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मानवता: अंतिम सांसें गिन रही मुस्लिम महिला को डॉक्टर ने सुनाया कलमा, वायरल हुई कहानी

Sat, 22 May 2021 04:33 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पल्लकड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पल्लकड़ Published by: प्रियंका तिवारी Updated Sat, 22 May 2021 04:33 PM IST
सार

केरल के अस्पताल में भर्ती एक मुस्लिम महिला जब अपनी अंतिम सासें ले रही थी तब एक हिंदू महिला डॉक्टर ने उसके कान में मुस्लिम धर्म के प्रार्थना को पढ़ा। डॉक्टर की यह कहानी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है और उनके इस कदम की सराहना की जा रही है।

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Kerala doctor narrates Kalama to Muslim patient counting last breath, the story goes viral on social media
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना महामारी के दौर में भी सोशल मीडिया पर हर रोज हिंदू-मुसलमान का राग अलापने वालों की कमी नहीं है, लेकिन केरल स्थित पल्लकड़ जिले से जो खबर सामने आई है, वह किसी मिसाल से कम नहीं है। कोरोना काल में डॉक्टरों के ईश्वर बनकर सामने आने के कई किस्से हैं, लेकिन यह किस्सा थोड़ा अलग है। मामला जिले के पट्टांबी इलाके में स्थित सेवाना हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (एसएचआरसी) का है, जहां एक हिंदू महिला डॉक्टर ने अंतिम सांसें गिन रही मुस्लिम धर्म की कोरोना मरीज को इस्लामिक प्रार्थना पढ़कर सुनाया। 

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प्रार्थना सुनने के बाद स्थिर हो गई महिला 
जानकारी के अनुसार कोरोना से बीमार हुई मुस्लिम महिला दो हफ्ते से एसएचआरसी में वेंटिलेटर पर थी और उसके रिश्तेदारों को आईसीयू में जाने की अनुमति नहीं थी। एक समाचार पत्र में छपी खबर के मुताबिक अस्पताल में कार्यरत डॉ. रेखा कृष्णा ने बताया कि मरीज को 17 मई को वेंटिलेटर से बाहर निकाला गया क्योंकि उनके बचने की उम्मीद नहीं थी व उनके परिजनों को इस बात की खबर थी। रेखा ने कहा, ‘जैसे ही मैं मरीज के पास पहुंची, मुझे लगा कि उन्हें दुनिया को अलविदा कहने में मुश्किल हो रही है। चूंकि वे मुस्लिम थीं, इसलिए मैंने धीरे-धीरे उनके कानों में कलमा पढ़ा। कलमा सुनने के बाद मैंने उन्हें गहरी सांस लेते हुए देखा और फिर वह स्थिर हो गईं।’
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मुझे जो गल्फ से मिला, वही लौटाया
डॉ. कृष्णा ने आगे बताया कि उन्होंने ऐसा कुछ भी करने के बारे में पहले से नहीं सोचा था, यह सब अचानक हुआ। उन्होंने कहा, ‘मैं ऐसा इसलिए कर पाई क्योंकि मैं दुबई में पैदा हुई और वहीं पली-बढ़ी, इसलिए मैं इस्लामिक रीति-रिवाजों और परंपराओं को जानती हूं। मेरे हिंदू होने के कारण गल्फ में मेरे साथ कभी भेदभाव नहीं हुआ। आज मैंने ऐसा करके केवल गल्फ से मिले सम्मान को लौटाया है।’ डॉ. रेखा कृष्णा के अनुसार यह कोई धार्मिक नहीं बल्कि मानवीय कार्य था। उन्होंने कहा कि कोविड-19 से संक्रमित मरीजों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे खुद को अकेला और अलग-थलग महसूस करते हैं। ऐसे में हमें मरीजों की मदद के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए। 
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सोशल मीडिया पर हो रही डॉक्टर की तारीफ 
सुन्नी समुदाय के इस्लाम विद्वान अब्दुल हमीद फैजी ने सोशल मीडिया पर डॉ. रेखा कृष्णा की तारीफ की। उन्होंने लिखा, ‘यह खबर दिल को छू लेने वाली है, खासकर ऐसे समय में जब लोगों को उनके धर्म के कारण पीट-पीट कर मार डाला जाता है। डॉक्टर रेखा ने देश के लिए एक नई मिसाल कायम की है।' बतातें चलें कि डॉ. कृष्णा ने अपनी यह कहानी अपने एक साथी डॉक्टर को बताई थी, जिसे उस साथी डॉक्टर ने सोशल मीडिया पर सभी के साझा कर दिया। इसके बाद से ही डॉ. कृष्णा के इस मानवीय कदम की कहानी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। 

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