मिसाल: केरल के बीड़ी मजदूर ने वैक्सीन के लिए दान की जीवन भर की कमाई, खाते में बचाए सिर्फ 850 रुपये
एक बीड़ी मजदूर की सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है। इस बीड़ी मजदूर ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दी है।
विस्तार
देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का कहर जारी है। कोरोना संक्रमण की रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए देश में 1 मई से 18 साल से ऊपर वाले सभी लोगों को कोविड वैक्सीन लगाई जाएगी। केंद्र सरकार की इस घोषणा के बाद से केरल में सभी को मुफ्त वैक्सीन के लिए राज्य सरकार ने फंडा इकट्ठा करने का अभियान शुरू किया है। इसके बाद से आम लोग भी मदद के लिए आगे आ रहे हैं और मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (सीएमडीआरएफ) में मदद राशि जमा करा रहे हैं। इस बीच एक बीड़ी मजदूर की सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है। इस बीड़ी मजदूर ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दी है।
केरल के कन्नूर में रहने वाले एक बुजुर्ग बीड़ी मजदूर जनार्दन ने कोविड-19 वैक्सीन लगवाने में असमर्थ लोगों की मदद के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में 2 लाख रुपये दान किए हैं। उन्होंने सालों में मेहनत मजदूरी कर के 2 दो लाख 850 रुपये जमा किए थे, जिसमें अब उनके खाते मात्र 850 रुपये बचे हैं। जर्नादन में कहा कि मुझे इतने पैसों की जरूरत नहीं, लेकिन लोगों को है। इसलिए दान कर रहा हूं।
सीएम ने की सराहना
इस बीड़ी मजदूर का केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने खुद ट्वीट करके शुक्रिया किया है। मुख्यमंत्री विजयन ने ट्वीट करते हुए लिखा, "सीएम रिलीफ फंड में किस तरह से लोग दान कर रहे हैं, इसकी कई कहानियां सामने आ रही हैं, जिसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने बैंक खाते से 2 लाख दान कर दिए, अब उनके खाते में 850 रुपए बचे हैं। यह एक दूसरे के लिए प्यार है जो हमें सबसे अलग बनाता है। आप सभी का धन्यवाद।"
बैंक अधिकारी ने दी सोशल मीडिया पर जानकारी
एक बैंक अधिकारी ने ही जनार्दन और उनके दान की जानकारी सोशल मीडिया पर सबसे पहले शेयर की थी। जर्नादन कानों से सुन नहीं सकते हैं, ऐसे में बैंक अधिकारियों ने दो लाख दान की बात पर हैरानी जताते हुए इशारों में पूछा कि सारा पैसा दान कर देंगे, तो खुद जिंदगी कैसे बसर करेंगे। जवाब में उन्होंने कहा कि उनकी जरूरतें बीड़ी बनाने के काम और विकलांग पेंशन से पूरी हो जाती हैं। उन्हें इससे ज्यादा की जरूरत नहीं है। इसके बाद से लोग जर्नादन की दरियादिली प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं।