फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Know how human will look like after million years

आज से लाखों साल बाद ऐसा दिखेगा आदमी, विकास के साथ-साथ बदलेगा बहुत कुछ

Sat, 14 Jul 2018 04:02 PM IST
बीबीसी, हिंदी
बीबीसी, हिंदी Updated Sat, 14 Jul 2018 04:02 PM IST
विज्ञापन
Know how human will look like after million years

भविष्य में होने वाले विकास को समझने के लिए हमें अपने अतीत में झांकने की जरूरत है। क्या हमारे वंशज किसी काल्पनिक वैज्ञानिक उपन्यास के चरित्रों की तरह उच्च तकनीक से लैस ऐसे मनुष्य होंगे, जिनकी आंखों की जगह कैमरे होंगे, शरीर के अंग खराब हो जाने पर नए अंग अपने आप विकसित हो जाएंगे, आखिर कैसी होंगी हमारी आने वाली पीढियां?

विज्ञापन


क्या मनुष्य आने वाले समय में जैविक और कृत्रिम प्रजातियों का मिला-जुला रूप होगा? हो सकता है वो अब के मुकाबले और नाटा या लंबा हो जाए, पतला या फिर और मोटा हो जाए या फिर शायद उसके चेहरे और त्वचा का रंग-रूप ही बदल जाए? जाहिर है, इन सवालों का जवाब हम अभी नहीं दे सकते। इसके लिए हमें अतीत में जाना होगा और ये देखना होगा कि लाखों साल पहले मनुष्य कैसा था। शुरुआत करते हैं उस समय से जब होमो सेपियंस थे ही नहीं। लाखों साल पहले शायद मनुष्य की कोई दूसरी ही प्रजाति थी, जो homo erectus और आज के मनुष्य से मिलता-जुलता था।
विज्ञापन


पिछले दस हजार सालों में, कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं जिनके मुताबिक इंसान ने अपने आपको ढाला है। खेती पर निर्भर होने और खानपान के विकल्प बढ़ने से कई दिक्कतें भी हुईं जिनको सुलझाने के लिए इंसान को विज्ञान का सहारा लेना पड़ा, जैसे डायबिटीज के इलाज के लिए इंसुलिन। शारीरिक बनावट भी अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग है, कहीं लोग मोटे हैं तो कहीं लंबे।
विज्ञापन
विज्ञापन


डेनमार्क के आरहुस विश्वविद्यालय के बायोइन्फोर्मेटिक्स विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर थॉमस मेयलुंड के मुताबिक अगर इंसान की लंबाई कम होती तो हमारे शरीर को कम ऊर्जा की जरूरत पड़ती और यह लगातार बढ़ रही आबादी वाले ग्रह के लिए बिल्कुल सही होता।

तकनीक से दिमाग का विकास

Know how human will look like after million years

तमाम लोगों के साथ रहना एक अन्य ऐसी परिस्थिति है जिसके मुताबिक इंसान को अपने आपको ढालना होगा। पहले जब हम शिकार पर ही निर्भर थे तो रोजमर्रा के जीवन में आपसी संवाद बहुत कम हुआ करता था। मेयलुंड का मानना है कि हमें अपने आपको इस तरह से ढालना चाहिए था कि हम इस सब से निपट सकते। जैसे लोगों का नाम याद रखने जैसा अहम काम हम कर सकते।

यहां से शुरु होती है तकनीक की भूमिका। थॉमस का मानना है- "दिमाग में एक इंप्लांट फिट करने से हम लोगों के नाम आसानी से याद रख सकते हैं।" वो कहते हैं- "हमें पता है कि कौन से जीन्स दिमाग के इस तरह के विकास में कारगर होंगे जिससे हमें अधिक से अधिक लोगों के नाम याद रहें।"

आगे चल कर हम शायद उन जींसों में बदलाव कर सकें। ये एक विज्ञान कथा जैसा लगता है लेकिन ये मुमकिन है। ऐसे इंप्लांट हम लगा सकते हैं लेकिन ये बात ठीक से नहीं जानते कि उसे किस तरह जोड़ा जाए कि उसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो सके। हम उसके करीब तो पहुंच रहे हैं लेकिन अभी इस पर प्रयोग चल रहा है। उनका कहना है- "ये अब जैविक से ज्यादा तकनीक का मामला है।"

मां-बाप की पसंद के होंगे बच्चे

Know how human will look like after million years

अबतक हम शरीर के टूटे हुए अंगों को बदल या ठीक कर पा रहे हैं जैसे पेसमेकर लगाना या कूल्हों का बदला जाना। शायद भविष्य में ये सब मनुष्य को बेहतर बनाने में इस्तेमाल हो। इसमें दिमाग का विकास भी शामिल है। हो सकता है हम अपने रंग-रूप या शरीर में तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल करें। जैसे कृत्रिम आंखें जिनमें ऐसा कैमरा फिट हो जो अलग-अलग रंगों और चित्रों की अलग-अलग फ्रीक्वेन्सी पकड़ सके।

