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खबरों के खिलाड़ी: क्या अयोध्या में आमने-सामने होंगे योगी-अखिलेश, विश्लेषकों ने बताई जुबानी जंग की असली कहानी
Sat, 17 Oct 2026 05:06 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 17 Oct 2026 05:06 PM IST
सार
खबरों के खिलाड़ी में चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
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खबरों के खिलाड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीते दिनों सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विधानसभा चुनाव लड़ने की चुनौती दी। जवाब में योगी आदित्यनाथ ने कहा अखिलेश यादव अयोध्या से चुनाव लड़ें, हम भी लड़ेंगे। आमने-सामने मुकाबला हो जाए और तय हो जाए कि किसमें कितना दम है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
पीयूष पंत: दोनों के लिए ही ये चुनाव बहुत अहम है। योगी आदित्यनाथ अगर जीतते हैं तो उनकी दिल्ली की गद्दी पर दावेदारी मजबूत हो जाएगी। वहीं, हारने पर गोरखपुर वापसी होगी। वहीं, अखिलेश के लिए भी जीत हार अस्तित्व का प्रश्न है। अयोध्या का जिक्र करके अखिलेश भाजपा को ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि आप संकट में हैं। वहीं, योगी आदित्यनाथ को लग रहा है कि हिंदुत्व का कार्ड अभी भी चलेगा। इसलिए वो उसी लाइन पर चल रहे हैं।
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पीयूष पंत: दोनों के लिए ही ये चुनाव बहुत अहम है। योगी आदित्यनाथ अगर जीतते हैं तो उनकी दिल्ली की गद्दी पर दावेदारी मजबूत हो जाएगी। वहीं, हारने पर गोरखपुर वापसी होगी। वहीं, अखिलेश के लिए भी जीत हार अस्तित्व का प्रश्न है। अयोध्या का जिक्र करके अखिलेश भाजपा को ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि आप संकट में हैं। वहीं, योगी आदित्यनाथ को लग रहा है कि हिंदुत्व का कार्ड अभी भी चलेगा। इसलिए वो उसी लाइन पर चल रहे हैं।
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राकेश शुक्ल: अयोध्या में जाकर अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ को चुनौती नहीं दी बल्कि हिंदुत्व के चेहरे को चुनौती दी और योगी आदित्यनाथ ने उसे स्वीकार कर लिया। यानी, दोनों पक्षों में लड़ाई बराबरी की है। दोनों अपने-अपने मतदाताओं को संदेश दे रहे हैं।
अनुराग वर्मा: अगर आप फैजाबाद लोकसभा और अयोध्या विधानसभा सीट की बात करेंगे तो फैजाबाद लोकसभा सीट में कुछ सीटें मुस्लिम बहुल है। वहीं, अयोध्या विधानसभा सीट पर भाजपा को हराना मुश्किल है। ये पूरा वार्तालाप जो है उसमें अगर उदाहरणों को देखें तो ऐसे बहुत कम दिखता है जब दो दिग्गज आमने-सामने लड़े हैं। अयोध्या ऐसी सीट रही है जिसने आचार्य कृपलानी को भी हराया है और आचार्य नरेंद्र देव को भी हराया है।
अनुराग वर्मा: अगर आप फैजाबाद लोकसभा और अयोध्या विधानसभा सीट की बात करेंगे तो फैजाबाद लोकसभा सीट में कुछ सीटें मुस्लिम बहुल है। वहीं, अयोध्या विधानसभा सीट पर भाजपा को हराना मुश्किल है। ये पूरा वार्तालाप जो है उसमें अगर उदाहरणों को देखें तो ऐसे बहुत कम दिखता है जब दो दिग्गज आमने-सामने लड़े हैं। अयोध्या ऐसी सीट रही है जिसने आचार्य कृपलानी को भी हराया है और आचार्य नरेंद्र देव को भी हराया है।
विनोद अग्निहोत्री: अखिलेश यादव जानते हैं कि चुनाव परसेप्शन पर जीते जाते हैं। उस वक्त जब डीपी यादव को शिवपाल यादव पार्टी में शामिल करा रहे थे उस वक्त अखिलेश यादव ने बयान दिया कि डीपी यादव जैसे लोगों की जगह समाजवादी पार्टी में नहीं है। इसका उन्हें बहुत लाभ मिला। 2017 में अखिलेश यादव अपनी छवि विकास पुरुष की बना रहे थे, लेकिन पार्टी परिवारिक झगड़ों में फंस गई और हार गए। 2022 में समाजवादी पार्टी के पक्ष में नरेटिव नहीं गढ़ पाए। वहीं, योगी आदित्यनाथ ने जो पांच साल में काम किए उसका फायदा भाजपा को मिला।