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New CJI Justice UU Lalit: जानिए कौन हैं सीजेआई यूयू ललित? न्यायपालिका से जुड़ी हैं जिनकी चार पीढ़ियां

Sat, 27 Aug 2022 04:13 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 27 Aug 2022 04:13 PM IST
सार

देश के नए मुख्य न्यायधीश के रूप में जस्टिस यूयू ललित ने शनिवार को शपथ ले ली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में शपथ दिलाई। जस्टिस ललित भारत के 49वें चीफ जस्टिस बने हैं। आइए जानते हैं सीजेआई यूयू ललित के बारे में सबकुछ....
 

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Know who is Justice UU Lalit who has become the new Chief Justice of India
भारत के नए सीजेआई यूयू ललित - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत के नए चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस यूयू ललित ने शनिवार को आधिकारिक तौर पर जस्टिस एनवी रमण की विरासत को संभाल लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में शपथ दिलाई। भारत के 49वें प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ ग्रहण करने वाले न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित भारतीय न्यायपालिका के छठे ऐसे प्रमुख होंगे, जिनका कार्यकाल 100 दिन से कम होगा। न्यायमूर्ति ललित का कार्यकाल 74 दिन का होगा और वह आठ नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु होने पर सेवानिवृत्त होते हैं।

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सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट जज बने 
जस्टिस ललित का जन्म 9 नवंबर 1957 को महाराष्ट्र के सोलापुर में हुआ था। उनका पूरा नाम उदय उमेश ललित है। उन्होंने 1983 में बॉम्बे हाई कोर्ट में वकालत की शुरुआत की। सिर्फ तीन साल बाद 1986 में वह दिल्ली आ गए और यहां अपनी वकालत शुरू की। इसके बाद साल 1992 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकालत की शुरुआत की। वहीं, साल 2004 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के सीनिय़र वकील के रूप में नामित किया गया। 
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बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर नियुक्ति
13 अगस्त 2014 को उन्हें बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर नियुक्त किया गया था। जस्टिस ललित को 2014 में सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया था। इससे पहले 1971 में जस्टिस एसएम सीकरी पहले ऐसे चीफ जस्टिस थे जो सीधे बार से आए थे। 10 अगस्त को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी देश के 49वें सीजेआई के रूप में नियुक्ति की थी। आज शनिवार को उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली। 
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न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी हैं चार पीढ़ियां 
भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस यूयू ललित पर भले ही न्यायाधीशों की नियुक्ति से लेकर महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्नों जैसी चुनौतियां हों, लेकिन उनकी न्यायिक विरासत का अनुभव भी उनके पास होगा। दरअसल, चार पीढ़ियों से यूयू ललित का परिवार न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। जस्टिस ललित के दादा रंगनाथ ललित आजादी से पहले सोलापुर में एक वकील थे। जस्टिस यूयू ललित के 90 वर्षीय पिता उमेश रंगनाथ ललित भी एक पेशेवर वकील रह चुके हैं। बाद में उन्होंने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया।

पत्नी चलाती हैं स्कूल
भारत के नए सीजेआई की पत्नी का नाम अमिता ललित है, जो कि नोएडा में एक स्कूल का संचालन करती हैं। इसके अलावा जस्टिस ललित के दो बेटे हर्षद और श्रेयश, जिन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। हालांकि, बाद में श्रेयश ललित ने भी कानून की ओर रुख किया। उनकी पत्नी रवीना भी वकील हैं। वहीं, हर्षद अमेरिका में हैं, वे वहां रिसर्च के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। हर्षद की पत्नी का नाम राधिका है। 

कई अहम फैसलों का हिस्सा रहे हैं जस्टिस ललित
जस्टिस यूयू ललित सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं। तीन तलाक को असांविधानिक करार देने वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के भी सदस्य थे। जस्टिस ललित की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने त्रावणकोर के तत्कालीन शाही परिवार को केरल के ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का प्रबंधन करने का अधिकार दिया था। यह सबसे अमीर मंदिरों में से एक है।

जस्टिस ललित की पीठ ने ही ‘स्किन टू स्किन टच’ पर फैसला दिया था। इस फैसले में माना गया था कि किसी बच्चे के शरीर के यौन अंगों को छूना या ‘यौन इरादे’ से शारीरिक संपर्क से जुड़ा कृत्य पॉक्सो अधिनियम की धारा-7 के तहत ‘यौन हमला’ ही माना जाएगा। पॉक्सो अधिनियम के तहत दो मामलों में बॉम्बे हाईकोर्ट के विवादास्पद फैसले को खारिज करते हुए जस्टिस ललित की पीठ ने कहा था कि हाईकोर्ट का यह मानना गलती था कि चूंकि कोई प्रत्यक्ष ‘स्किन टू स्किन’ संपर्क नहीं था इसलिए यौन अपराध नहीं है।


जस्टिस ललित उस पीठ में भी थे, जिसने कहा था कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-13 बी (2) के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए निर्धारित छह महीने की प्रतीक्षा अवधि अनिवार्य नहीं है। हाल ही में जस्टिस ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को अदालत की अवमानना के आरोप में चार महीने के कारावास और 2000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

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