कैसे काम करता है एनएसए जिसके कंधों पर है देश को महफूज रखने की जिम्मेदारी
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- भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की भूमिका और सफर
- भारत की खुफिया एजेंसियां और एनएसए
- कैसे होती है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति
- राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के कार्य और दायित्व
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विस्तार
भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की भूमिका
भारत का सबसे ताकतवर नौकरशाह और सरकार का सबसे शक्तिशाली सलाहकार होता है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार । यह सलाहकार देश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का नेतृत्व करता है।भारत के पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा से लेकर वर्तमान के अजीत डोभाल तक पांच बड़े प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पद को संभाला है और अपनी तेज तर्रार बुद्धि का परिचय दिया है। यह एक कार्यकारी सरकारी संस्था है। इसका गठन 19 नवंबर, 1998 को किया गया था। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ( नेशनल सिक्योरिटी कौंसिल ) का वरिष्ठ अधिकारी होता है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार। देश के प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और मामलों पर सलाह देता है और एक रणनीतिकार सलाहकार के तौर पर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करता है।
भारत की खुफिया एजेंसियां और एनएसए
इसकी दो महत्वपूर्ण विंग्स अनुसंधान और विश्लेषण विंग (रॉ) और खुफिया ब्यूरो (आईबी) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को रिपोर्ट करती हैं। सारा आंकड़ा तैयार करके इसमें अपनी सलाह भी रखती है राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद नौकरशाही के मामले में सबसे प्रमुख और शक्तिशाली कार्यालय भी माना जाता है। इस पद को सबसे पहले भारत में 1998 में पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बनाया था। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति प्रधानमन्त्री के द्वारा की जाती है।वर्तमान में इस पद पर अजीत डोभाल हैं ।
एक परिचय : अब तक के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की सूची पर
अजीत डोभाल से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के इस महत्वपूर्ण पद पर चार अधिकारियों को नियुक्त किया जा चुका है।
- भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी ब्रिजेश मिश्रा को पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा नवंबर 1998 नियुक्त किया गया था और 22 मई 2004 तक अपने पद पर बने रहे थे। वह भारत के पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे।
- पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी जे एन दीक्षित दूसरे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त हुए। जो 23 मई 2004 से 3 जनवरी 2005 रहे।
- मनमोहन सिंह के ही कार्यकाल में तीसरे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन बने जो भारतीय पुलिस प्रशासनिक सेवा से थे। इनका कार्यकाल 3 जनवरी 2005 से 23 जनवरी 2010 तक रहा।
- भारत के चौथे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन रहे जो भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी थे।जिनका कार्यकाल 24 जनवरी 2010 से 28 मई 2014 तक रहा।
- देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल काडर के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी अजीत डोभाल को देश का पांचवा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया और उनके कार्यकाल को दूसरी बार फिर से बढ़ाया भी गया। पहली बार इनकी नियुक्ति 30 मई 2014 को की गयी थी।
|
क्रम |
नाम |
कब से |
कब तक |
प्रधानमंत्री |
|
1 |
ब्रिजेश मिश्र |
नवम्बर 1998 |
मई 2004 |
अटल बिहारी वाजपेयी |
|
2 |
जे एम दीक्षित |
मई 2004 |
जनवरी 2005 |
मनमोहन सिंह |
|
3 |
के एम नारायणन |
जनवरी 2005 |
जनवरी 2005 |
मनमोहन सिंह |
|
4 |
शिव शंकर मेनन |
जनवरी 2010 |
मई 2014 |
मनमोहन सिंह |
|
5 |
अजित डोभाल |
मई 2014 |
अब तक |
नरेंद्र मोदी |
कैसे होती है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) द्वारा की जाती है इस समिति की अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री करते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद के सदस्य और पद
जब अजित डोभाल की नियुक्ति की गयी तो इसको मोदी सरकार की दूसरी बड़ी नियुक्ति माना गया।इससे पहले नृपेन्द्र मिश्र को प्रधानमंत्री मोदी का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया था।
