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राजस्थान: बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा, परिवार को पंचायत ने किया बेदखल

Mon, 30 Jul 2018 10:41 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी Updated Mon, 30 Jul 2018 10:41 AM IST
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Khap panchayat ostracize family because four daughters shouldered the bier of their dead father

बूंदी जिले के हरिपुरा गांव की खाप पंचायत ने 28 दिन पहले एक पांच साल की बच्ची को इसलिए जाति से बेदखल कर दिया था क्योंकि उसने गलती से टिटिहरि के अंडो को नुकसान पहुंचाया था। यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि रविवार को बरली बूंदी रागेर बस्ती की पंचायत ने रागेर परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया है। उन्हें यह सजा केवल इसलिए दी गई है क्योंकि चार बेटियों ने अपने मृत पिता की अर्थी को कंधा दिया और उनका अंतिम संस्कार किया।

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रागेर समुदाय के 58 साल के दुर्गाशंकर टेलर की शनिवार रात को एक लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई थी। उनकी आखिरी इच्छा के अनुसार चारों बेटियों ने उनका अंतिम संस्कार किया। इसका समुदाय के पंचों ने विरोध किया और उन्हें समाज से बहिष्कृत करने की धमकी दी। इसके अलावा समाज के किसी भी सदस्य को अंतिम संस्कार में शामिल ना होने के लिए कहा। इसके बावजूद बेटियां अपने निर्णय पर टिकी रहीं और उन्होंने अपने पिता की अंतिम इच्छा को पूरा किया।
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इसके बाद परिवार और उनके रिश्तेदारों को समुदाय परिसर में अंतिम संस्कार के बाद नहाने और खाने को नहीं दिया गया। सबसे बड़ी लड़की मीना ने कहा, 'समुदाय के पंचों ने पहले हमें अर्थी को कंधा देने और अंतिम संस्कार को ना करने के लिए कहा। लेकिन जब हम अपने निर्णय पर अडिग रहे तो उन्होंने हमसे कहा कि हम अपने किए के लिए मां के सामने दण्डवत माफी मांगे। हमने कोई माफी नहीं मांगी क्योंकि हम जानते हैं कि हमने कुछ गलत नहीं किया है।'
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मीना ने आगे बताया कि जब हम श्मशान घाट से वापस लौटे तो सामुदायिक परिसर को बंद पाया और सभी परिवार के पुरुष और महिलाओं को घर में नहाना पड़ा। बीए अंतिम वर्ष की छात्रा और दूसरी बेटी कलावती ने कहा, 'यह हमारे पिता की आखिरी इच्छा थी कि उनकी चार बेटियां उनकी अर्थी को कंधा दें और अंतिम संस्कार करें क्योंकि हमारा कोई भाई नहीं है। हमने कोई गुनाह नहीं किया है।' लड़कियों के मामा तिलकचंद ने कहा, 'हमने समुदाय के पंचों से हमारी चार बेटियों द्वारा किए गए कार्य के लिए माफी मांगी लेकिन वह स्थिर रहे और केवल कुछ पढ़-लिखे सदस्य अंतिम संस्कार में शामिल हुए।'


जब समुदाय के प्रमुख चंदूलाल चंदेलिया से संपर्क किया गया तो उन्होंने परिवार को समाज से बहिष्कृत करने की बात को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह शहर से बाहर थे और चार बेटियों द्वारा पिता की अर्थी को कंधा देने का कदम साहसिक है। समुदाय के बाहर कुछ लोगों की हमसे दुश्मनी है और वही लोग परिवार के सामाजिक बहिष्कार की बातें फैला रहे हैं। बूंदी नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष मोजू लाल ने भी पंचों द्वारा परिवार का बहिष्कार करने की बात नकारी।

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