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साथियों के साथ कार पूलिंग कर ऑफिस जाते थे जस्टिस कर्णन, अब छह महीने रहना पड़ेगा जेल

Wed, 21 Jun 2017 05:29 PM IST
amarujala.com- Presented by : हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Presented by : हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Wed, 21 Jun 2017 05:29 PM IST
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know about Justice karnan's unknown stories

सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के बाद छह महीने की सजा पाने वाले कोलकाता हाइकोर्ट के पूर्व जस्टिस सीएस कर्णन की अंतरिम जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जिसके बाद तय हो गया है कि जस्टिस कर्णन को अब छह महीने जेल में ही काटने होंगे। यूं तो कर्णन का विवादों से लंबा नाता रहा है लेकिन कई मौकों पर वह अपने साथी जजों के लिए मिसाल भी पेश करते रहे हैं।

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जस्टिस कर्णन के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने कभी अपने पद का विशेष लाभ लेने का प्रयास नहीं किया। यहां तक की कोलकाता हाईकोर्ट में नियुक्ति के दौरान वह साथी जजों के साथ कार पूलिंग करके ऑफिस पहुंचते थे, वो भी तब जब उन्हें सरकारी खर्चे पर कार मिली हुई थी।
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इसके अलावा वह सरकारी आवास में रहने के दौरान भी कम से कम सरकारी सुविधाओं का उपयोग करते थे, कहीं जाते थे तो निजी गाड़ी से ही सफर करने को प्राथमिकता देते थे। हालांकि इन तमाम बातों से अलग जस्टिस कर्णन की चर्चा उनके विवादों के कारण हुई। इनमें उनके कई बयान भी प्रमुख थे। 

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भारत में पैदा होने पर जताया था दुख

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उनके नाम के साथ विवादों की शुरूआत साल 2011 से हो गई थी। वह वर्ष 2011 से ही आरोप लगाते रहे हैं कि दलित होने की वजह से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने 2011 में अनुसूचित जाति आयोग को पत्र लिखकर अपने आरोप दोहराए थे। बीते साल अपने ट्रांसफर ऑर्डर के बाद जस्टिस कर्णन ने कहा था कि उनको दु:ख है कि वह भारत में पैदा हुए। वह किसी ऐसे देश में जाना चाहते हैं जहां जातिवाद न हो।

न्यायमूर्ति कर्णन शुरू से ही कॉलेजियम पर दलित विरोधी नीति अपनाने के आरोप लगाते रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट के 20 जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी को जस्टिस कर्णन को नोटिस जारी करते हुए पूछा कि क्यों न इसे कोर्ट की अवमानना माना जाए।

बीते वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन का तबादला मद्रास से कलकत्ता हाईकोर्ट में कर दिया। तब उन्होंने खुद ही इस आदेश पर रोक लगा दी और देश के मुख्य न्यायाधीश से स्थानांतरण पर सफाई भी मांगी। हालांकि बाद में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर के साथ बंद कमरे में हुई एक बैठक के बाद न्यायमूर्ति कर्णन कलकत्ता हाईकोर्ट आने पर सहमत हो गए थे।

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