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Kerala HC: गुरुवयूर मंदिर में 'कोडथी विलाक्कू' शब्द के इस्तेमाल पर अदालत ने जताई आपत्ति, जानें वजह
Wed, 02 Nov 2022 09:28 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 02 Nov 2022 09:28 PM IST
सार
अदालत ने कहा कि तथ्य यह है कि अन्य धर्मों को मानने वालों सहित सभी न्यायिक अधिकारी वार्षिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मजबूर / बाध्य महसूस करते हैं जिसमें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी शामिल होते हैं।
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केरल हाईकोर्ट
विस्तार
केरल हाई कोर्ट ने त्रिशूर जिले के गुरुवयूर मंदिर में एक धार्मिक आयोजन के संबंध में 'कोडथी विलाक्कू' (अदालत दीपक) शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे यह लगता है कि अदालतें इसका आयोजन कर रही हैं। हाई कोर्ट ने 1 नवंबर को जारी एक आधिकारिक ज्ञापन में कहा है कि संविधान के तहत धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक संस्थानों के रूप में अदालतों को किसी विशेष धर्म को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में शामिल नहीं देखा जा सकता है। त्रिशूर जिले के प्रभारी न्यायाधीश न्यायमूर्ति एके जयशंकरन नांबियार के निर्देश पर ज्ञापन जारी किया गया है।
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अदालत ने दी ये दलील
ज्ञापन में कहा गया है कि हाई कोर्ट द्वारा यह देखा गया है कि चावक्कड़ मुंसिफ कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों की एक आयोजन समिति द्वारा गुरुवायुर मंदिर में 'कोडथी विलाक्कू' नामक एक वार्षिक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था। जबकि बार एसोसिएशन के सदस्यों द्वारा व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से इस तरह के आयोजन करने पर कोई आपत्ति नहीं हो सकती है। 'कोडथी विलाक्कू' नाम का उपयोग अस्वीकार्य है क्योंकि इससे यह लगता है कि हमारे राज्य में अदालतें किसी तरह से इसके आयोजन से जुड़ी हुई हैं।
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अदालत ने कहा कि तथ्य यह है कि अन्य धर्मों को मानने वालों सहित सभी न्यायिक अधिकारी वार्षिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मजबूर / बाध्य महसूस करते हैं जिसमें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी शामिल होते हैं। यह दर्शाता है कि 'कोडथी विलाक्कू' शब्द किस हद तक भ्रामक हो सकता है। भविष्य में आयोजकों को 'कोडथी विलाक्कू' नाम का उपयोग करने से रोकने के लिए तरीकों का पता लगाया जा रहा है। त्रिशूर न्यायिक जिले के न्यायिक अधिकारियों को सलाह दी जाती है कि वे उक्त कार्यक्रम के आयोजन में सक्रिय रूप से शामिल न हों।
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जज का तबादला केरल हाईकोर्ट ने रद्द किया
केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य के कोझीकोड जिले में यौन उत्पीड़न के दो मामलों में एक आरोपी को जमानत देते समय अपने आदेश में महिलाओं के पहनावे पर विवादित टिप्पणी करनेवाले सत्र न्यायाधीश के तबादला आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि सत्र न्यायाधीश को स्थानांतरित करने का निर्णय दंडात्मक प्रकृति का और अनुचित था।
जस्टिस एके जयशंकरण नांबियार और मो नियास सीपी ने सत्र न्यायाधीश एस कृष्णकुमार का श्रम न्यायालय के पीठासीन अधिकारी के रूप में स्थानांतरण रद्द करते हुए कहा कि यह न केवल उनके लिए पूर्वाग्रही और कलंकित करनेवाला था, बल्कि राज्य में न्यायिक अधिकारियों के मनोबल पर भी हानिकारक प्रभाव डालता।
साथ ही, पीठ ने यह भी कहा कि जमानत आदेश में अपीलकर्ता की टिप्पणियां वास्तव में महिलाओं के लिए अपमानजनक और पूरी तरह अनुचित थीं। इससे पहले एक सितंबर को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सत्र न्यायाधीश के स्थानांतरण आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी थी। इस आदेश के खिलाफ सत्र न्यायाधीश ने अपील दाखिल की थी, जिसके बाद रजिस्ट्रार जनरल ने हलफनामा दाखिल किया था।