांच-पड़ताल कर सकते हैं और अपनी 'डिजिटल हाइजीन' बनाए रख सकते हैं।
क्या है डिजिटल सुरक्षा और डिजिटल स्वच्छता
पूरी दुनिया मे इंटरनेट का जाल फैला हुआ है। संरचना, संपादन और समन्वयन तक का कार्य इसकी मदद से हो रहा है। साइबर सुरक्षा एक ऐसी सुरक्षा है, जो इंटरनेट से जुड़े हुए उपकरणों के लिए होती है। इसके अंतर्गत हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और डाटा को साइबर अपराध से सुरक्षित रखने का भी काम किया जाता है।
डिजिटल स्वच्छता
"डिजिटल स्वच्छता" एक शब्द है जिसका अर्थ होता है, जिन डिजिटल उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है, वे कितने सुरक्षित हैं और उनकी स्वच्छता बनाए रखने के लिए किस तरह की तकनीक और अपडेट का प्रयोग किया जा रहा है।
साइबर सुरक्षा के मुख्य तत्व
- एप्लिकेशन सुरक्षा
- इंफॉर्मेशन सुरक्षा
- नेटवर्क सुरक्षा
- ऑपरेशनल सुरक्षा
- एंड यूजर सुरक्षा
- डेटा सुरक्षा
- मोबाइल सुरक्षा
- क्लाउड सुरक्षा
साइबर सुरक्षा हमलों के प्रकार
डिजिटल माध्यम पर तमाम सूचना उपलब्ध रहती है और इनको सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती है।रेनसमवेयर
जैसा नाम वैसा काम, यह एक तरह का वाइरस होता है जो दूसरे के सिस्टम तक भेजा जाता है, यह उसके डेटा को कब्जे मे लेता है और उसके बदले मे उससे रिश्वत मांगता है।मालवेयर
यह कम्प्युटर की किसी फाइल या फिर प्रोग्राम की क्षति करता है |सोशल इंजीनियरिंग
इसमे बातचीत के जरिये किसी से उसका पासवर्ड, डेटा और गुप्त सूचनाएँ एकत्रित की जाती हैं, यह ज्यादा खतरनाक होता है, इसलिए सोशल प्लेटफार्म पर सोच समझकर बातचीत करनी चाहिए।फिशिंग
यह एक तरीके का झांसा होता है जिसके माध्यम से किसी को अपने जाल मे फंसाना और उसके अकाउंट, क्रेडिट कार्ड और लॉग इन की जानकारी चोरी की जाती है।कैसे रख सकते हैं आप अपने ऑनलाइन खातों को सुरक्षित
- मजबूत और अनोखे पासवर्ड का इस्तेमाल करें।
- प्रत्येक खाते के लिए अलग अलग पासवर्ड का प्रयोग करें।
- समय समय पर अपने पासवर्ड को बदलते रहें।
- पासवर्ड प्रबंधक का प्रयोग करें।
- सुरक्षा कुंजी का प्रयोग करें।
- ऑनलाइन खातों के लिए दो-चरणीय सत्यापन सेटअप करें।
- अपने अकाउंट की सेटिंग्स की जांच करते रहें।
- अपने अकाउंट की जांच G.co/securitycheckup पर करते रहें।
- जब भी किसी और सिस्टम पर लॉग इन करें तो लॉग आउट जरूर करें।
एक अच्छा पासवर्ड बनाने के तरीका
- पासवर्ड लंबा होना चाहिए।
- इसमें अंग्रेजी के बड़े (अपरकेस) और छोटे अक्षर (लोअरकेस) होने चाहिए।
- संख्या, प्रतीक, कोड और विशेष कैरेक्टर्स का प्रयोग करना चाहिए।
- जन्मदिन, प्रियजनों के नाम, नौकरी, पालतू पशु का नाम प्रयोग करने से बचना चाहिए।
- 123456, abcd......इत्यादि का प्रयोग करने से बचना चाहिए।
अपने मोबाइल को सुरक्षित रखिए
- आपका फोन आपका सीक्रेट एजेंट होता है, इसकी सुरक्षा ही आपके डाटा की सुरक्षा है।
- अपनी स्क्रीन को पासकोड या फिंगरप्रिंट लॉक से लॉक करके रखे।
- बहुत जरूरी डाटा को फोन मे न रखें, उसको अलग से सुरक्षित रखें।
- अपने फोन से उन ऐप्स को हटाएं, जिंनका उपयोग आप नहीं करते हैं।
- डिवाइस को अपडेट करते रहें और जब अपडेट करायें तो अपना महत्वपूर्ण डाटा अलग से सेव करके डिलीट कर लें।
- फ्री के सॉफ्टवेर को अपडेट करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच पड़ताल कर लें।
- हमेशा विश्वसनीय साइट से ही ऐप डाउनलोड करें।
- वाईफाई नेटवर्क का प्रयोग करते समय सतर्क रहें और इन बातों का ख्याल रखें।
- जब हम वाईफाई नेटवर्क मे होते हैं तो सावधान रहना चाहिए और यह देख लेना चाहिए कि वो नेटवर्क कितना सुरक्षित यानि सिक्योर है।