हम सबने डिजाइनर बच्चों के बारे में सुना है। वैज्ञानिकों ने पहले ही ऐसी तकनीक ईजाद कर ली है जो भ्रूण के जीन्स को ही बदल दे और किसी को पता भी ना चले कि अब आगे क्या होने वाला है। लेकिन मायलुंड का मानना है कि भविष्य में कुछ जीन्स का ना बदला जाना अनैतिक माना जाएगा। इसके साथ हम चुन पाएंगे कि बच्चा दिखने में कैसा हो, शायद फिर मनुष्य वैसा दिखेगा जैसा उसके माता-पिता उसे देखना चाहते हैं।

मायलुंड का कहना है- "ये अब भी चुनने पर ही निर्भर करेगा लेकिन ये चुनाव अब कृत्रिम होगा। जो हम कुत्तों की प्रजातियों के साथ कर रहे हैं, वही हम इंसानों के साथ करना शुरु कर देंगे।"

जैनेटिक वेरिएशन

Know how human will look like after million years

ये सब सोचना अभी बहुत काल्पनिक लगता है, लेकिन क्या जनसंख्या के रुझान हमें इस बारे में कुछ संकेत दे सकते हैं कि भविष्य में हम कैसे दिखेंगे? 'ग्रैंड चैलेंजेस इन इको सिस्टम्स एंड दि एनवायरमेंट' के लेक्चरर डॉ जेसन का कहना है- "करोड़ों साल बाद के बारे में भविष्यवाणी करना पूरी तरह काल्पनिक है लेकिन निकट भविष्य के बारे में कहना बायोइन्फोर्मेटिक्स के जरिए संभव है।

हमारे पास अब दुनियाभर से मानव के जैनेटिक सैंपल है। जैनेटिक वेरिएशन और जनसंख्या पर उसके असर को अब आनुवांशिकी वैज्ञानिक बेहतर ढंग से समझ पा रहे हैं। अभी हम साफ तौर पर नहीं कह सकते कि जैनेटिक वेरिएशन कैसा होगा लेकिन बायोइन्फॉर्मैटिक्स के जरिए वैज्ञानिक जनसंख्या के रुझानों को देखकर कुछ अंदाजा तो लगा ही सकते हैं। जेसन की भविष्यवाणी है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों में असमानता बढ़ती जाएगी।

उनका कहना है- "लोग ग्रामीण क्षेत्रों से ही शहरी इलाकों में आते हैं इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहरी इलाकों में जैनेटिक विविधता ज्यादा देखने को मिलेगी।" उनका यह भी कहना है- "हो सकता है कि लोगों के रहनसहन में भी ये विविधता दिखने लगे।" ये सब दुनियाभर में एक समान नहीं होगा। उदहारण के तौर पर इंग्लैंड में ग्रामीण इलाकों में शहर के मुकाबले कम विविधता है और शहरों में बाहर से आए लोगों की संख्या ज्यादा।

दूसरा ग्रह बना ठिकाना तो कैसा होगा इंसान

Know how human will look like after million years

कुछ समुदायों में प्रजनन दर ज्यादा है तो कुछ में कम। जैसे अफ्रीका की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है तो उनके जीन्स भी विश्व के बाकी समुदायों के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढेंगे। जिन इलाकों में गोरे लोग रहते हैं वहां प्रजनन दर कम है। यही वजह है कि जेसन ने भविष्यवाणी की है कि विश्वस्तर पर सांवले लोगों की संख्या बढ़ती जाएगी। उनका कहना है- "ये तय है कि विश्वस्तर गोरे लोगों के मुकाबले सांवले लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी होगी और इंसान की कई पीढियों के बाद का रंग उसकी आज की पीढ़ी से गहरा ही होगा।"

और अंतरिक्ष का क्या होगा? अगर मनुष्य ने मंगल ग्रह पर बस्तियां बना लीं तो हम कैसे दिखेंगे? कम ग्रुत्वाकर्षण के कारण हमारी मांसपेशियों की बनावट बदल जाएगी। शायद हमारे हाथ-पैर और लंबे हो जाएं। हिम युग जैसे ठंडे वातावरण में क्या हमारे शरीर की चर्बी बढ़ जाएगी और क्या हमारे पूर्वजों की तरह हमारे शरीर के बाल ही हमें ठंड से बचाएंगे? हमें अभी नहीं पता, लेकिन इतना जरूर है कि मनुष्य में आनुवांशिक बदलाव हो रहे हैं।

जेसन के मुताबिक हर साल मानव जीनोम के 3.5 बिलियन बेस पेयर में से लगभग दो में बदलाव हो रहा है। ये सच में शानदार है और इस इस बात का सबूत भी कि लाखों-करोड़ों साल बाद इंसान ऐसा नहीं दिखेगा जैसा आज दिखता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed