मोदी सरकार का ये कानून, जिसकी मदद से आतंकवाद का फन कुचलने में लगे हैं अमित शाह
केंद्र में मोदी सरकार दूसरी बार जब सत्ता में आई तो उसके दो-तीन माह के भीतर कई अहम कानूनों को मंजूरी मिली थी। कुछ कानून ऐसे भी थे, जिनमें संशोधन कर उन्हें पहले के मुकाबले कहीं अधिक असरदार और कठोर बनाया गया।
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गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून, 1967 में संशोधन कर इसमें नए प्रावधान शामिल किए गए। इसी का नतीजा था कि कानून बनने के एक महीने बाद ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर मौलाना मसूद अजहर को कुख्यात आतंकवादी घोषित कर दिया। हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी और दाऊद इब्राहीम भी इसी श्रेणी में शामिल कर दिए गए। उसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में इस कानून के जरिए आतंकवाद पर नकेल कसनी शुरू कर दी। एनआईए के अफसर के लिए आतंकी मामलों में शामिल किसी व्यक्ति की संपत्ति को जब्त करने के लिए संबंधित राज्य के डीजीपी की मंजूरी लेना जरूरी नहीं रहा। केवल एनआईए के महानिदेशक की मंजूरी ही काफी है। मोदी सरकार के इसी कानून के जरिए अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आतंकवाद का फन कुचलने में लगे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को गैर-कानूनी गतिविधियां (निषेध) अधिनियम 1967 (2019 में संशोधित के अनुसार) का इस्तेमाल कर नौ लोगों को आतंकवादी घोषित कर दिया। इन सभी लोगों का नाम उक्त अधिनियम की चौथी अनुसूची में शामिल करने का फैसला किया गया है। इनमें पाकिस्तान में डेरा डाले आतंकवादी संगठन 'बब्बर खालसा इंटरनेशनल' का प्रमुख वाधवा सिंह बब्बर, पाकिस्तान में ही डेरा डाले आतंकवादी संगठन 'इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन' का प्रमुख लखबीर सिंह, पाकिस्तान में डेरा डाले आतंकवादी संगठन 'खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स' का प्रमुख रणजीत सिंह, पाकिस्तान में डेरा डाले आतंकवादी संगठन 'खालिस्तान कमांडो फोर्स' का प्रमुख परमजीत सिंह, जर्मनी में रहने वाला आतंकवादी संगठन 'खालिस्तान ज़िंदाबाद फोर्स' के प्रमुख सदस्य भूपिंदर सिंह भिंडा, गुरमीत सिंह बग्गा, अमेरिका में रहने वाला गैर-कानूनी संस्था 'सिख फॉर जस्टिस' का प्रमुख सदस्य गुरपतवंत सिंह पन्नुन, कनाडा में रहने वाला 'खालिस्तान टाइगर फोर्स' का प्रमुख हरदीप सिंह निज्जर और यूनाइटेड किंगडम में रहने वाला आतंकवादी संगठन 'बब्बर खालसा इंटरनेशनल' का प्रमुख परमजीत सिंह शामिल है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने ट्वीट में क्या कहा था
इनसे पहले हाफिज सईद जो कि वर्ष 2008 के दौरान मुंबई में हुए आतंकवादी हमले का मास्टरमाइंड, वर्ष 2001 में संसद पर हुए हमले और गत वर्ष पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार है, उसे और तीन अन्य कुख्यात लोगों को मोदी सरकार के इसी कानून की बदौलत आतंकवादी घोषित किया जा सका। उस वक्त अमेरिकी विदेश मंत्रालय के दक्षिण तथा मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो में कार्यकारी उपमंत्री एलिस वेल्स ने भी इस कानून को लेकर ट्वीट किया था। उन्होंने कहा था, 'हम भारत के साथ खड़े हैं। नए कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इन चार कुख्यात लोगों को आतंकवादी घोषित किया जा सका। हम भारत की सराहना करते हैं। इस नए कानून ने आतंकवाद से लड़ने के लिए भारत-अमेरिका के संयुक्त प्रयासों में नई संभावनाएं खोल दी हैं।
सदन में शाह ने आतंकी यासीन भटकल का उदाहरण दिया था
जब इस कानून में बदलाव को लेकर बिल सदन में पेश किया गया तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकी यासीन भटकल का उदाहरण दिया था। अनलॉफुल ऐक्टिविटीज (प्रिवेंशन) अमेंडमेंट बिल 2019 (यूएपीए) गत वर्ष जुलाई माह के दौरान सदन में पेश किया गया। लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद इसे राज्यसभा ने भी पास कर दिया। बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री शाह ने आतंकवाद के खिलाफ कड़े कानून की जरूरत पर जोर दिया था। इस बिल में संगठनों के साथ-साथ आतंकी गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों को भी आतंकी घोषित किए जाने का प्रावधान है।
इस कानून की आवश्यकता पर बल देते हुए शाह ने लोकसभा में आतंकी यासीन भटकल का उदाहरण देते हुए कहा था कि एनआईए ने उसके संगठन इंडियन मुजाहिदीन को आतंकवादी संगठन घोषित किया था, मगर भटकल को आतंकवादी घोषित करने के लिए कानून में कोई प्रावधान नहीं था। इसी का फायदा उठाते हुए भटकल ने 12 आतंकी घटनाओं को अंजाम दे दिया। संशोधित कानून के तहत अब केंद्र सरकार ऐसे संगठनों या व्यक्तियों को आतंकी संगठन या आतंकवादी घोषित कर सकती है, जो आतंकी कृत्य को अंजाम देते हों या उनमें शामिल हों, आतंकवाद के लिए तैयारी कर रहे हों, आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हों और आतंकवाद में किसी भी तरह से शामिल रहे हों।
आतंकियों और उनके संगठनों की संपत्तियां हो रही हैं जब्त
नए आतंकवाद-विरोधी कानून के तहत आतंकी संगठनों की संपत्तियां जब्त की जा रही हैं। मामले की जांच एनआईए का कोई अफसर करता है तो उसे आतंकी की संपत्ति जब्त करने के लिए संबंधित राज्य के डीजीपी की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होती। केवल एनआईए के महानिदेशक की मंजूरी ही लेनी होती है। इस कानून से एनआईए को मजबूती मिली है। अब एनआईए को जहां ये लगता है कि उसके पास किसी मामले में पुख्ता सबूत हैं तो वह आतंकी से जुड़ी संपत्ति जब्त कर लेती है।