गुप्तचर ब्यूरो यानि खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख अजित कुमार डोभाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का "पावर थिंकटैंक" भी माना जाता है। 1968 बैच के अवकाश प्राप्त प्रशासनिक पुलिस अधिकारी डोभाल।
खुफिया जगत में कार्रवाई करने वाले सबसे तेज अधिकारियों में से एक माने जाते हैं।
वर्तमान में अजित डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर है और उनके अंतर्गत तीन उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आरएन रवि, राजिंदर खन्ना और पंकज सरन कार्यरत हैं।
- अजित डोभाल ( राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ) 1968 बैच के अवकाश प्राप्त भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी डोभाल।
- आरएन रवि ( उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ) केरल कैडर के 1976 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी है रवि नगा।
- राजिंदर खन्ना ( उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ) वह 1978 बैच के अधिकारी है।
- पंकज सरन ( उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ) 1982 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के अधिकारी रहे है।
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का आधिकारिक ढांचा इस प्रकार है
दिसंबर 1998 में सरकार ने एक टास्क फोर्स की सिफारिश के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर तीन स्तरीय ढांचा तैयार किया था।
पहला, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद : इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सर्वोच्च संस्था है जिसका प्रमुख देश का प्रधानमन्त्री होता है और इस परिषद का सचिव राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार होता है।
दूसरा, रणनीतिक नीति समूह : इस समूह का प्रमुख कैबिनेट सचिव होता है। यह संस्था देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नीति बनाती है जिसमें तीनों सेनाओं के प्रमुख के अलावा खुफिया ब्यूरो और रॉ के चीफ भी शामिल होते हैं इसका मुख्य कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को नीति बनाने सम्बन्धी सिफारिशें भेजना होता है।
तीसरा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड में वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारियों, नागरिकों के साथ-साथ सैन्य, शिक्षाविदों और आंतरिक और बाहरी सुरक्षा, विदेश मामलों, रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और आर्थिक मामलों में विशेषज्ञता रखने वाले और नागरिक समाज के प्रतिष्ठित सदस्य शामिल होते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के कार्य और दायित्व
- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, देश के आंतरिक और बाहरी खतरों से संबंधित सभी मामलों पर नियमित रूप से प्रधानमंत्री को सलाह देने के लिए नियुक्त किया जाता है इसके अलावा वह देश विदेश के सभी संवेदनशील मुद्दों पर नजर रखना भी इनका काम होता है।
- विदेश की खुफिया एजेंसियों के बीच गुप्त और खुले ऑपरेशन के लिए सामंजस्य स्थापित करना।
- सबसे महत्वपूर्ण यदि किसी देश के ऊपर भारत को हमला करने की जरुरत पड़ेगी तो इसके लिए भारत के प्रधानमंत्री के अलावा एक और एक गुप्त कोड होता है जिसको बहुत संवेदनशीलता के साथ प्रयोग किया जाता है जो कि देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पास भी होता है। इस कोड का प्रयोग करके ही किसी देश पर परमाणु हमला किया जा सकता है।
- पड़ोसी देशों के साथ सीमा मुद्दों पर प्रधानमंत्री के विशेष संवाददाता के रूप में भी कार्य करते हैं और ज्यादातर विदेश यात्राओं पर प्रधानमंत्री के साथ भी जाते हैं।
- एनएसए का कार्य प्रधानमंत्री के आदेश और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की सलाह लेकर देश के ऊपर आने वाले सभी खतरों से कैसे सामना किया जा सकता है इस बात का ध्यान रखना होता है
- विदेश की खुफिया एजेंसियों के बीच गुप्त और खुले ऑपरेशन के लिए तालमेल स्थापित करना भी इनका काम होता है।
- विभिन्न ऑपरेशनों के लिए भारत का कदम क्या होना चाहिए इस बारे में उचित कार्रवाई करने के लिए प्रधानमंत्री को सलाह देना।
- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को भारत की विदेश नीति पर बात करने के लिए और खुली चर्चा करने के लिए भी प्रधानमन्त्री की तरफ से प्रतिनिधि बनाकर विदेश भेजा जाता है।
- देश के ऊपर आने वाले किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए रणनीति बनाने का काम भी इनका होता है ।
- देश की सुरक्षा को लेकर सबसे मुख्य काम ये करती है, आंकड़े जुटाना, विश्लेषण करना और उन पर रोड मैपिंग करना |
भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है और इस पद पर कार्यरत अधिकारी की जिम्मेदारी बहुत बड़ी चुनौती के साथ साथ दायित्व की होती है।