इससे बचने का तरीका
- जब भी संभव हो पासवर्ड वाले नेटवर्क पर कनेक्ट करना चाहिए। इस तरह के नेटवर्क मे जानकारियाँ चोरी होने की संभावना कम होती है।
- सार्वजनिक नेटवर्क से खरीदारी करते समय ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।
- जब भी ऐसा करना जरूरी हो तो इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि अपने खास डाटा और फ़ाइल को ट्रांसफर न किया जाए।
- अपनी ऑनलाइन पहचान के बारे में बहुत सावधानी बरतें।
- ओपन नेटवर्क और सिक्योर नेटवर्क की जांच पड़ताल कर लें।
- सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों, ई-मेल आदि पर प्राप्त लिंकों पर क्लिक करते समय सावधानी बरतें। यह एक खतरनाक लिंक हो सकता है।
- आपका बैंक अथवा इसके कर्मचारी आपके खाते के पासवर्ड, पिन, ओटीपी और सीवीवी विवरण आदि के लिए आपको अनुरोध स्वरूप कॉल अथवा ई-मेल नहीं करेंगे। यदि आपको ऐसी कॉल प्राप्त होती है तो इसकी सूचना तुरन्त अपने बैंक को दें और इसकी रिपोर्ट दर्ज करायें।
- अपने ब्राउजर से अनधिकृत थर्ड-पार्टी-एक्सटेंशन, प्लगइन और एड-आन के इस्तेमाल से बचना चाहिए। इनसे आपकी ऑनलाइन गतिविधि को गुप्त रूप से ट्रैक किया जा सकता है और आपका पर्सनल-डाटा चोरी करके उसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
- सार्वजनिक कंप्यूटर और साइबर कैफे से नेट बैंकिंग सुविधा का प्रयोग करते समय बैंकों द्वारा प्रदान किए गए वर्चुअल की बोर्ड का ही हमेशा उपयोग करें। इन कंप्यूटरों में की बोर्ड लॉगर्स लगे हो सकते हैं जो आपका यूजर पासवर्ड को चुरा सकते हैं।
स्कैम्स और फिशिंग साइट से कैसे बचें
- जब भी आपसे कोई ईमेल पर आपकी जानकरियां मांगे तो बिलकुल मत दीजिये।
- यह अक्सर पर ईमेल या विज्ञापनों द्वारा किया जाता है।
- ज्यादातर उन वेबसाइटों के माध्यम से किया जाता है जिनका आप पहले से उपयोग करते हैं।
- आपको कोई प्रलोभन, ऑफर दे।
- फिशिंग साइट्स "http" से शुरू होती है और इसमें लॉक का आइकन नहीं होता है। जबकि सुरक्षित वेबसाइट्स "https" से शुरू होती हैं और लॉक आइकन के साथ होती हैं। इसका मतलब है कि वेबसाइट सुरक्षित हैं।
- सबसे पहले URL की जांच करें इस बात को सुनिश्चित करें कि यह असली साइट हैं।
- अक्सर ये साइट हमसे कुछ फॉर्म भरने के लिए कहती है और उसमे हमसे संबंधित जानकारियां मांगती है जैसे, नाम, बैंक खाता नंबर, जन्मतिथि, पता, पेन कार्ड नंबर, पासवर्ड और क्रेडिट कार्ड नंबर।
- सोशल नेटवर्क साइट पर अपनी निजी और गोपनीय जानकारियां उपलब्ध न कराए।
- अपरिचित वेबसाइटों पर अपना पंजीकरण करते समय सावधान रहें।
- खासकर ऑनलाइन लेन-देन करते समय सुरक्षित नेटवर्क का उपयोग करें और उससे जुड़ी हुई जानकारियां अच्छी तरह पढ़ लें।
फर्जी समाचारों की साइट्स को जांचने का तरीका
- सबसे पहले वेब एड्रेस को जांच लें।
- उसके लोगो (प्रतीक चिन्ह) का तुलनात्मक अध्ययन करें।
- उससे मिलती जुलती साइट्स को देखें।
- उसका फोन्ट, बाईलाइन्स, टैगलाइन और कलर टोन की जांच पड़ताल करें।
- मुख्य तस्वीर का स्क्रीनशॉट लेकर उसको गूगल रिवर्स इमेज टूल में डालकर सर्च करें।
- उसका अबाउट पेज देखें।
- साइट कब और कहां रजिस्टर की गई है, उसको देखें।
- क्या और किसी प्लेटफार्म पर भी ऐसी खबरें उपलब्ध है इसको देख लें।
- सनसनीखेज और उकसाने वाली हैडलाइन के प्रति सचेत रहें।
- जहां से खबर आई है, उस मुख्य स्रोत को देख लें।
- संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क करें।
थोड़ी सी सतर्कता और समझदारी आपको बड़ी दुर्घटना से बचा सकती है |