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जानिए क्या है ब्रह्मोस, जिसकी जासूसी के आरोप में गिरफ्तार हुआ डीआरडीओ का इंजीनियर 

Mon, 08 Oct 2018 05:37 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 08 Oct 2018 05:37 PM IST
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know About brahmos missile Whose secrets leaking DRDO employee held 
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल देश की सबसे आधुनिक और दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है। यह क्रूज मिसाइल पहाड़ों की छाया में छुपे दुश्मनों के ठिकानों को निशाना बना सकती है। यह एक ऐसी खुफिया सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसे पनडुब्बियों, जहाजों, विमानों या जमीन से प्रक्षेपित किया जा सकता है। इसे तीनों सेनाओं में शामिल किया जा चुका है। 
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गति : 2.8 मैक या 3,400 प्रति घंटे की रफ्तार और 3,700 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हमला कर सकती है। मारक क्षमता : 290 किमी से लेकर 300 किमी तक।
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नामकरण : ब्रह्मोस का नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा से मिलकर बना है। इसे भारत-रूस का साझा प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया है। यह कंपनी भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिया का साझा उद्यम है।
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विशेषताएं-
- मिसाइल पनडुब्बी, जहाज, एयरक्राफ्ट या जमीन से भी लांच की जा सकती है।
- ब्रह्मोस की रफ्तार अमेरिकी सेना की मिसाइल टॉमहॉक से चार गुनी तेज है।
- जहाज और जमीन से लांच होने पर यह मिसाइल 200 किलो युद्धसामग्री ले जा सकती है।
- वहीं एयरक्राफ्ट से लांच होने पर 300 किलो के युद्धसामग्री ले जाने में सक्षम।
- मेनुवरेबल तकनीक से लैस होने के करण दागे जाने के बाद यदि लक्ष्य रास्ता बदल ले तो यह भी अपना रास्ता बदल लेती है और हर हाल में उसे निशाना बनाती है।
- पहली बार लांचिंग : भारतीय नौसेना ने 7 अक्टूबर 2012 को भी आईएनएस तेज से ब्रह्मोस को लांच किया था।
 

ब्रह्मोस का इतिहास-

ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत के रक्षा शोध और विकास संगठन (डीआरडीओ) व रूस के एनपीओएम द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया है। इसका पहला सफल लॉन्च 12 जून, 2001 को हुआ था। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। बता दें कि 12 फरवरी 1998 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल टेक्नॉलजिस्ट डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम और रूस के प्रथम डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर एन.वी. मिखाइलॉव ने एक इंटर-गवर्मेन्टल ऐग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया था। इसके बाद ही ब्रह्मोस बनाने पर मुहर लगी थी। 

उपलब्धि-
आईएनएस राजपूत पहला जहाज था जिस पर मिसाइल को 2005 में पहली बार शामिल किया गया था। भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई प्लेटफार्म पर ब्रह्मोस एयर-लॉन्च का परीक्षण किया गया था। भारतीय सेना ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के तीन रेजिमेंटों (हवा, जमीन और समुंद्र) को शामिल किया है। 
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