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केरलम विधानसभा में सीईसी पर घमासान: ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव पारित, पैनल में किस-किस का नाम?
Mon, 12 Oct 2026 02:25 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
एएनआई, तिरुवनंतपुरम
एएनआई, तिरुवनंतपुरम
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Mon, 12 Oct 2026 02:25 PM IST
सार
केरलम विधानसभा में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की गई। वहीं, भाजपा के तीन सदस्यों ने प्रस्ताव का विरोध किया।
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सीईसी पर केरल विधानसभा में प्रस्ताव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
केरलम विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें चुनाव आयोग के कामकाज पर लगे आरोपों के कारण मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाले पैनल में बदलाव की मांग की गई। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की ओर से पेश किया गया प्रस्ताव संशोधनों के साथ पारित हो गया। हालांकि तीन भाजपा सदस्यों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया।
सीएम ने प्रस्ताव पेश किया
केरलम के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सोमवार को यह प्रस्ताव पेश किया। इसमें मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं पर चिंता जताई गई थी। इन अनियमितताओं में बिना किसी स्पष्ट नियम या पूर्व सूचना के योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात भी शामिल थी।
केरलम के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा, ".केरलम विधानसभा ने पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया है। इस एतिहासिक प्रस्ताव के माध्यम से केरलम ने तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं।
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क्या आरोप लगाया?
आरोप लगाया गया कि रिविजन प्रक्रिया में तकनीकी हेरफेर और अनियमितताओं के कारण हाशिए पर रहने वाले समुदायों, अल्पसंख्यकों, प्रवासी श्रमिकों और युवा मतदाताओं के वोटिंग अधिकार छिनने का खतरा है।
प्रस्ताव में क्या है?
प्रस्ताव में मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया गया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि चुनाव आयोग ने सॉफ्टवेयर सिस्टम के ज़रिए मतदाता सूची तैयार करने वाले 'इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स' की शक्तियों को कम कर दिया है। इसके साथ ही मौजूदा नियमों के खिलाफ जाकर 'फॉर्म 6' में संशोधन किया है।
इसमें उन रिपोर्टों का भी जिक्र किया गया जिनमें कहा गया था कि आयोग के ज्यादातर सदस्यों ने इन कदमों पर असहमति जताई थी। सुधारात्मक कदम उठाने की मांग करते हुए, प्रस्ताव में चुनाव आयोग से कहा गया कि वह कथित अनियमितताओं को ठीक करे और उन सभी योग्य नागरिकों के वोट देने के अधिकार बहाल करे जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।
प्रस्ताव में क्या मांग की गई है?
इसमें कहा गया कि एक संवैधानिक संस्था के तौर पर चुनाव आयोग को निष्पक्ष और सरकार के प्रभाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए। साथ ही, यह भी कहा गया कि वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर से चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा कम होता है। प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को चुनने वाली समिति के पुनर्गठन की भी मांग की गई। इसमें सुझाव दिया गया कि इस पैनल में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों।
केरलम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने क्या कहा?
इस मामले में केरलम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा, 'आज केरलम विधानसभा में हमने एक बहुत ही अजीब नजारा देखा। सीपीएम और कांग्रेस के 137 विधायक ,जो आम तौर पर एक-दूसरे के विरोधी होने का दावा करते हैं। उन्होंने मिलकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक गैर-कानूनी प्रस्ताव पास किया। यह राहुल गांधी की धोखेबाजी वाली राजनीति का एक और उदाहरण है।
मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, और विधानसभा ने सभी स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हुए इस मामले पर कार्रवाई की है। आज यह साफ है कि कांग्रेस पार्टी, और खासकर वीडी सतीशन, लोगों का ध्यान भटकाने के लिए बेताब हैं। भारतीय लोकतंत्र की अखंडता के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।'
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सीएम ने प्रस्ताव पेश किया
केरलम के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सोमवार को यह प्रस्ताव पेश किया। इसमें मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं पर चिंता जताई गई थी। इन अनियमितताओं में बिना किसी स्पष्ट नियम या पूर्व सूचना के योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात भी शामिल थी।
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केरलम के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा, ".केरलम विधानसभा ने पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया है। इस एतिहासिक प्रस्ताव के माध्यम से केरलम ने तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं।
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- मतदान का अधिकार बहाल किया जाए: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं को दूर किया जाए और गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर किए गए सभी पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार तुरंत बहाल किए जाएं।
- मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जाए: ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाए, जिनकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे हैं।
- चयन प्रक्रिया में सुधार किया जाए: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली चयन समिति का पुनर्गठन किया जाए। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए, ताकि इस संस्था की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।"
क्या आरोप लगाया?
आरोप लगाया गया कि रिविजन प्रक्रिया में तकनीकी हेरफेर और अनियमितताओं के कारण हाशिए पर रहने वाले समुदायों, अल्पसंख्यकों, प्रवासी श्रमिकों और युवा मतदाताओं के वोटिंग अधिकार छिनने का खतरा है।
प्रस्ताव में क्या है?
प्रस्ताव में मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया गया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि चुनाव आयोग ने सॉफ्टवेयर सिस्टम के ज़रिए मतदाता सूची तैयार करने वाले 'इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स' की शक्तियों को कम कर दिया है। इसके साथ ही मौजूदा नियमों के खिलाफ जाकर 'फॉर्म 6' में संशोधन किया है।
इसमें उन रिपोर्टों का भी जिक्र किया गया जिनमें कहा गया था कि आयोग के ज्यादातर सदस्यों ने इन कदमों पर असहमति जताई थी। सुधारात्मक कदम उठाने की मांग करते हुए, प्रस्ताव में चुनाव आयोग से कहा गया कि वह कथित अनियमितताओं को ठीक करे और उन सभी योग्य नागरिकों के वोट देने के अधिकार बहाल करे जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।
प्रस्ताव में क्या मांग की गई है?
इसमें कहा गया कि एक संवैधानिक संस्था के तौर पर चुनाव आयोग को निष्पक्ष और सरकार के प्रभाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए। साथ ही, यह भी कहा गया कि वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर से चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा कम होता है। प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को चुनने वाली समिति के पुनर्गठन की भी मांग की गई। इसमें सुझाव दिया गया कि इस पैनल में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों।
केरलम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने क्या कहा?
इस मामले में केरलम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा, 'आज केरलम विधानसभा में हमने एक बहुत ही अजीब नजारा देखा। सीपीएम और कांग्रेस के 137 विधायक ,जो आम तौर पर एक-दूसरे के विरोधी होने का दावा करते हैं। उन्होंने मिलकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक गैर-कानूनी प्रस्ताव पास किया। यह राहुल गांधी की धोखेबाजी वाली राजनीति का एक और उदाहरण है।
मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, और विधानसभा ने सभी स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हुए इस मामले पर कार्रवाई की है। आज यह साफ है कि कांग्रेस पार्टी, और खासकर वीडी सतीशन, लोगों का ध्यान भटकाने के लिए बेताब हैं। भारतीय लोकतंत्र की अखंडता के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।'