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संघ की पैंट की लंबाई बढ़ने में खादी को दिख रही अपनी 'चांदी'

Tue, 15 Mar 2016 01:00 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 15 Mar 2016 01:00 PM IST
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khadi aayog seen 1000 crore business in sangh dress change

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अपनी पोशाक में बदलाव करने की घोषणा के बाद अभी तक दम तोड़ती दिख रही खादी को राहत मिलने की उम्‍मीद दिख रही है। खादी ग्रामोद्योग आयोग को उम्‍मीद है कि निक्कर से पैंट में बदलाव के सहारे वह भी अच्छी कमाई कर सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार आयोग ने इस संबंध में संघ के वरिष्ठ नेताओं से बात की है ताकि उन्हें पैंट की सप्लाई की जा सके। 

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एक अनुमान के मुताबिक देशभर में सक्रिय स्वयंसेवकों की संख्या एक करोड़ से ज्यादा है। आयोग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने बताया कि उन्हें उम्‍मीद है इस डील से एक हजार करोड़ रुपये तक का व्यवसाय मिल सकता है, जो फिलहाल रोजाना 100 से 150 करोड़ के करीब है।
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सक्सेना के अनुसार उनकी पहले से ही आरएसएस के बड़े नेताओं से इस संबंध में बात चल रही है, यह लगभग पक्का भी हो चुका है। इसका फायदा ये होगा कि इससे आयोग की कमाई के अलावा खादी से जुड़े ग्रामीण लोगों को रोजगार मिल सकेगा।

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संघ के नेताओं से आयोग की डील हुई पक्की

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इससे रोजाना 3-4 घंटे काम करने वाले खादी कामगारों को बढ़कर 5-6 घंटे का काम मिल सकेगा। सक्सेना बताते हैं कि पूर्व में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी खादी को बढ़ावा देने के लिए सरकारी कर्मचारियों से हफ्ते में एक दिन खादी पहनने की अपील कर चुके हैं। इससे भी आयोग के व्यवसाय पर असर पड़ा है। 

उन्होंने बताया कि मोदी जैकेट की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से स्कूल कालेज के छात्र भी अब इसे अपनाने लगे हैं इसी कड़ी में हम खादी के ट्राउजर के लिए भी एक बड़े बाजार की उम्‍मीद कर रहे हैं।

सक्सेना के अनुसार खादी आयोग के पास देशभर के विभिन्न शहरों में 7050 से ज्यादा खादी की दुकानों का विशाल बाजार है जो देशभर के एक करोड़ से ज्यादा स्वयंसेवकों को आसानी से पैंट सप्लाई कर सकता है। 

आयोग सामान्य कपड़े खरीदने वालों को 3 फीसदी छूट और पैंट पर 35 फीसदी तक की छूट देगा। आमतौर पर खादी से तैयार होने वाली पैंट की कीमत 350-600 रुपये तक बैठती है।

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