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Kerala: केरल विधानसभा ने समान नागरिक संहिता के खिलाफ प्रस्ताव पास, सीएम विजयन बोले- यह मनुस्मृति पर आधारित
Tue, 08 Aug 2023 03:07 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,तिरुवनंतपुरम
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 08 Aug 2023 03:07 PM IST
सार
सीएम विजयन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत जब धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है और इसमें धार्मिक निजी नियमों का पालन करने का अधिकार शामिल है, तो उस पर रोक लगाने वाला कोई भी कानून संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगा।
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केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन
- फोटो : Social Media
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विस्तार
केरल विधानसभा में मंगलवार को सर्वसम्मति से समान नागरिक संहिता के विरोध में प्रस्ताव पास हो गया। यह प्रस्ताव पेश करते हुए केरल के सीएम पिनराई विजयन ने कहा कि यह एकतरफा और जल्दबाजी में उठाया गया कदम है। सीएम ने कहा कि संघ परिवार ने जिस यूसीसी की कल्पना की है, वह हिंदू शास्त्र मनुस्मृति पर आधारित है। उन्होंने कहा कि संघ परिवार ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह संविधान में मौजूद किसी चीज को लागू करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
कांग्रेस ने भी किया प्रस्ताव का समर्थन
विजयन ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक कानूनों का अपराधीकरण किया है और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बजाय हाशिए पर रह रहे लोगों के कल्याण की खातिर कदम नहीं उठाए। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी यूडीएफ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) ने राज्य सरकार के प्रस्ताव का स्वागत किया। उसने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद कई संशोधनों एवं बदलावों का सुझाव दिया।
सीएम बोले- यूसीसी लाना संविधान का उल्लंघन
सीएम विजयन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत जब धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है और इसमें धार्मिक निजी नियमों का पालन करने का अधिकार शामिल है, तो उस पर रोक लगाने वाला कोई भी कानून संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 44 केवल यह कहता है कि सरकार एक समान नागरिक संहिता स्थापित करने का प्रयास करेगी।
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विजयन ने कहा कि ऐसा कोई भी कदम बहस और चर्चा के बाद लोगों के बीच आम सहमति बनने पर उठाया जाना चाहिए और ऐसा नहीं करना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा भी इसे लेकर चिंतित है और मानती है कि यूसीसी लागू करना लोगों और पूरे देश की एकता पर हमला करने के लिए उठाया गया एक 'गैर-धर्मनिरपेक्ष कदम' है।
समान नागरिक संहिता चुनावी पैंतरेबाजी
इससे पहले केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने अपने एक ट्वीट में लिखा कि 'समान नागरिक संहिता पर चर्चा शुरू करना, संघ परिवार की चुनावी पैंतरेबाजी है ताकि अपने बहुमत के एजेंडे को आगे बढ़ाया जाए और सांप्रदायिक भेदभाव को गहराया जाए।' केरल सीएम ने केंद्र सरकार और न्यायिक आयोग से अपील की है कि वह समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रस्ताव को छोड़ दे और इसे जबरन लागू ना किया जाए। विजयन ने कहा कि समान नागरिक संहिता का कदम, देश की सांस्कृतिक विविधता और एक देश, एक संस्कृति को खत्म करने के सांप्रदायिक एजेंडे का हिस्सा है।
बता दें कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब है कि हर धर्म, जाति, संप्रदाय के लिए पूरे देश में एक ही नियम लागू होंगे। इसके तहत सभी धार्मिक समुदायों के लिए शादी, तलाक, विरासत, गोद लेने के नियम एक ही होंगे। भारत में सभी नागरिकों के लिए एक समान आपराधिक संहिता है लेकिन समान नागरिक कानून नहीं है।
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कांग्रेस ने भी किया प्रस्ताव का समर्थन
विजयन ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक कानूनों का अपराधीकरण किया है और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बजाय हाशिए पर रह रहे लोगों के कल्याण की खातिर कदम नहीं उठाए। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी यूडीएफ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) ने राज्य सरकार के प्रस्ताव का स्वागत किया। उसने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद कई संशोधनों एवं बदलावों का सुझाव दिया।
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सीएम बोले- यूसीसी लाना संविधान का उल्लंघन
सीएम विजयन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत जब धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है और इसमें धार्मिक निजी नियमों का पालन करने का अधिकार शामिल है, तो उस पर रोक लगाने वाला कोई भी कानून संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 44 केवल यह कहता है कि सरकार एक समान नागरिक संहिता स्थापित करने का प्रयास करेगी।
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विजयन ने कहा कि ऐसा कोई भी कदम बहस और चर्चा के बाद लोगों के बीच आम सहमति बनने पर उठाया जाना चाहिए और ऐसा नहीं करना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा भी इसे लेकर चिंतित है और मानती है कि यूसीसी लागू करना लोगों और पूरे देश की एकता पर हमला करने के लिए उठाया गया एक 'गैर-धर्मनिरपेक्ष कदम' है।
समान नागरिक संहिता चुनावी पैंतरेबाजी
इससे पहले केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने अपने एक ट्वीट में लिखा कि 'समान नागरिक संहिता पर चर्चा शुरू करना, संघ परिवार की चुनावी पैंतरेबाजी है ताकि अपने बहुमत के एजेंडे को आगे बढ़ाया जाए और सांप्रदायिक भेदभाव को गहराया जाए।' केरल सीएम ने केंद्र सरकार और न्यायिक आयोग से अपील की है कि वह समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रस्ताव को छोड़ दे और इसे जबरन लागू ना किया जाए। विजयन ने कहा कि समान नागरिक संहिता का कदम, देश की सांस्कृतिक विविधता और एक देश, एक संस्कृति को खत्म करने के सांप्रदायिक एजेंडे का हिस्सा है।
बता दें कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब है कि हर धर्म, जाति, संप्रदाय के लिए पूरे देश में एक ही नियम लागू होंगे। इसके तहत सभी धार्मिक समुदायों के लिए शादी, तलाक, विरासत, गोद लेने के नियम एक ही होंगे। भारत में सभी नागरिकों के लिए एक समान आपराधिक संहिता है लेकिन समान नागरिक कानून नहीं है।