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केरल: 'बिना पर्याप्त प्रमाण के तथ्य की तरह पढ़ाया गया इतिहास', राज्यपाल अर्लेकर ने किया समीक्षा का आह्वान

Sun, 19 Apr 2026 03:18 AM IST
Nirmal Kant पीटीआई, तिरुवनंतपुरम।
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम। Published by: Nirmal Kant Updated Sun, 19 Apr 2026 03:18 AM IST
सार

केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने कहा कि भारतीय इतिहास को एक बार फिर आलोचनात्मक नजर से देखने की जरूरत है, क्योंकि कई मौजूदा वृतांत आक्रमणकारियों के दृष्टिकोण से प्रभावित हैं। उन्होंने आर्य आक्रमण सिद्धांत जैसी अवधारणाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि इन्हें लंबे समय तक बिना पर्याप्त प्रमाण के तथ्य की तरह पढ़ाया गया। पढ़िए रिपोर्ट-

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Kerala Guv calls for re-examining historical narratives
राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, राज्यपाल, केरल - फोटो : एक्स/राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर

विस्तार

केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने शनिवार को कहा कि वर्तमान ऐतिहासिक वृत्तांतों की फिर से समीक्षा और आलोचनात्मक विश्लेषण की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि ये वृत्तांत आक्रमणकारियों ने अपने हितों को पूरा करने के लिए गढ़े थे। अर्लेकर ने लोक भवन में डॉ.पी. राधाकृष्णन नायर की किताब '10000 इयर्स ऑफ इंडियन हिस्ट्री: ट्रुथ एंड मिथ' के विमोचन के अवसर पर यह बात कही। 
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'आक्रमणकारियों के दृष्टिकोण से लिखा गया इतिहास'
लोक भवन की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, राज्यपाल ने दावा किया कि भारत का अधिकांश दर्ज इतिहास आक्रमणकारियों द्वारा लिखा गया है, जिसमें उनका दृष्टिकोण और हितों का प्रभाव दिखाई देता है, जिससे कई बार गलत धारणाएं पीढ़ियों तक स्वीकार कर ली गईं। 
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'भारत की परंपरा अपना इतिहास थोपने की नहीं'
उन्होंने कहा कि आक्रमणकारी अक्सर इतिहास को इस तरह लिखते थे, जिससे उनके कृत्यों को सही ठहराया जा सके। जबकि भारत की परंपरा अन्य सभ्यताओं की तरह दूसरे देशों पर आक्रमण कर अपना इतिहास थोपने की नहीं रही है। अर्लेकर ने कहा कि ये कथित गलत व्याख्याएं केवल औपनिवेशिक इतिहास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उससे पहले के समय से भी जुड़ी हुई हैं।
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'बिना ठोस प्रमाण के पढ़ाई गईं अवधारणाएं'
उन्होंने आर्य आक्रमण सिद्धांत जैसी चर्चित अवधारणाओं का भी जिक्र किया और कहा कि इन्हें पर्याप्त प्रमाण के बिना लंबे समय तक अकादमिक रूप से पढ़ाया गया। उन्होंने अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए कहा कि ऐसे विचारों को बिना सवाल किए तथ्य के रूप में पढ़ाया जाता था, जिससे इनका प्रभाव गहरा हो गया। राज्यपाल ने मैक्स मूलर जैसे विद्वानों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ विदेशी इतिहासकारों की व्याख्याओं में बाद में त्रुटियां और पूर्वाग्रह पाए गए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत को इन ऐतिहासिक कथाओं की फिर से समीक्षा करने का अवसर मिला। लेकिन कई बार पुरानी धारणाओं को ही जारी रखा गया।

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उन्होंने यह भी कहा कि आज के शैक्षणिक ढांचे में भी जरूरी सुधार नहीं किए गए हैं और इतिहास की फिर से व्याख्या के प्रयासों का कई बार विरोध होता है। अर्लेकर ने भारत को एक सांस्कृतिक और दार्शनिक परंपराओं से जुड़ी सभ्यता बताया और कहा कि यही देश की एकता का आधार है। 

'राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान जरूरी'
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान किसी भी देश की मजबूती के लिए जरूरी है। कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इनमें पूर्व राज्यपाल पी एस श्रीधरन पिल्लई, न्यायमूर्ति के पी बालचंद्रन, इतिहासकार टी पी संकरन कुट्टी नायर और लेखक जॉर्ज ओनक्कूर शामिल थे।





 
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